बंगाल: तृणमूल और भाजपा ने एसआईआर पर उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत किया
माधव
- 24 Feb 2026, 08:04 PM
- Updated: 08:04 PM
कोलकाता, 24 फरवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों दलों ने मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित दावों और आपत्तियों पर विचार करने के लिए पड़ोसी राज्यों झारखंड व ओडिशा से न्यायिक अधिकारियों को तैनात करने की अनुमति देने के उच्चतम न्यायालय के आदेश का स्वागत किया।
तृणमूल ने इस स्थिति के लिए निर्वाचन आयोग के 'अहंकारी रवैये' को जिम्मेदार ठहराया जबकि भाजपा ने सत्तारूढ़ दल पर शुरू से ही प्रक्रिया में देरी करक एसआईआर को जानबूझकर बाधित करने की साजिश रचने का आरोप लगाया।
तृणणूल ने न्यायालय के आदेश को 'बंगाल की मां-माटी-मानुष' की एक शानदार जीत बताते हुए 'फेसबुक' पर अपने पेज पर एक पोस्ट में कहा, "बंगाल की एसआईआर प्रक्रिया पर निर्वाचन आयोग की अहंकारी पकड़ निर्णायक रूप से टूट गई है।"
तृणमूल ने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोगों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए 'भरपूर प्रयास व संघर्ष किया' लेकिन 'अब न्यायालय ने बागडोर अपने हाथ में ले ली है और आयोग के असीमित विवेकाधिकार को छीन लिया है'।
तृणमूल ने कहा, "उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को कम से कम तीन वर्ष के अनुभव वाले दीवानी न्यायाधीशों के रैंक के अतिरिक्त अधिकारियों को नियुक्त करने का अधिकार दिया है। अगर यह भी पर्याप्त नहीं है तो मुख्य न्यायाधीश झारखंड व ओडिशा के उच्च न्यायालयों से समकक्ष रैंक के सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को बुला सकते हैं।"
सत्तारूढ़ दल ने कहा, "आयोग इतना बदनाम, इतना अक्षम और इतना अविश्वासनीय है कि न्यायालय को अपना संवैधानिक कार्य पूरा करने के लिए अन्य राज्यों से न्यायाधीशों को बुलाना पड़ रहा है।"
भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों को सीधे तौर पर दोषी ठहराते हुए कहा कि शीर्ष अदालत का यह आदेश कि दो अन्य पड़ोसी राज्यों के न्यायिक अधिकारियों को भी एसआईआर प्रक्रिया में शामिल किया जाए, यह दर्शाता है कि 'देश के उच्चतम न्यायालय को बंगाल प्रशासन पर भरोसा नहीं है'।
उन्होंने कहा, "यह शर्म की बात है कि न्यायालय को भी यह एहसास हो गया है कि ममता बनर्जी के शासनकाल में बंगाल प्रशासन का पूर्णतः राजनीतिकरण हो चुका है। बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया में अन्य राज्यों के न्यायिक अधिकारियों को शामिल करना हमारे राज्य की गरिमा व गौरव को ठेस पहुंचाता है और इसके लिए पूरी तरह से सत्तारूढ़ दल जिम्मेदार है।"
भट्टाचार्य ने कहा, "एसआईआर प्रक्रिया का जिम्मा संभाले हुए कुछ राज्य सरकारी अधिकारियों द्वारा जानबूझकर प्रक्रिया को धीमा करने और प्रक्रिया को संचालित करने के लिए पर्याप्त डेटा एंट्री ऑपरेटरों की भर्ती न करने के कारण स्थिति इतनी बिगड़ गई है कि न्यायालय को यह आदेश जारी करना पड़ा।"
भाषा जितेंद्र माधव
माधव
2402 2004 कोलकाता