अनधिकृत विदेशी क्रिप्टो मंचों पर निगरानी के लिए भारत बना रहा 'वर्चुअल एसेट लैब': एफएटीएफ रिपोर्ट
अजय
- 11 Mar 2026, 07:42 PM
- Updated: 07:42 PM
नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) भारत गैर-पंजीकृत और जोखिम से भरे विदेशी क्रिप्टो मंचों की पहचान के लिए एक स्वदेशी 'वर्चुअल एसेट लैब' बनाने पर काम कर रहा है। वैश्विक निगरानी संस्था एफएटीएफ की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार की 'वित्तीय आसूचना इकाई- इंडिया' (एफआईयू-इंडिया) ने गृह मंत्रालय के साथ मिलकर सोशल मीडिया मंच, वेब होस्ट और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को अनधिकृत विदेशी क्रिप्टो मंचों से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं। अभी तक इस तरह के 85 यूआरएल हटाए जा चुके हैं।
इन अनधिकृत विदेशी मंचों का इस्तेमाल धनशोधन जैसे अवैध कामों के लिए होने की आशंका रहती है।
एफएटीएफ ने कहा, ''भारत बिना पंजीकरण वाले विदेशी वर्चुअल एसेट सेवा प्रदाताओं (ओवीएएसपी) की पहचान करने के लिए स्वदेशी तकनीकी क्षमता बढ़ा रहा है। इसी उद्देश्य से 'वर्चुअल एसेट लैब' स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है।''
यह लैब डेटा विश्लेषण और इंटरनेट निगरानी के जरिये ऐसे अनधिकृत क्रिप्टो मंचों का पता लगाने में मदद करेगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने 2022 में क्रिप्टो परिसंपत्तियों से आय पर कर लगाया था और इसके लेनदेन पर एक प्रतिशत 'स्रोत पर कर कटौती' (टीडीएस) को भी लागू किया गया था। इसके बाद क्रिप्टो संपत्ति कारोबार का एक बड़ा हिस्सा भारत के पंजीकृत मंचों से हटकर विदेशी अनधिकृत मंचों पर जा चुका है।
एफआईयू-इंडिया ने कहा, ''कई विदेशी मंच भारतीय ग्राहकों को पर्याप्त पहचान जांच (केवाईसी) के बगैर ही जोड़ लेते हैं। ये मंच जमा के लिए यूपीआई या कार्ड नेटवर्क जैसे घरेलू भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल करते हैं जबकि निकासी को भारतीय बैंक खातों या वॉलेट में अंजाम दिया जाता है।''
रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसे कारोबारी मॉडल दिखाते हैं कि कई विदेशी क्रिप्टो मंच भारत के नियमों और धनशोधन-रोधी प्रावधानों से बचते हुए भी भारतीय ग्राहकों को सेवाएं दे रहे हैं।
इससे निपटने के लिए राजस्व विभाग ने जुलाई, 2023 में क्रिप्टो परिसंपत्ति से जुड़े जोखिमों पर समन्वय के लिए एक बहु-एजेंसी मंच भी बनाया है, जिसमें कानून प्रवर्तन एजेंसियां, खुफिया एजेंसियां और नियामक शामिल हैं।
इसके अलावा एफआईयू-इंडिया ने स्थानीय क्रिप्टो सेवा प्रदाताओं, बैंकों और भुगतान कंपनियों के साथ एक कार्यसमूह भी बनाया है, जो संदिग्ध लेनदेन की पहचान के लिए 'रेड फ्लैग संकेतक' तैयार करेगा।
फिलहाल भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट सेवा प्रदाताओं के लिए धनशोधन पर निगरानी रखने का दायित्व एफआईयू-इंडिया को सौंपा गया है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
अजय
1103 1942 दिल्ली