उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त, पश्चिम एशिया संघर्ष लंबा खिंचा तो हो सकती है समस्या: अधिकारी
पाण्डेय
- 08 Mar 2026, 02:31 PM
- Updated: 02:31 PM
(ब्रजेन्द्र नाथ सिंह)
कोच्चि (केरल), आठ मार्च (भाषा) भारत में इस समय उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष लंबा खिंचा तो समस्या पैदा हो सकती हैं। दक्षिण भारतीय राज्यों को उर्वरकों की आपूर्ति करने वाली सबसे बड़ी कंपनी फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर लिमिटेड (एफएसीटी) के एक शीर्ष अधिकारी ने यह बात कही।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एफएसीटी रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड जैसे कच्चे माल के लिए पश्चिम एशिया के कई देशों पर निर्भर है, जिन्हें समुद्री मार्ग से लाया जाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा सकता है।
कोच्चि स्थित एफएसीटी के प्रबंध निदेशक एस शक्तिमणि ने पीटीआई-भाषा से कहा, ''हमारे पास पर्याप्त यूरिया उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि युद्ध की स्थिति शायद एक महीने के भीतर सुलझ जाएगी। हमारे पास खरीफ सत्र के लिए पर्याप्त यूरिया है और हमें कोई समस्या नहीं होगी।''
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि अगर मौजूदा स्थिति अगले छह महीनों तक जारी रहती है, तो समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। यह अगले रबी फसल सत्र में दिक्कतें पैदा कर सकता है और इससे निपटने के लिए उचित कदम उठाए जा रहे हैं।
शक्तिमणि ने कहा कि एफएसीटी जैसी कंपनियां न केवल पश्चिम एशिया से बल्कि ऑस्ट्रेलिया से भी गैस प्राप्त करती हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल उस क्षेत्र में गैस पाइपलाइन के साथ कोई समस्या नहीं है। कुछ स्थानों पर अस्थिरता है, लेकिन वह उर्वरक क्षेत्र के लिए समस्या नहीं है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न कंपनियों से डाइ-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और डबल सुपर फॉस्फेट (डीएसपी) का भंडार हासिल कर लिया है, जिससे कोई परेशानी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि किसानों की हर उर्वरक आवश्यकता को पूरा करना हमारा कर्तव्य है और हम इसे पूरा करेंगे।
इजराइल के साथ ही पश्चिम एशिया में अमेरिका के विभिन्न ठिकानों पर भी ईरान ड्रोन और मिसाइल दाग रहा है, जबकि इजराइल और अमेरिका की ओर से भी ईरान पर बम और मिसाइलों की बरसात की जा रहा है।
ईरान द्वारा लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले किए जाने से अमेरिका और उसके सहयोगियों- खासकर इजराइल और खाड़ी देशों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हमले लंबे समय तक जारी रहे तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
शक्तिमणि ने कहा, "हमारे पास पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध है। हमें उम्मीद है कि एक महीने के भीतर शायद चीजें (युद्ध की स्थिति) सुलझ जाएंगी। हम उम्मीद करते हैं कि जब तक हम खरीफ के मौसम में जाएंगे, तब हमें कोई समस्या नहीं होगी।"
भारत में मौसम के हिसाब से वर्षभर में मुख्य रूप से रबी और खरीफ की फसलें होती हैं। खरीफ फसलें जून-जुलाई से लेकर सितंबर-अक्टूबर तक और रबी फसलें अक्टूबर-नवंबर से अप्रैल-मई तक होती है। फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए देशभर में बड़ी मात्रा में यूरिया का इस्तेमाल किया जाता है।
भाषा पाण्डेय
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0803 1431 कोच्चि