ग्रैंड वेनिस मॉल 'घोटाले' में सतिंदर सिंह भसीन को मिली जमानत रद्द
नरेश
- 02 Apr 2026, 08:50 PM
- Updated: 08:50 PM
नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में करोड़ों रुपये के कथित ग्रैंड वेनिस मॉल घोटाले से जुड़े मामले में कारोबारी सतिंदर सिंह भसीन को दी गई जमानत बृहस्पतिवार को रद्द कर दी।
न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एनके सिंह की पीठ ने भसीन को जेल अधिकारियों के समक्ष एक हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
पीठ ने फ्लैट आवंटियों के दावों का निपटारा करने में विफल रहने और जमानत की शर्त के तहत अपने निजी खाते से 50 करोड़ रुपये जमा करने के शीर्ष अदालत के निर्देश के बावजूद भसीन इंफोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (बीआईआईपीएल) के फंड से उक्त राशि निकालने के लिए भसीन की जमानत रद्द कर दी।
उसने कहा, "याचिकाकर्ता ने छह नवंबर 2019 के आदेश के तहत उस पर लागू की गई जमानत संबंधी शर्तों का पालन नहीं किया। लिहाजा, याचिकाकर्ता को दी गई जमानत रद्द की जाती है। याचिकाकर्ता को इस फैसले की तारीख से एक हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा।"
पीठ ने 'ग्रैंड वेनिस' परियोजना के आवंटियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह फैसला पारित किया, जिसमें जमानत की कुछ शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए भसीन को दी गई जमानत को रद्द करने का अनुरोध किया गया था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि भसीन दिवालियापन की कार्यवाही में पारित आदेशों का पूरी तरह से पालन करने की शर्त पर 12 महीने की अवधि के बाद नियमित जमानत के लिए नये सिरे से आवेदन कर सकते हैं।
भसीन की कंपनियों के खिलाफ दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 के तहत दिवालियापन की कार्यवाही शुरू की गई थी।
पीठ ने कहा, "यह निर्देश दिया जाता है कि इस न्यायालय की अनुमति के बिना निचली अदालत की ओर से याचिकाकर्ता का पासपोर्ट जारी नहीं किया जाएगा।"
न्यायालय ने भसीन की ओर से जमानत की शर्त के तहत जमा किए गए 50 करोड़ रुपये और उस पर अर्जित ब्याज राशि को भी जब्त करने का आदेश दिया।
पीठ ने कहा, "हम उपर्युक्त राशि में से पांच करोड़ रुपये और उस पर आनुपातिक रूप से अर्जित ब्याज राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) को उसके उद्देश्यों की प्राप्ति में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने का निर्देश देते हैं।"
उसने कहा, "बाकी राशि, आनुपातिक रूप से अर्जित ब्याज सहित आईबीसी संबंधी कार्यवाही के लिए आईआरपी (अंतरिम समाधान पेशेवर) को उपलब्ध कराई जाए। इस न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) यह सुनिश्चित करें कि संबंधित निचली अदालत उपरोक्त राशियों का तत्काल वितरण करे।"
न्यायालय ने 103 पन्नों के आदेश में कहा कि भसीन को जमानत के लिए व्यक्तिगत रूप से 50 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उन्होंने यह धनराशि अपनी कंपनी के फंड से निकाली।
आदेश में कहा गया है कि एक चिंताजनक पहलू यह है कि भसीन की जमानत राशि के लिए कथित ऋण जारी करने से पहले बीआईआईपीएल द्वारा कोई बोर्ड प्रस्ताव पारित नहीं किया गया।
इसमें कहा गया है, "इसलिए, याचिकाकर्ता द्वारा बीआईआईपीएल से लिए गए कथित ऋण के माध्यम से जमा की गई राशि को किसी भी दस्तावेजी अनुमोदन के अभाव में या कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 185 की वैधानिक आवश्यकताओं के अनुपालन के बिना मान्य नहीं ठहराया जा सकता है।"
शीर्ष अदालत ने परियोजना के अभी तक पूरी न होने के आवंटियों के आरोप के बारे में कहा, "आवंटियों की अंतिम संख्या, उन्हें आवंटित इकाइयों की संख्या, भुगतान की गई राशि और बकाया राशि के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है। ऐसी स्थिति में, त्रिपक्षीय पट्टा विलेखों पर हस्ताक्षर करना भी असंभव प्रतीत होता है।"
न्यायालय ने कहा कि परियोजना ऐसी स्थिति में नहीं है, जहां आवंटियों को कब्जा सौंपा जा सके और भसीन ने आवंटियों के दावों का निपटारा करने के लिए वास्तविक एवं सार्थक प्रयास नहीं किए।
शीर्ष अदालत ने भसीन इंफोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सतिंदर सिंह भसीन को ग्रैंड वेनिस मॉल 'घोटाला' मामले में छह नवंबर 2019 को विभिन्न शर्तों के अधीन जमानत दे दी थी।
इस कथित घोटाले के सिलसिले में परियोजना में इकाइयों के आवंटियों ने नयी दिल्ली और उत्तर प्रदेश में कई लोगों के खिलाफ करीब 46 प्राथमिकी दर्ज कराई थीं।
याचिकाकर्ताओं ने उन्हें इकाइयों का कब्जा न दिए जाने, उनके धन की हेरा-फेरी किए जाने और राज्य के अधिकारियों की मिलीभगत से भूमि आवंटन में अनियमितता बरते जाने का आरोप लगाया था।
भाषा पारुल नरेश
नरेश
0204 2050 दिल्ली