राजकोट : ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बेघर हुए लोगों ने पुनर्वास की मांग की
पवनेश
- 24 Feb 2026, 08:14 PM
- Updated: 08:14 PM
राजकोट(गुजरात), 24 फरवरी (भाषा) राजकोट नगर निगम द्वारा शहर के जंगलेश्वर इलाके में बड़े पैमाने पर चलाए गए अतिक्रमण रोधी अभियान के बाद अब प्रभावित परिवारों को इस बात की चिंता सता रही है कि वे कहां शरण लें।
वहीं, प्रशासन ने दावा किया कि यह कार्रवाई न केवल अतिक्रमण हटाने के लिए बल्कि अपराध पर अंकुश लगाने के लिए भी आवश्यक थी।
राजकोट नगर निगम ने सोमवार को 2.5 किलोमीटर के क्षेत्र में बनी 1,400 से अधिक अवैध बस्तियों को हटाने के लिए अभियान शुरू किया और मंगलवार दोपहर तक लगभग 1,350 संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया।
अभियान के दौरान अपने आशियाने को मलबे में बदलता देख कई लोग बिलख उठे।
शरीफाबेन (60) ने बताया कि हमारे ऊपर अनिश्चितता और दूसरों पर निर्भरता के बादल मंडरा रहे हैं । उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी कूल्हे की सर्जरी हुई थी और अब वह अपने दो बेटों के साथ पड़ोसी के घर में रह रही हैं।
शरीफाबेन ने बताया कि उनका एक बेटा दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करता है, जबकि दूसरा हाथ की सर्जरी से उबर रहा है और फिलहाल काम करने में असमर्थ है।
उन्होंने कहा, ''हम अधिकारियों से अनुरोध करते हैं कि हमें रहने के लिए एक क्वॉर्टर आवंटित करें... मेरे बेटों में से केवल एक ही काम करता है। हम अपने पड़ोसी के घर पर लंबे समय तक नहीं रह सकते। वे हमें आश्रय और भोजन दे रहे हैं, लेकिन हम उन पर बोझ नहीं बनना चाहते।''
प्रकाशभाई रामजीभाई (50) संवाददाताओं से बात करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा, ''मैं जन्म से यहीं रहता आया हूं। अब मेरे परिवार के पास रहने के लिए एक कमरा भी नहीं है।''
प्रकाशभाई सेहत खराब होने के बावजूद अपने परिवार और माता-पिता का भरण-पोषण करने के लिए मजदूरी करते हैं। उन्होंने बताया कि दवाओं पर उनका हर महीने लगभग 5,000 रुपये खर्च होते हैं।
उन्होंने कहा, ''अब मेरे पास रहने के लिए कोई जगह भी नहीं है। कोई भी हमें कमरा किराए पर देने को तैयार नहीं है। अधिकारी आश्रय या भोजन में मदद नहीं कर रहे हैं।''
निवासियों का दावा है कि ध्वस्तीकरण अभियान से पहले पर्याप्त पुनर्वास उपाय नहीं किए गए।
इस कार्रवाई का बचाव करते हुए पुलिस उपायुक्त (अपराध) जगदीश बंगरवा ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना भी था।
उन्होंने कहा, ''जंगलेश्वर क्षेत्र में न केवल असहाय लोग ही नहीं, कई अपराधी भी रहते थे। ध्वस्तीकरण के बाद अपराध पर अंकुश लगेगा।''
बंगरवा के मुताबिक पिछले आठ वर्षों में इस इलाके में हथियार रखने से संबंधित 61 मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 52 लाख रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए और गुजरात असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम के तहत 58 मामले दर्ज किए गए।
भाषा धीरज पवनेश
पवनेश
2402 2014 राजकोट