एसआईआर के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का आदेश बंगाल सरकार के लिए करारा झटका:भाजपा
पवनेश
- 20 Feb 2026, 10:34 PM
- Updated: 10:34 PM
नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए न्यायिक अधिकारियों की तैनाती संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश को ममता बनर्जी सरकार के लिए 'करारा झटका' बताया और कहा कि इससे चुनावी राज्य में मतदाता सूचियों की 'निष्पक्षता' बहाल करने में मदद मिलेगी।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार और निर्वाचन आयोग (ईसी) के बीच जारी खींचतान से नाखुश उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में निर्वाचन आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों की तैनाती के लिए एक 'असाधारण' निर्देश जारी किया।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने निर्वाचन आयोग और 'लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई' तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच 'दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप' और 'विश्वास की कमी' पर खेद व्यक्त करते हुए राज्य में एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कई नए निर्देश जारी किए।
इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए पश्चिम बंगाल में भाजपा के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने कहा, ''उच्चतम न्यायालय से ममता बनर्जी सरकार द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को कमजोर करने के प्रयास को करारा झटका लगा है।''
उन्होंने कहा कि न्यायालय का आदेश 'अहम' है और इस बात पर जोर दिया कि अब न्यायिक निगरानी में पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची की निष्पक्षता बहाल की जाएगी।
उच्चतम न्यायालय ने उन व्यक्तियों के दावे और आपत्तियों के निपटान के लिए न्यायिक अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति का आदेश दिया है, जिन्हें तार्किक विषमताओं की सूची में डाला गया है और जिनके नाम चुनावी सूची से हटाए जाने का खतरा है।
वर्ष 2002 की मतदाता सूची से संबंधित वंशानुक्रम में तार्किक विषमताओं में माता-पिता के नाम का बेमेल होना और मतदाता और उसके माता-पिता के बीच उम्र का अंतर 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक होना शामिल है।
उच्चतम न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल से कुछ न्यायिक अधिकारियों को उपलब्ध कराने और पूर्व न्यायाधीशों को एसआईआर कार्य में सहायता के लिए नियुक्त करने का अनुरोध किया है, क्योंकि न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा पुनरीक्षण कार्य के लिए पर्याप्त संख्या में श्रेणी 'ए' के अधिकारियों को उपलब्ध नहीं कराने पर गंभीर संज्ञान लिया है।
मालवीय ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जांच के लिए लंबित दस्तावेजों की संख्या हैरान कर देने वाली है। उन्होंने कहा, ''लगभग 66,323 दस्तावेज जिलाधिकारियों (डीएम) के पास सत्यापन के लिए लंबित हैं और 30 लाख दस्तावेज ईआरओ/एईआरओ के पास पुन: सत्यापन के लिए लंबित हैं। 20 लाख मतदाताओं के दस्तावेजों पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।''
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता ने आरोप लगाया कि डीएम और उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) जानबूझकर दस्तावेजों की जांच में देरी कर रहे हैं और मूल दस्तावेजों को अंतिम समय तक लंबित रख रहे हैं, इस उम्मीद में कि वे बिना उचित जांच और बिना कोई कारण बताए उन सभी को स्वीकार कर लेंगे।
भाषा संतोष पवनेश
पवनेश
2002 2234 दिल्ली