स्कूल फीस विनियमन समिति के गठन पर रोक लगाने की याचिका पर शनिवार को फैसला सुनाएगी अदालत
माधव
- 27 Feb 2026, 08:22 PM
- Updated: 08:22 PM
नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि वह अप्रैल से शुरू होने वाले आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए निजी स्कूल को स्कूल-स्तरीय फीस विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) गठित करने संबंधी दिल्ली सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने के मुद्दे पर एक आदेश 28 फरवरी को पारित करेगा।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कई स्कूल संघों की ओर से दायर उन याचिकाओं पर उनके वकीलों की दलीलें सुनीं, जिसमें दिल्ली सरकार द्वारा एक फरवरी को जारी अधिसूचना पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया है। उक्त अधिसूचना में विद्यालयों को 10 दिनों के भीतर एसएलएफआरसी का गठन करने के लिए कहा गया है। साथ ही, अदालत ने सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू की दलीलें भी सुनीं।
पीठ ने कहा, "अंतरिम राहत प्रदान करने के अनुरोध पर पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ताओं को सुना। आदेश सुरक्षित रखा जाता है। कल सुनाया जाएगा।"
रोक लगाने से जुड़़ी याचिकाएं एक फरवरी की अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिकाओं का हिस्सा हैं। याचिकाकर्ताओं में दिल्ली पब्लिक स्कूल सोसाइटी और एक्शन कमेटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स शामिल हैं।
विद्यालयों के अनुसार, यह अधिसूचना कानूनी रूप से टिकती नहीं है क्योंकि इसने दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम में एसएलएफआरसी के गठन के लिए निर्धारित समयसीमा को बदल दिया है।
शुक्रवार को सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजू ने दलील दी कि अधिनियम में दी गई "तिथियां" ना तो "अपरिवर्तनीय" हैं और न ही इसकी "बुनियादी संरचना" का हिस्सा हैं, इसलिए इन समय-सीमाओं में मामूली फेरबदल मान्य होगा।
उन्होंने कहा कि अधिनियम का उद्देश्य विद्यालयों के व्यवसायीकरण और मुनाफाखोरी को रोकना है और अधिसूचना इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए लायी गई है तथा विद्यालयों को कोई अपूरणीय क्षति नहीं होगी।
राजू ने कहा, "इसके विपरीत, यदि कुछ विद्यालयों द्वारा अत्यधिक अनियमित फीस ली जाती है, तो छात्रों पर गंभीर वित्तीय बोझ और उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। कई छात्र ऐसे हो सकते हैं जो फीस वहन करने में असमर्थ होने के कारण पढ़ाई करने में असमर्थ हों। सुविधा का संतुलन ऐसे छात्रों के पक्ष में है।"
उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली सरकार ने एक फरवरी का आदेश जारी नहीं किया होता, तो स्कूल नए शैक्षणिक सत्र के लिए एक अप्रैल से फीस नहीं वसूल पाते क्योंकि यह नयी फीस विनियमन कानून के अनुसार नहीं होती।
एक फरवरी को, दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम के क्रियान्वयन को "सुचारू" बनाने के लिए एक राजपत्र अधिसूचना जारी की थी। दिल्ली सरकार ने यह अधिसूचना उच्चतम न्यायालय द्वारा उसके नये फीस निर्धारण कानून को लेकर सवाल उठाने के बाद जारी की थी।
अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक स्कूल को आदेश के प्रकाशन के 10 दिनों के भीतर एक विद्यालय-स्तरीय फीस विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) गठित करने का निर्देश दिया गया था।
भाषा अमित माधव
माधव
2702 2022 दिल्ली