सुर्खियों में रहने के लिए बिरला के खिलाफ संकल्प लाया विपक्ष: तेदेपा सांसद
सुभाष
- 10 Mar 2026, 05:13 PM
- Updated: 05:13 PM
नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के सांसद लावू श्रीकृष्णदेव रायलू ने मंगलवार को विपक्ष पर केवल सुर्खियों में रहने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ संकल्प लाने का आरोप लगाया।
लोकसभा में बिरला के खिलाफ विपक्ष के संकल्प पर चर्चा में भाग लेते हुए तेदेपा सांसद ने यह भी कहा कि कांग्रेस समेत विपक्षी दल 'अराजकता' में विश्वास रखते हैं और 'पाखंड' करते हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह संकल्प पूरी तरह संशयपूर्ण है क्योंकि विपक्ष को भी पता है कि उनके पास इसे पारित कराने के लिए बहुमत नहीं है और वे इसे इसलिए लाए क्योंकि वे केवल ''सुर्खियों में रहना चाहते थे''
तेदेपा सांसद ने कहा कि ओम बिरला पिछले करीब सात साल से लोकसभा के अध्यक्ष हैं और उनकी अध्यक्षता में सदन ने महिला आरक्षण समेत कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए हैं।
उन्होंने कहा कि कोविड काल के दौरान सदन के संचालन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनकी अध्यक्षता में पिछली 17वीं लोकसभा में 97 प्रतिशत कार्य उत्पादकता रही।
तेदेपा सदस्य ने कहा, ''ऐसे अध्यक्ष के खिलाफ यह प्रस्ताव लाया गया है?''
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 16वीं लोकसभा की एक बैठक में अपने स्थान से उठकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करीब गए थे और उन्हें गले लगाया था। तेदेपा सांसद ने कहा कि तब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के लिए कहा था कि ''आपके अंदर मेरे लिए नफरत है, मेरे मन में आपके लिए इतनी सी भी नफरत नहीं है।''
देवरायलू ने कहा कि अगर राहुल गांधी इतने आदर्शवादी हैं तो उन्होंने कुछ दिन पहले संसद में प्रवेश करते समय केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के लिए 'गद्दार' शब्द का प्रयोग क्यों किया था।
तेदेपा सांसद ने कहा कि कुछ दिन पहले विपक्ष की महिला सांसदों को सदन में प्रधानमंत्री की सीट के पास जाकर रास्ता रोकने के लिए उकसाया गया। उन्होंने कहा कि यह दोनों घटना संसद के अंदर और बाहर ''अराजकता'' का उदाहरण हैं।
उन्होंने कहा, ''आपमें यह गुस्सा और हताशा कहां से आती है। क्योंकि आप चुनाव हार गए।''
तेदेपा सदस्य ने तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्षी सांसद में अपने वक्तव्य में कहा कि अध्यक्ष ओम बिरला ने पिछले सात साल में जितने भी सदस्यों को निलंबित किया, सभी विपक्ष के थे जबकि फरवरी 2014 में संप्रग सरकार के समय तत्कालीन अध्यक्ष मीरा कुमार ने कांग्रेस के सदस्यों को भी निलंबित किया था। उन्होंने कहा कि यह 'पाखंड' को दर्शाता है।
देवरायलू ने कहा कि तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने आंध्र प्रदेश के कांग्रेस सांसदों को इसलिए निलंबित किया था ताकि आंध्र प्रदेश विधानसभा में पहले ही खारिज हो चुके आंध्र प्रदेश पुनर्गठन विधेयक को ''असंवैधानिक तरीके'' से पारित कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि संसद के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब कार्यवाही का सीधा प्रसारण बंद कर दिया गया। तेदेपा सांसद ने कहा, ''और आज, विपक्ष के लोग हमें नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं।''
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वैभव सुभाष
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