उच्च न्यायालय ने एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय, राधिका रॉय के खिलाफ जारी एलओसी को किया रद्द
माधव
- 20 Mar 2026, 09:25 PM
- Updated: 09:25 PM
नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा एनडीटीवी के संस्थापक प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ मामले दर्ज किए जाने के बाद उन्हें जारी किए गए 'लुक-आउट सर्कुलर' (एलओसी) को शुक्रवार को रद्द कर दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि विदेश यात्रा के उनके अधिकार पर अनिश्चितकालीन प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
यह उल्लेख करते हुए कि विदेश यात्रा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का अभिन्न अंग है, न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एलओसी को बनाये रखना उनके मौलिक अधिकार का हनन है, जो कानून में टिक नहीं सकता।
न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि दंपति के खिलाफ जांच पांच साल से अधिक समय से लंबित है, इस दौरान याचिकाकर्ताओं ने कभी भी कानूनी प्रक्रिया से बचने का प्रयास नहीं किया और अभी तक आरोपपत्र भी दाखिल नहीं किया गया है।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं को कई वर्षों से जांच के लिए तलब नहीं किया गया है और असहयोग करने का कोई आरोप नहीं है।
अदालत ने कहा, ''असहयोग, देश छोड़ कर भागने या जांच को किसी भी तरह से प्रभावित करने वाले किसी भी ठोस सबूत के अभाव में, याचिकाकर्ताओं के खिलाफ एलओसी को बनाये रखने को केवल 'आर्थिक हित' या 'व्यापक जनहित' जैसे निराधार आधारों पर उचित नहीं ठहराया जा सकता।''
उच्च न्यायालय ने आदेश दिया, ''एलओसी को रद्द किया जाता है।''
अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह शपथपत्र देने का निर्देश दिया कि वे आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होंगे और वर्तमान में जारी किसी भी कार्यवाही में पूर्ण सहयोग करेंगे।
अदालत ने दंपति से यह आश्वासन देने को भी कहा कि वे जांच एजेंसी द्वारा अनुरोध की गई सभी सामग्री या दस्तावेज़, जो उनके पास हों, उपलब्ध कराएंगे।
प्रणय और राधिका ने 2021 में याचिकाएं दायर कर, सीबीआई के निर्देश पर उनके खिलाफ 2017 और 2019 में दो प्राथमिकी दर्ज किये जाने के बाद शुरू की गई एलओसी को चुनौती दी थी।
वर्ष 2017 में सीबीआई ने 'क्वांटम सिक्योरिटीज लिमिटेड' के संजय दत्त नामक व्यक्ति की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आईसीआईसीआई बैंक द्वारा रॉय परिवार से जुड़ी 'आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड' को दिए गए ऋण के पुनर्भुगतान में अनियमितताएं हुई थीं, जिसके परिणामस्वरूप बैंक को कथित तौर पर 48 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
सीबीआई ने 2024 में इस मामले को बंद करने के अनुरोध संबंधी एक रिपोर्ट दाखिल की थी।
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) मानदंडों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर एनडीटीवी के संस्थापकों के खिलाफ 2019 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सीबीआई ने कहा था कि 2019 के मामले के तहत याचिकाकर्ताओं के खिलाफ जारी की गई एलओसी वैध थी।
अदालत ने 46 पृष्ठों के अपने फैसले में पाया कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से याचिकाकर्ताओं के जांच से बचने या फरार होने का कोई संकेत नहीं मिलता है, और वे कानूनी कार्यवाही में लगातार शामिल होते रहे हैं।
इसमें यह भी उल्लेख किया गया कि याचिका लंबित रहने के दौरान याचिकाकर्ताओं को कई बार विदेश यात्रा करने की अनुमति दी गई और वे हर बार स्वदेश लौटे हैं।
भाषा सुभाष माधव
माधव
2003 2125 दिल्ली