ट्रंप ने फिर दोहराया कि भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष को उन्होंने रुकवाया
वैभव
- 19 Feb 2026, 10:38 PM
- Updated: 10:38 PM
(योषिता सिंह)
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन, 19 फरवरी (भाषा) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को दोहराया कि उन्होंने पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान को धमकी दी थी कि अगर दोनों दक्षिण एशियाई देशों ने लड़ाई बंद नहीं की तो उन पर 200 प्रतिशत शुल्क लगा दिया जाएगा। ट्रंप ने एक बार फिर अपने दावे को दोहराया कि उन्होंने दोनों परमाणु-शक्ति संपन्न पड़ोसी देशों के बीच सैन्य संघर्ष समाप्त कराया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने वाशिंगटन में गाजा को लेकर गठित 'शांति बोर्ड'के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए इस दावे को दोहराया कि उन्होंने व्हाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष के भीतर आठ युद्धों को समाप्त कराया है।
भारत लगातार किसी भी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से इनकार करता रहा है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रंप के नेतृत्व वाले बोर्ड में शामिल होने के लिए हस्ताक्षर करने वाले अन्य देशों के नेताओं के साथ इस कार्यक्रम में भाग लिया।
ट्रंप ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन संघर्षों की सूची दी जिन्हें समाप्त कराने में उन्होंने भूमिका निभाने का दावा किया है। इस अवसर पर उन्होंने ऐसे देशों का नाम लेकर उनके नेताओं से खड़े होने का अनुरोध किया।
ट्रंप ने शरीफ को खड़े होने के लिए कहा और फिर बोला, ''मैंने प्रधानमंत्री (नरेन्द्र) मोदी से बात की। वह उत्साहित हैं। वह अभी हमें देख रहे हैं।''
उन्होंने शरीफ की ओर इशारा करते हुए कहा, ''पाकिस्तान और भारत। यह एक बड़ा मुद्दा था। मुझे लगता है कि आपको वास्तव में खड़े होना चाहिए, कृपया एक पल के लिए खड़े हो जाइए। पाकिस्तान और भारत। बहुत-बहुत धन्यवाद।''
पिछले साल मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष समाप्त कराने के दावे के साथ ट्रंप ने कहा कि उन्हें शरीफ और देश के फील्ड मार्शल तथा चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज आसिम मुनीर पसंद हैं। उन्होंने मुनीर को 'महान व्यक्ति' कहा।
ट्रंप ने यह बात दोहराई कि शरीफ ने दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोककर ''2.5 करोड़ लोगों की जान बचाई'' थी।
इससे पहले, ट्रंप ने दावा किया था कि शरीफ ने कहा था कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष को समाप्त करके एक करोड़ लोगों की जान बचाई है।
ट्रंप ने कहा,''मैंने उन दोनों से फोन पर बात की, और मैं शरीफ को थोड़ा-बहुत जानता था। दरअसल, मैं प्रधानमंत्री मोदी को बहुत अच्छी तरह जानता था। पाकिस्तान के साथ मेरा थोड़ा-बहुत व्यापार का संबंध था। वे बहुत अच्छा सौदा करने की कोशिश कर रहे थे, और मैं उनसे थोड़ा नाराज़ हो जाता था। लेकिन अंत में, उन्हें वही मिला जो वे चाहते थे, है ना? उन्होंने अच्छा करार किया, और मुझे प्रधानमंत्री, फील्ड मार्शल, जो एक सख्त आदमी हैं, एक दमदार और अच्छे जुझारू हैं, एक गंभीर जुझारू व्यक्ति हैं, पसंद आने लगे। दरअसल, मुझे अच्छे जुझारू लोग पसंद हैं।''
उन्होंने कहा, ''वे (भारत और पाकिस्तान) अमेरिका के साथ बहुत व्यापार करते हैं, और अचानक ही उनका रुख नरम पड़ गया। फिर अचानक ही मैंने पढ़ा कि पहले एक देश ने अपना रुख बदला, फिर दूसरे ने, और अचानक ही हमने एक समझौता कर लिया। लेकिन मैंने कहा, ''अगर तुम लड़ोगे, तो मैं दोनों देशों पर 200 प्रतिशत शुल्क लगा दूंगा, जिसका अभिप्राय होता कि वे अमेरिका के साथ कोई व्यापार नहीं कर पाते।''
ट्रंप ने कहा, ''मैं नाम नहीं बताऊंगा लेकिन उनमें से एक ने कहा, 'नहीं, ऐसा नहीं कर सकते।' वे दोनों लड़ना चाहते थे। लेकिन जब पैसे की बात आई, तो पैसे से बढ़कर कुछ नहीं। जब बहुत सारा पैसा खोने की बात आई, तो उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हम लड़ना नहीं चाहते।' और हमने दो-तीन दिनों में वह समझौता कर लिया।''
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''लोगों को कुछ पता नहीं था। उनमें से बहुत से कहते हैं, 'ओह, वे लड़ नहीं रहे थे'। वे लड़ रहे थे, 11 लड़ाकू विमान मार गिराए गए, बहुत महंगे जेट, और वे सभी संघर्ष में शामिल थे। दोनों ही संघर्ष में शामिल थे, और अब वे नहीं हैं।''
ट्रंप ने कहा, ''और मुझे लगता है कि हम उनसे हमेशा मामला सुलझाने में सक्षम होंगे। मुझे सच में ऐसा लगता है। मुझे लगता है… रिश्तों में भी काफी प्रगति हुई है। और प्रधानमंत्री मोदी भी एक महान व्यक्ति हैं। वे सभी महान हैं।''
हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे किस देश के लड़ाकू विमानों का जिक्र कर रहे थे।
ट्रंप ने पिछले साल 10 मई के बाद से भारत-पाकिस्तान संघर्ष को रोकने का श्रेय 80 से अधिक बार लिया है। उन्होंने पिछले साल सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि अमेरिका की मध्यस्थता से हुई बातचीत के बाद दोनों पड़ोसी देशों ने ''पूर्ण और तत्काल'' संघर्ष विराम पर सहमति जताई है।
भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में सात मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था और पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया था।
भाषा धीरज वैभव
वैभव
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