बिहार में सुदूर संवेदन और जीआईएस से होगा हरे चारे का मानचित्रण, 38 जिलों में अध्ययन शुरू
धीरज
- 06 Apr 2026, 07:40 PM
- Updated: 07:40 PM
पटना, छह अप्रैल (भाषा) बिहार में हरे चारे की उपलब्धता और क्षेत्रफल के वैज्ञानिक आकलन के लिए सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग) और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इस पहल की शुरुआत सोमवार को पटना स्थित होटल चाणक्य में आयोजित सुदूर संवेदन एवं जीआईएस आधारित हरा चारा मानचित्रण अध्ययन कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम से हुई।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादन को सुदृढ़ बनाने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी उपायों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने और बेहतर प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ (कॉम्फेड) के प्रबंध निदेशक समीर सौरभ ने कार्यक्रम में कहा कि हरा चारा मानचित्रण से पशुपालकों को बेहतर योजना बनाने में सहायता मिलेगी और दुग्ध उत्पादन की लागत को नियंत्रित किया जा सकेगा।
राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), कोलकाता के क्षेत्रीय प्रमुख डॉ. सब्यसाची रॉय ने कार्यक्रम को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित किया।
राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड और बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की अंतरिक्ष उपयोग केंद्र इकाई के सहयोग से बिहार के सभी 38 जिलों में हरा चारा मानचित्रण अध्ययन आरंभ करने की पहल की है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सुदूर संवेदन और जीआईएस तकनीक के उपयोग से हरा चारा मानचित्रण की प्रक्रिया, डेटा संग्रहण तथा विश्लेषण की विधियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
अधिकारियों के अनुसार, हरा चारा मानचित्रण अध्ययन का उद्देश्य राज्य में चारा फसलों के क्षेत्रफल और विभिन्न किस्मों का सटीक आकलन करना है। दुग्ध उत्पादन की कुल लागत में चारा एवं पशु आहार का लगभग 70 प्रतिशत योगदान होता है। ऐसे में हरे चारे की उपलब्धता, गुणवत्ता और सतत आपूर्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यह अध्ययन चारा फसलों के क्षेत्र, गुणवत्तायुक्त बीजों की उपलब्धता तथा सिंचाई सुविधाओं के आधार पर समग्र स्थिति का वैज्ञानिक विश्लेषण उपलब्ध कराएगा। इससे डेटा आधारित नीति निर्माण और रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी तथा दुग्ध उत्पादन को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकेगा।
बयान में कहा गया कि बिहार सरकार, एनडीडीबी और कॉम्फेड के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई यह पहल राज्य के पशुपालकों के लिए नई संभावनाएं खोलेगी और दुग्ध क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जीआईएस एक ऐसी तकनीक है जिसमें नक्शों (मैप),उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों और स्थान की जानकारी का उपयोग करके किसी क्षेत्र का विश्लेषण किया जाता है — जैसे भूमि, फसल, पानी, सड़क और चारा आदि।
सुदूर संवेदन ऐसी तकनीक है जिसमें किसी जगह या वस्तु की जानकारी बिना सीधे वहां गए दूर से प्राप्त की जाती है, आमतौर पर उपग्रह, ड्रोन या हवाई कैमरों की मदद से ली जाती है।
भाषा कैलाश धीरज
धीरज
0604 1940 पटना