तीर्थयात्रियों की रिकॉर्ड संख्या बेहतर सुविधाओं और बढ़ते विश्वास की प्रतीक : आदित्यनाथ
अमित
- 17 Mar 2026, 09:50 PM
- Updated: 09:50 PM
लखनऊ, 17 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि राज्य में धार्मिक स्थलों पर आने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या में हो रही वृद्धि बेहतर मूलभूत ढांचे और जनता के गहरे होते विश्वास को जाहिर करने के साथ-साथ सरकार के लिए चुनौतियां और अवसर भी पेश करती है।
मुख्यमंत्री ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के 555 तीर्थयात्रियों में से प्रत्येक को एक-एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता वितरित करने के बाद अपने सम्बोधन में कहा कि पहले संसाधनों की कमी के कारण केवल सीमित संख्या में ही श्रद्धालु ऐसी यात्राएं कर पाते थे लेकिन अब हालात काफी बदल गये हैं।
उन्होंने कहा, "एक समय था जब संसाधन सीमित थे और केवल सीमित संख्या में ही श्रद्धालु यात्रा कर पाते थे। आज उत्तर प्रदेश में सुविधाएं बेहतर हुई हैं और आप देख सकते हैं कि कितनी बड़ी संख्या में लोग यहां आ रहे हैं।"
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2025 में राज्य भर के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर लगभग 164 करोड़ तीर्थयात्री आए जिनमें से अकेले प्रयागराज महाकुंभ में ही 66 करोड़ श्रद्धालु शामिल थे।
उन्होंने बताया कि वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में राम जन्मभूमि और मथुरा-वृंदावन जैसे स्थानों पर करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
आदित्यनाथ ने कहा, "इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन एक अवसर भी है और एक चुनौती भी। सरकार बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रही है। चाहे वह कनेक्टिविटी हो, मूलभूत सुविधाएं हों, या तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए की गई अन्य व्यवस्थाएं हों।"
मुख्यमंत्री ने साल 2017-18 में गाजियाबाद में 'कैलाश मानसरोवर भवन' के निर्माण का भी जिक्र किया और कहा कि यह उन तीर्थयात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा केंद्र के रूप में कार्य करता है जो यात्रा से संबंधित अपनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए यहां आते हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान चिकित्सा और अन्य सुविधाओं को लेकर जताई गई चिंताओं के बारे में आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए केंद्र के साथ समन्वय करेगी।
उन्होंने कहा, "आप अपने सुझाव दे सकते हैं। हम आने वाले समय में गाजियाबाद में ही बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय कर प्रयास करेंगे।"
कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटे तीर्थयात्रियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिनाइयों, चुनौतियों और प्रतिकूल प्राकृतिक परिस्थितियों के बीच इस यात्रा को पूरा करना एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में तीर्थयात्राएँ केवल धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं हैं, बल्कि लंबे समय से ये समाज को एकजुट करने और राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोने का एक सशक्त माध्यम रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में लोग अपनी मेहनत से अर्जित संसाधनों का उपयोग यात्रा और सेवा के लिए करते थे जिससे न केवल उन्हें आध्यात्मिक पुण्य प्राप्त होता था, बल्कि समाज को समझने का एक व्यापक दृष्टिकोण भी मिलता था। उन्होंने कहा कि पूरे भारत में धार्मिक केंद्रों की स्थापना के पीछे भी यही भावना निहित है।
मुख्यमंत्री ने इस बात का भी उल्लेख किया कि चूंकि कैलाश मानसरोवर यात्रा भारत की सीमाओं से बाहर संपन्न होती है इसलिए इसमें भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियां बनी रहती हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में केंद्र और राज्य सरकारें देश की सीमा के भीतर तो बेहतर सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित कर सकती हैं मगर उससे आगे की यात्रा के लिए अन्य राष्ट्रों के सहयोग की आवश्यकता होती है।
भाषा सलीम अमित
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