दिल्ली का वायु प्रदूषण नागरिकों के खिलाफ 'लगातार जारी अपराध' है: स्वाति मालीवाल
अविनाश
- 09 Mar 2026, 09:52 PM
- Updated: 09:52 PM
नयी दिल्ली, नौ मार्च (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल ने दिल्ली के वायु प्रदूषण संकट को यहां के निवासियों के खिलाफ 'अपराध' करार दिया और सोमवार को सरकार से इसे रोकने के लिए युद्धस्तर पर कार्रवाई की मांग की।
उच्च सदन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने प्रदूषण पर नियंत्रण होने तक वायु एवं जल शोधकों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से पूर्ण छूट प्रदान करने की मांग की।
मालीवाल ने मांग की कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) को नौकरशाही के चंगुल से मुक्त किया जाए और उसे पूर्णतः स्वायत्त बनाया जाए।
उन्होंने कहा, ''इसका (सीएक्यूएम) नेतृत्व विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिए। इसे वास्तविक संसाधन और अधिकार दिए जाएं। दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये का एक अलग विशेष फंड दिया जाए, जिसका वायु प्रदूषण को समाप्त करने का स्पष्ट लक्ष्य हो।''
मालीवाल ने कहा कि यह गंभीर चिंता का विषय है कि देश की राजधानी दिल्ली दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी बन गई है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली की हवा इतनी जहरीली हो गई है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ निवासियों को सलाह दे रहे हैं कि यदि संभव हो तो वे शहर छोड़ दें।
मालीवाल ने कहा कि 2023 में दिल्ली में हुई कुल मौतों में से 15 प्रतिशत सीधे तौर पर वायु प्रदूषण से जुड़ी थीं, और 22 लाख बच्चों के फेफड़े स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं।
आप सांसद ने कहा कि 2025 में दिल्ली में एक भी दिन ऐसा नहीं रहा जब हवा की गुणवत्ता अच्छी रही हो।
दिल्ली से राज्यसभा सदस्य मालीवाल ने कहा, ''दिल्ली में सांस लेना प्रतिदिन 50 सिगरेट पीने के बराबर है।''
उन्होंने कहा कि यह प्रदूषण केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल नहीं है, बल्कि 'यह दिल्ली के लोगों के खिलाफ निरंतर जारी अपराध है।'
उन्होंने संकट का समाधान नहीं करने के लिए पिछली सरकार को दोषी ठहराया।
मालीवाल ने कहा, ''दिल्ली सरकार ने 2015 से 2023 के बीच हरित उपकर के तहत 1,500 करोड़ रुपये एकत्र किए, लेकिन इसका आधे से भी कम हिस्सा खर्च किया, वह भी अदालतों की फटकार के बाद।''
उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली पूर्व सरकार ने प्रदूषण से लड़ने के नाम पर अपने नेताओं की तस्वीरें होर्डिंग पर लगाई थीं।
मालीवाल ने कहा कि किसानों को पराली जलाने के लिए मजबूर होना पड़ता है क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने किसानों के लिए प्रति एकड़ 5,000 रुपये मुआवजे की मांग की ताकि उनके पास व्यवहार्य विकल्प हों और पराली जलाने तथा एक-दूसरे पर दोषारोपण करने का सिलसिला खत्म हो सके।
उन्होंने कहा कि दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में चल रहे 35 ताप विद्युत संयंत्रों में से केवल 13 ने उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली स्थापित की है। सांसद ने इन संयंत्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में सर्दियों में पीएम2.5 का औसत स्तर 200 रहता है, जो डब्ल्यूएचओ की सुरक्षित सीमा से 40 गुना अधिक है।
भाषा संतोष रंजन अविनाश
अविनाश
0903 2152 संसद