मतदाता लोगों के नाम हटाने का बदला लेने के लिए मतदान करें : ममता बनर्जी
रंजन
- 05 Apr 2026, 07:00 PM
- Updated: 07:00 PM
(तस्वीरों के साथ)
शमशेरगंज (प.बंगाल), पांच अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रविवार को मतदाताओं से उन लोगों की ओर से बदला लेने के लिए मतदान करने का आह्वान किया जिनके नाम एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से हटा दिये गए हैं।
तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने उन लोगों से न्यायाधिकरण के समक्ष अपील करने का भी आग्रह किया, जिनके नाम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं।
ममता ने अप्रैल 2025 में मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा के केंद्र में रहे शमशेरगंज में आयोजित चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ''लोगों के नाम हटाए जाने का बदला लेने और एसआईआर के खिलाफ अपना वोट डालें ताकि परिणाम इसे प्रतिबिंबित कर सकें।''
मुख्यमंत्री ने तृणमूल कार्यकर्ताओं से चार मई को मतगणना तिथि तक सतर्क रहने को कहा। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होंगे।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का स्पष्ट रूप से जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम हटाने के पीछे उनका हाथ है।
बनर्जी ने कहा, ''अगर आपमें हिम्मत है तो सीधे मुकाबला करें।''
उन्होंने चुनाव अवधि के दौरान सभी तृणमूल कार्यकर्ताओं से सतर्क रहने का आह्वान करते हुए बनर्जी ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल के हित में हमारे बूथ एजेंटों में से कोई भी भाजपा के हाथों खुद को नहीं बेचेगा।''
बनर्जी ने आशंका जताई कि कुछ स्थानों पर ईवीएम मशीनों को जानबूझकर खराब किया जाएगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को मशीनों की मरम्मत न करने दें और इसके बजाय मशीनों को बदलने की मांग करें।
तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने शमशेरगंज में पार्टी उम्मीदवार मोहम्मद नूर आलम और फरक्का में उम्मीदवार मोहम्मद अमीरुल इस्लाम के समर्थन में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर उनके खिलाफ झूठी अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया कि उन्होंने मुसलमानों के हित में ज्यादा कुछ नहीं किया है।
बनर्जी ने दावा किया कि उन्होंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम के कार्यान्वयन के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया है।
मुर्शिदाबाद में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के कार्यान्वयन के खिलाफ हिंसा हुई थी और उसमें पिता-पुत्र सहित कई लोगों की जान चली गई थी। भाजपा ने तृणमूल पर जिले के विभिन्न हिस्सों में हिंसक आंदोलन भड़काने का आरोप लगाया था।
बनर्जी ने विधानसभा चुनावों के कारण विकास कार्यों के ठप होने का दावा करते हुए कहा, ''उन्होंने (निर्वाचन आयोग ने) लगभग 500 अधिकारियों का तबादला कर दिया है, लेकिन यह केवल एक महीने के लिए है। उसके बाद काम फिर से शुरू हो जाएगा।''
मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग पर मतदाता सूची से ''कुछ लोगों के नाम हटाने और कुछ अन्य लोगों को डराने-धमकाने'' का आरोप लगाया।
उन्होंने सवाल किया कि विधानसभा चुनाव 2024 के आम चुनावों में इस्तेमाल की गई मतदाता सूचियों के आधार पर क्यों नहीं कराए जा सकते?
तृणमूल अध्यक्ष ने कहा, ''अगर मतदाता सूची में घुसपैठियों के नाम थे, तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी पहले उन्हीं के मतों के आधार पर जीते थे, इसलिए उन्हें पहले इस्तीफा दे देना चाहिए था।''
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वह और उनकी पार्टी राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के नाम पर निरुद्ध शिविरों की स्थापना कभी नहीं होने देंगी। उन्होंने कहा, '' इसीलिए आप मेरे खिलाफ प्रतिशोध की भावना से काम कर रहे है।''
उन्होंने यह याद दिलाने की कोशिश की कि राज्य के प्रशासन पर निर्वाचन आयोग का नियंत्रण चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक ही सीमित है।
मुर्शिदाबाद जिले के जियागंज में एक अन्य जनसभा को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि कोलकाता के उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में मतदाता सूची से 40,000 नाम हटा दिए गए हैं।
बनर्जी ने कहा, ''जिन लोगों को वोट देने का मौका मिलेगा, वे सभी तृणमूल के पक्ष में अपना वोट डालेंगे।''उन्होंने दावा किया कि भाजपा के समर्थक भी 'भगवा ब्रिगेड' को वोट नहीं देंगे, बल्कि बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी का समर्थन करेंगे।
मुख्यमंत्री ने एसआईआर प्रक्रिया में हिंदुओं के नाम भी काटे जाने का दावा करते हुए कहा, ''मैं एक हिंदू परिवार से हूं, मेरे परिवार के सदस्यों के नाम भी काट दिए गए हैं।''
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धर्म के नाम पर 'जहर फैला रही है', जबकि धर्म मानवता का प्रतीक है।
तृणमूल प्रमुख ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों में रह रहे बंगाल के प्रवासी श्रमिकों को बांग्लादेशी बताकर निर्वासित किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि भाजपा द्वारा किए गए कुकृत्यों ही 2026 में उसके पतन का कारण बनेंगे।''
भवानीपुर से भाजपा नेता सुभेंदु अधिकारी के नामांकन के लिए आयोजित रैली के दौरान हुई झड़पों पर निर्वाचन आयोग की कार्रवाई की ओर इशारा करते हुए बनर्जी ने दावा किया कि यह कोई राजनीतिक मामला नहीं था ,जब मुख्य विपक्षी पार्टी के समर्थक ''अपमानजनक इशारे'' कर रहे थे और जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया था।
उन्होंने आरोप लगाया, ''लेकिन भाजपा के इशारे पर एक उपायुक्त सहित चार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।''
बनर्जी ने पूरे जीवन संघर्ष करने का दावा करते हुए कहा, ''मैं बिना संघर्ष किए एक इंच भी जमीन नहीं छोडूंगी।'' उन्होंने कहा कि राज्य की सभी 294 सीट पर मुकाबला उनके और भाजपा के बीच है।
मुख्यमंत्री ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों को पहले निर्वाचन आयोग ने उनके पदों से हटा दिया। उन्होंने सवाल किया कि उन अधिकारियों को अब तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए क्यों भेजा जा रहा है।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं के रिश्तेदारों को पश्चिम बंगाल में तैनात किया गया है।
टिकट न मिलने को लेकर पार्टी के कुछ नेताओं में व्याप्त असंतोष को शांत करने की कोशिश करते हुए बनर्जी ने शमशेरगंज में कहा कि जनता के लिए काम करने वालों को ही उम्मीदवार बनाया जाएगा।
बनर्जी ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि फरक्का से तृणमूल के मौजूदा विधायक मनीरुल इस्लाम ने एक अन्य नेता अमीरुल इस्लाम को टिकट दिए जाने के बावजूद नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने कहा, ''मैं उनसे नामांकन पत्र वापस लेने का आग्रह करती हूं, लेकिन अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो मैं जिला अध्यक्ष खलीलुर रहमान से उन्हें पार्टी से निलंबित करने के लिए कहूंगी।''
उन्होंने कहा, ''पार्टी के फैसले का अनादर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।''
तृणमूल ने विधानसभा चुनाव के लिए 294 सीटों में से 74 सीटों पर अपने उम्मीदवार बदल दिए हैं, जिससे टिकट से वंचित कुछ मौजूदा विधायकों में असंतोष पैदा हो गया है।
मुख्यमंत्री ने यह कहा कि भाजपा ने मुस्लिम मतों को बांटने के लिए बंगाल में 'कुछ गद्दारों' के साथ साठगांठ कर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) को लाया है।
भाषा धीरज रंजन
रंजन
0504 1900 शमशेरगंज