अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने ट्रंप के व्यापक शुल्क वृद्धि के आदेशों को रद्द किया
वैभव
- 20 Feb 2026, 10:53 PM
- Updated: 10:53 PM
वाशिंगटन, 20 फरवरी (एपी) अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों के खिलाफ लगाए गए व्यापक शुल्क वृद्धि के आदेशों को शुक्रवार को रद्द कर दिया। ऐसा माना जा रहा है कि इससे ट्रंप के आर्थिक एजेंडे को बड़ा झटका लगा है।
न्यायालय द्वारा 6-3 के बहुमत से सुनाये गये इस फैसले का केंद्र बिंदु आपातकालीन शक्तियों के कानून के तहत लगाए गए शुल्क हैं, जिनमें लगभग हर दूसरे देश पर लगाए गए व्यापक ''पारस्परिक'' शुल्क भी शामिल हैं।
यह ट्रंप के व्यापक एजेंडे का पहला महत्वपूर्ण हिस्सा है जो सीधे देश की सर्वोच्च अदालत के समक्ष आया है।
न्यायालय ने कहा कि संविधान ''बहुत स्पष्ट रूप से'' कांग्रेस को कर लगाने की शक्ति देता है, जिसमें शुल्क भी शामिल हैं।
प्रधान न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने फैसले में लिखा, ''संविधान निर्माताओं ने कराधान की शक्ति का कोई भी हिस्सा कार्यपालिका शाखा को नहीं सौंपा।''
न्यायमूर्ति सैमुअल एलिटो, न्यायमूर्ति क्लेरेंस थॉमस और न्यायमूर्ति ब्रेट कावानॉ ने असहमति व्यक्त की।
न्यायमूर्ति कावानॉ ने लिखा, ''यहां जिन शुल्कों पर चर्चा हो रही है, वे नीति के लिहाज से उचित हो सकते हैं या नहीं हो सकते हैं। लेकिन लिखित प्रमाण, इतिहास और पूर्व उदाहरणों के आधार पर, ये स्पष्ट रूप से वैध हैं।''
न्यायमूर्ति रॉबर्ट्स ने कहा, ''और यह तथ्य कि किसी भी राष्ट्रपति को अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (आईईईपीए) में ऐसी शक्ति कभी नहीं मिली है, इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह शक्ति मौजूद ही नहीं है।''
शुल्क संबंधी निर्णय से ट्रंप को अन्य कानूनों के तहत शुल्क लगाने से नहीं रोका जा सकता। हालांकि इन प्रावधानों से ट्रंप की कार्रवाइयों पर अधिक सीमाएं लग जाती हैं, फिर भी प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने कहा है कि वे अन्य अधिकारों के तहत शुल्क ढांचे को यथावत रखने की उम्मीद करते हैं।
राष्ट्रपति इस मामले में मुखर रहे हैं और उनका कहना है कि उनके खिलाफ फैसला आना देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा।
जिस समय यह फैसला दिया गया, उस समय ट्रंप दोनों पार्टियों के लगभग 24 गवर्नर के साथ व्यक्तिगत रूप से बैठक कर रहे थे।
ट्रंप को जब इस फैसले के बारे में सूचित किया गया तो उन्होंने बहुमत के फैसले को ''शर्मनाक'' बताया।
व्हाइट हाउस ने टिप्पणी के अनुरोध पर तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।
सर्वेक्षणों से पता चला है कि आम जनता में शुल्क व्यापक रूप से लोकप्रिय नहीं हैं। खासकर बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत को लेकर मतदाताओं की चिंताओं के बीच, लोग इन शुल्कों को सकारात्मक रूप में नहीं देख रहे हैं।
संविधान कांग्रेस को शुल्क लगाने का अधिकार देता है।
ट्रंप प्रशासन ने दलील दी कि 1977 का वह कानून जो राष्ट्रपति को आपात स्थितियों के दौरान आयात को विनियमित करने की अनुमति देता है, उन्हें शुल्क निर्धारित करने की भी अनुमति देता है।
प्रशासन ने कहा कि अन्य राष्ट्रपतियों ने भी इस कानून का इस्तेमाल कई बार किया है, अक्सर प्रतिबंध लगाने के लिए, लेकिन ट्रंप आयात करों के लिए इसका इस्तेमाल करने वाले पहले राष्ट्रपति थे।
ट्रंप ने अप्रैल 2025 में ज्यादातर देशों पर ''पारस्परिक'' शुल्क लगाए, ताकि व्यापार घाटे को दूर किया जा सके, जिसे उन्होंने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया था।
ये कदम तब उठाए गए जब उन्होंने कनाडा, चीन और मैक्सिको पर शुल्क लगाए, जिसका मकसद कथित तौर पर मादक पदार्थों की तस्करी की आपात स्थिति से निपटना था।
इसके बाद कई मुकदमे दायर किए गए। चुनौती देने वालों ने दलील दी कि आपातकालीन शक्तियों के कानून में शुल्क का उल्लेख तक नहीं है और ट्रंप द्वारा इसका उपयोग कई कानूनी समीक्षाओं में विफल रहता है, जिसमें एक ऐसी समीक्षा भी शामिल है जिसने तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन के 500 अरब अमेरिकी डॉलर के छात्र ऋण माफी कार्यक्रम को विफल कर दिया था।
न्यायमूर्ति रॉबर्ट्स ने कहा, ''आपातकालीन कानूनों के लिए प्रमुख प्रश्न सिद्धांत का कोई अपवाद नहीं है।''
ट्रंप प्रशासन ने दलील दी कि शुल्क अलग चीज हैं क्योंकि वे ट्रंप के विदेश मामलों के दृष्टिकोण का एक प्रमुख हिस्सा हैं, एक ऐसा क्षेत्र जहां अदालतों को राष्ट्रपति के फैसलों पर सवाल नहीं उठाना चाहिए।
कांग्रेस बजट कार्यालय के अनुसार, ट्रंप द्वारा लगाए गए शुल्क के आर्थिक प्रभाव के फलस्वरूप अगले दशक में लगभग तीन ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है।
दिसंबर के संघीय आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा आपातकालीन शक्तियों कानून के तहत लगाए गए आयात करों से राजकोष ने 133 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि एकत्र की है।
एपी
देवेंद्र वैभव
वैभव
2002 2253 वाशिंगटन