चंद्रशेखर आजाद की जन्मस्थली पर भव्य पार्क बनाएगी मध्यप्रदेश सरकार
संतोष
- 27 Feb 2026, 09:48 PM
- Updated: 09:48 PM
आलीराजपुर/इंदौर, 27 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को घोषणा की कि स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार उनकी जन्मस्थली भाभरा (चंद्रशेखर आजाद नगर) में भव्य पार्क का निर्माण कराएगी।
आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था और उन्होंने 27 फरवरी 1931 को देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
मुख्यमंत्री यादव ने आजाद की 95वीं पुण्यतिथि पर भाभरा में आयोजित 'आजाद स्मृति समारोह' में कहा,''चंद्रशेखर आजाद 14 वर्ष की छोटी उम्र में देश की आजादी की जंग में कूद पड़े थे। चंद्रशेखर आजाद नगर में उनके नाम से भव्य पार्क का निर्माण किया जाएगा। आजाद की विरासत से जुड़े स्थानों पर संस्कृति विभाग के सहयोग से दर्शनीय स्थल भी विकसित किए जाएंगे।''
उन्होंने कहा कि आजाद ने आलीराजपुर के भील समुदाय के बालकों के बीच अपना बचपन गुजारा था और उनसे निशानेबाजी की कला सीखी थी। मुख्यमंत्री ने कहा,''आजाद की रिवॉल्वर का निशाना अचूक था।''
यादव ने देश की आजादी की लड़ाई में सूबे के जनजातीय नायकों के योगदान को याद किया और कहा,''राज्य सरकार जनजातीय महापुरुषों की विरासत के संरक्षण के लिए संकल्पित है। खरगोन में टंट्या भील के नाम पर विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। इसी प्रकार, स्वतंत्रता संग्राम के अन्य जनजातीय नायकों से जुड़े स्थलों को भी संरक्षित किया जा रहा है।''
मुख्यमंत्री ने आदिवासी बहुल आलीराजपुर जिले में 171 करोड़ रुपये की लागत वाले 49 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया।
उन्होंने कहा कि जिले में 1,800 करोड़ रुपये की लागत वाली नर्मदा सिंचाई परियोजना का कार्य प्रगति पर है और इसके पूरे होने पर 170 गांवों को पानी मिलेगा।
इस बीच, यादव ने उदयगढ़ में आदिवासियों के प्रसिद्ध 'भगोरिया' पर्व में भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा,"भगोरिया में शामिल होकर मेरा मन आनंद और उमंग से भर गया है। हमारी सरकार ने भगोरिया को राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाने का फैसला किया है।"
'भगोरिया' पर्व, होली के त्योहार से ऐन पहले पश्चिमी मध्यप्रदेश के आदिवासियों के फागुनी उल्लास की रंगारंग झांकी पेश करने वाले साप्ताहिक हाटों में मनाया जाता है।
ये हाट आलीराजपुर, झाबुआ, धार, खरगोन और बड़वानी जैसे आदिवासी बहुल जिलों के 100 से ज्यादा स्थानों पर लगते हैं। आदिवासियों की संस्कृति की चटख छटाएं निहारने के लिए इन हाटों में देश-विदेश के सैलानी उमड़ते हैं।
भाषा हर्ष संतोष
संतोष
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