अशोक खेमका आरटीआई मामले में 'गलत' तथ्य प्रस्तुत करने के लिए चंडीगढ़ पुलिस को कारण बताओ नोटिस जारी
अविनाश
- 20 Feb 2026, 08:54 PM
- Updated: 08:54 PM
(मोहित सैनी)
नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 2022 में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को भेजे गए एक गुमनाम, कथित तौर पर धमकी भरे पत्र से संबंधित प्राथमिकी के सिलसिले में चंडीगढ़ पुलिस को फटकार लगाई है।
यह मामला खेमका से संबंधित है, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन घटना के समय वह हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। उन्हें 'स्पीड पोस्ट' से एक पत्र मिला था जिस पर उनका नाम लिखा था और कथित तौर पर हरियाणा सरकार के एक कर्मचारी के हस्ताक्षर थे, लेकिन बाद में पता चला कि यह पत्र जाली था। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क किया था।
'पीटीआई' द्वारा प्राप्त प्राथमिकी की प्रति के अनुसार, सेक्टर-17 चंडीगढ़ जीपीओ से भेजे गये पत्र में झूठे आरोप लगाये गये थे और धमकियां दी गई थीं और इसका उद्देश्य खेमका के खिलाफ ''झूठी और मनगढ़ंत कार्रवाई'' शुरू करना था।
खेमका ने पुलिस को बताया था कि डाकघर की सीसीटीवी फुटेज में एक अज्ञात व्यक्ति को पत्र जमा करते हुए देखा गया था और संदिग्ध की पहचान करने में मदद के लिए फुटेज से तस्वीरें निकाली गई थीं।
अपनी शिकायत में खेमका ने कहा था कि पत्र ''पूरी तरह से झूठा, अपमानजनक, मनगढ़ंत और धमकी भरा'' था। उन्होंने यह भी कहा कि इससे ''मेरी और मेरे परिवार के सदस्यों की सुरक्षा के संबंध में चिंता'' पैदा हुई।
आरटीआई आवेदन में खेमका ने पत्र भेजने वाले व्यक्ति की पहचान, जांच के रिकॉर्ड और पुलिस की कार्रवाई जैसे विवरण मांगे थे।
चंडीगढ़ पुलिस ने सूचना देने के अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(एच) का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया था और दावा किया कि सूचना ''अपराधियों की जांच, गिरफ्तारी या अभियोजन की प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न करेगी''।
चंडीगढ़ पुलिस ने 21 जनवरी को सीआईसी को दिए गए अपने लिखित आवेदन में कहा कि लापता व्यक्ति संबंधी उसकी रिपोर्ट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) ने स्वीकार कर लिया है।
हालांकि, हाल में एक आदेश में, मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने कहा कि पुलिस यह समझाने में विफल रही है कि जानकारी का खुलासा वास्तव में जांच में कैसे बाधा डालेगा और यह कहकर गलत जानकारी भी दी है कि मामला ''अनसुलझा'' होने के कारण बंद कर दिया गया था।
आयोग ने बताया कि खेमका द्वारा प्रस्तुत अदालती आदेश के अनुसार, सीजेएम ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और आगे की जांच का आदेश देते हुए कहा था, ''रिपोर्ट को खारिज किया जाता है और मामले की विस्तृत जांच के लिए फाइल संबंधित जांच अधिकारी को वापस भेजी जाती है तथा जल्द से जल्द अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अनुरोध किया जाता है।''
अदालत ने इस बात पर भी गौर किया था कि संदिग्ध की तस्वीर मामले की फाइल में उपलब्ध होने के बावजूद उसे प्रसारित करने का कोई प्रयास नहीं किया गया, जिससे जांच की गंभीरता पर सवाल उठते हैं।
भाषा
देवेंद्र अविनाश
अविनाश
2002 2054 दिल्ली