कांग्रेस विधायक ने 'दूषित पानी' भरी बोतल गुजरात विधानसभा में दिखाई, अध्यक्ष ने लगाई फटकार
दिलीप
- 20 Feb 2026, 08:36 PM
- Updated: 08:36 PM
गांधीनगर, 20 फरवरी (भाषा) गुजरात विधानसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक शैलेश परमार ने एक बोतल दिखाते हुए दावा किया कि उसके अंदर दूषित पानी है। इस पर, सदन के अध्यक्ष शंकर चौधरी ने उन्हें फटकार लगाई।
राज्य के कृषि मंत्री जीतू वाघानी ने भी परमार की आलोचना की।
यह घटना उस वक्त हुई, जब कांग्रेस विधायक दल के नेता तुषार चौधरी ने महिसागर जिले के जमीयतपुरा स्थित मौर्य एनवायरो प्रोजेक्ट के अपशिष्ट प्रसंस्करण स्थल के आसपास भूजल में कथित रासायनिक संदूषण के संबंध में सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए, वन और पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने सदन को बताया कि आसपास के क्षेत्रों में कुओं के जल कथित तौर पर दूषित होने के संबंध में 2024 और 2025 में पांच शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार निरीक्षण किये गए और इकाई परिसर के साथ-साथ आसपास के गांवों से भूजल के नमूने एकत्र किये गए। मंत्री ने कहा कि नमूनों के विश्लेषण से भूजल की गुणवत्ता में किसी व्यापक या स्थायी संदूषण का संकेत नहीं मिला। उन्होंने कहा कि परीक्षण के दौरान जल के दूषित होने का कोई सबूत नहीं मिला।
जवाब से असहमत होते हुए, बायद से निर्दलीय विधायक धवलसिंह जाला ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि कचरा फेंकने का स्थान उनके निर्वाचन क्षेत्र के पास स्थित है और स्थानीय निवासियों ने इससे होने वाले प्रदूषण के बारे में अधिकारियों से कई बार शिकायतें की हैं।
उन्होंने सदन को बताया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पहले सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) को इस पर रोक लगाने का निर्देश दिया था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मंत्री ने जैसे ही दोहराया कि इलाके में जल प्रदूषण नहीं है, परमार अपने स्थान पर खड़े हो गए और मटमैले रंग के तरल पदार्थ से भरी एक छोटी बोतल निकाली और उसे दिखाते हुए दावा किया कि इसमें कुछ दिन पहले कचरा डाले जाने के पास स्थित एक कुएं से लिया गया पानी है।
परमार ने कहा कि यह बोतल इस बात का सबूत है कि सरकार के दावों के विपरीत, इलाके का भूजल दूषित है तथा स्थानीय निवासी और किसान इससे प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य प्रभावित गांवों में जमीनी हकीकत को बयां करना है।
इस पर अध्यक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन के भीतर बोतल प्रदर्शित करने को लेकर नाराजगी जताई।
सरकार की ओर से जीतू वाघानी ने भी आपत्ति जताई और अध्यक्ष से इस मामले पर उपयुक्त निर्देश देने का आग्रह किया।
अध्यक्ष ने कहा, ''आप भली-भांति जानते हैं कि सदन के सदस्यों को ऐसी वस्तुएं सदन के अंदर लाना और इस तरह प्रदर्शित करना मना है। मैं इस मामले में कोई सख्त कार्रवाई नहीं करना चाहता। अगर इस तरह से कोई और वस्तु लाई जाती है तो ऐसा कृत्य अन्य सदस्यों की जान को जोखिम में डाल सकता है।''
उन्होंने विधानसभा के सार्जेंट को परमार से बोतल ले लेने का निर्देश दिया और सदस्यों को इस तरह के व्यवहार की पुनरावृत्ति से परहेज करने को कहा।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, ''यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों और मैं विशेष रूप से परमार से भविष्य में ऐसे कृत्यों से परहेज करने का अनुरोध करता हूं।''
हालांकि, परमार ने कहा कि उनका एकमात्र उद्देश्य यह साबित करना था कि कचरा स्थल के पास का भूजल वास्तव में दूषित है।
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