असली अपराधी बच निकले, एनआईए स्थानीय लोगों को परेशान कर रही : ममता ने मालदा घटना पर कहा
माधव
- 04 Apr 2026, 05:38 PM
- Updated: 05:38 PM
मालदा (बंगाल), चार अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को दावा किया कि मालदा जिले के मोथाबाड़ी में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और हिंसा के असली आरोपी फरार हो गए जबकि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) निर्दोष स्थानीय लोगों को पकड़कर परेशान कर रहा है।
मालदा के मानिकचक में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 'विचाराधीन' मामलों की जांच कर रहे न्यायिक अधिकारियों के पास जाने के बजाय मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए नामों को दोबारा शामिल कराने के लिए न्यायाधिकरणों में आवेदन करें।
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने कहा कि इसके बजाय, मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए नामों को फिर से शामिल करने के लिए न्यायाधिकरणों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करें।
उन्होंने इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के संदर्भ में कहा, ''दो सांप्रदायिक दलों ने न्यायिक अधिकारियों का घेराव किया और भाग निकले। अब एनआईए स्थानीय युवाओं को परेशान कर रही है। जांच के नाम पर करीब 50 निर्दोष लोगों को उठा लिया गया है।''
जब बनर्जी ने सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि किन-किन के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, तो बड़ी संख्या में लोगों ने हाथ उठाए, जिसे देखकर उन्होंने आश्चर्य जताया।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने मंच पर मौजूद पार्टी के स्थानीय नेताओं से कहा, ''हमें राजनीतिक रैलियां और सभाएं करने की जरूरत नहीं है। मेरी प्राथमिकता इन लोगों की मदद करना है, ताकि वे न्यायाधिकरणों में आवेदन देकर अपने नाम फिर से जुड़वा सकें।''
बनर्जी ने मतदाता सूची में नाम हटाए जाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें ''मोटाभाई'' कहकर संबोधित किया और आरोप लगाया कि वह चुनाव से पहले तबादलों के नाम पर राज्य प्रशासन में अधिकारियों के बीच फूट डाल रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''मैं अमित शाह को चुनौती देती हूं कि वह मालदा आकर यहां के लोगों से मिलें, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। भाजपा को लोगों के पैरों में गिरकर उनसे माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि उसने उन्हें यह परेशानी दी है। मैं लोगों से अपील करती हूं कि वे ईवीएम के जरिए नाम काटे जाने का बदला लें।''
चुनाव समाप्त होने के बाद महिलाओं से ईवीएम और वीवीपीएटी मशीनों की सुरक्षा करने का आग्रह करते हुए बनर्जी ने अपनी पार्टी के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का निर्देश दिया और आरोप लगाया कि चुनाव से पहले ''राज्य में पैसे की तस्करी की जा रही थी।''
उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से कहा, ''किसी उकसावे में न आएं। भाजपा हिंसा भड़काना चाहती है और फिर केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर लोगों को पकड़ती है, जैसा मोथाबाड़ी में हुआ।''
मालदा जिले के मोथाबाड़ी इलाके में बुधवार को एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में नामों को काटने के खिलाफ आयोजित एक बड़े प्रदर्शन के हिंसक हो जाने पर सात न्यायिक अधिकारियों को स्थानीय बीडीओ कार्यालय में बंधक बना लिया गया था, जबकि एक अन्य अधिकारी को करीब नौ घंटे तक वाहन में बंद रखा गया। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया, वाहनों में तोड़फोड़ की और पुलिस पर हमला किया।
अब तक इस मामले में राज्य के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) द्वारा 35 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद निर्वाचन आयोग ने एनआईए को इस घटना की जांच सौंपी है।
इसी जिले के मुस्लिम बहुल गाजोले में एक अन्य जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने वक्फ संशोधन अधिनियम के कार्यान्वयन के खिलाफ स्थानीय प्रतिरोध से निपटने में तृणमूल कांग्रेस की भूमिका को लेकर बनी धारणाओं के बारे में बात की।
ममता बनर्जी ने कहा, ''कुछ लोग वक्फ अधिनियम के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं। हमें याद रखना चाहिए कि हमने इसके कार्यान्वयन के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, और अब यह मामला इमामों के हाथ में है। हमने भाजपा को इस मामले को अपने हाथ में नहीं लेने दिया।''
मुर्शिदाबाद जिले में अप्रैल 2025 में संसद में वक्फ (संशोधन) अधिनियम के पारित होने और उसके कार्यान्वयन के संबंध में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी।
बंगाल सरकार ने शुरुआती विरोध के बाद नवंबर 2025 में अधिनियम को लागू करने पर सहमति व्यक्त की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राज्य में 82,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों का डेटा पांच दिसंबर, 2025 तक केंद्र के उम्मीद 'पोर्टल' पर अपलोड करें।
भाषा धीरज माधव
माधव
0404 1738 मालदा