बंगाल एसआईआर: नाम हटाने के खिलाफ अपील की सुनवाई के लिए न्यायाधिकरण बनाने का आदेश
नरेश
- 10 Mar 2026, 07:50 PM
- Updated: 07:50 PM
नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन परीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटा दिये गये लोगों की अपीलें सुनने के लिए एक स्वतंत्र अपीलीय न्यायाधिकरण स्थापित करने का मंगलवार को आदेश दिया, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालयों के पूर्व न्यायाधीश करेंगे।
न्यायालय ने उन प्रयासों के खिलाफ भी सख्त चेतावनी दी, जो एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से बाहर कर दिये गये व्यक्तियों के दावे और आपत्तियों को निपटाने के लिए तैनात न्यायिक अधिकारियों की निष्पक्षता को कमजोर करने के लिए किए जा रहे हैं।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने ऐसे प्रयासों को न्यायपालिका के अपमान के रूप में वर्णित करते हुए कहा, ''आपने ऐसे आवेदन दायर करने की हिम्मत कैसे की? इससे लगता है कि आपको भरोसा नहीं है... किसी को भी न्यायिक अधिकारियों को चुनौती देने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए। भारत के प्रधान न्यायाधीश के तौर पर मैं इसे सहन नहीं करूंगा।''
पीठ में न्यायमूर्ति आर. महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची भी शामिल हैं।
पीठ इस बात से नाराज नजर आई, क्योंकि एक नयी याचिका में यह कहा गया था कि जिन लोगों को मतदाता सूची से हटाया जा रहा है, उनके दावे और आपत्तियों को निपटाने की अनुमति न्यायिक अधिकारियों को न दी जाए।
इससे पहले, सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल के जिला न्यायाधीशों और दीवानी न्यायाधीशों को तैनात करने की अनुमति दी थी।
पीठ ने मंगलवार को कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की नई रिपोर्ट का अध्ययन किया और कई नये दिशानिर्देश जारी किए।
न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार और निर्वाचन आयोग को राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में न्यायिक अधिकारियों को सभी प्रकार की सहायता प्रदान करने का निर्देश भी दिया।
पीठ ने इस बात का संज्ञान लिया कि एसआईआर प्रक्रिया में तैनात न्यायिक अधिकारियों ने अब तक मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के 10.16 लाख आपत्तियों और दावों पर सुनवाई की है।
पीठ ने निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी के बिना कोई भी ऐसा अनिवार्य कदम न उठाया जाए, जिससे एसआईआर प्रक्रिया बाधित हो।
पीठ ने कहा कि आयोग के पोर्टल में तकनीकी व्यवधानों की जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसी कोई बाधा न उत्पन्न हो।
पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों के लिए नये 'लॉगिन आईडी' शीघ्र बनाए जाएं, ताकि मतदाता सूचियों में संशोधन की प्रक्रिया सुचारू रूप से सुनिश्चित हो सके।
इसने यह भी कहा कि न्यायिक अधिकारियों के निर्णयों की समीक्षा निर्वाचन आयोग के किसी भी प्रशासनिक अधिकारी द्वारा नहीं की जा सकती।
शीर्ष अदालत ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अपीलों पर सुनवाई के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और उच्च न्यायालय के दो या तीन न्यायाधीशों से अपीलीय न्यायाधिकरणों में अपनी सेवा देने के लिए आग्रह कर सकते हैं। ये पूर्व न्यायाधीश कलकत्ता उच्च न्यायालय या निकटवर्ती राज्यों के उच्च न्यायालयों के हो सकते हैं।
एक बार अनुशंसा हो जाने के बाद, निर्वाचन आयोग को उन्हें ऐसी अपीलें सुनने के लिए अपीलीय न्यायाधिकरण के रूप में अधिसूचित करना होगा।
प्रत्येक पीठ में सदस्यों की संख्या को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के विवेक पर छोड़ दिया गया है।
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू ने पीठ को आश्वस्त किया कि समस्याओं का निपटारा अविलंब किया जाएगा।
पीठ ने उन दो नई याचिकाओं को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें अंतिम मतदाता सूची से अवैध रूप से नाम हटाए जाने का दावा किया गया था।
दोनों याचिकाओं को वापस लिया हुआ मानकर खारिज कर दिया गया और याचिकाकर्ताओं को नई स्थापित अपीलीय व्यवस्था का लाभ उठाने की अनुमति दी गई
भाषा सुरेश नरेश
नरेश
1003 1950 दिल्ली