गुजरात: मुख्यमंत्री ने बजट को जनकल्याण केंद्रित बताया तो विपक्ष ने निराशाजनक
माधव
- 18 Feb 2026, 09:05 PM
- Updated: 09:05 PM
अहमदाबाद, 18 फरवरी (भाषा) मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने बुधवार को कहा कि गुजरात का बजट राज्य की विकास यात्रा को निरंतर आगे बढ़ाने वाला है, जिसमें जनकल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है और नागरिकों पर कोई नया कर बोझ नहीं डाला गया है।
उधर, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने बजट को किसानों, युवाओं और आम लोगों के लिए निराशाजनक तथा चुनाव-उन्मुख बताया।
इससे पहले दिन में वित्त मंत्री कनुभाई देसाई ने 2026-27 के लिए 4.08 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसमें पर्यटन प्रोत्साहन, डिजिटल शासन, क्षेत्रीय विकास और 2030 के राष्ट्रमंडल खेल से पहले खेल अवसंरचना निर्माण पर जोर दिया गया है।
पटेल ने कहा कि कुल बजट व्यय का लगभग 65 प्रतिशत विकास कार्यों के लिए आवंटित है और यह सामाजिक सुरक्षा, मानव संसाधन विकास, अवसंरचना, आर्थिक वृद्धि तथा हरित विकास के पांच स्तंभों पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में गुजरात निरंतर प्रगतिशील विकास में अग्रणी बना हुआ है और "अडिग विश्वास, अविरत विकास" की भावना के साथ बजट प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने बताया कि पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 2026 को 'गुजरात पर्यटन वर्ष' घोषित किया गया है और इसके लिए 6,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
पटेल ने कहा कि मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों से अहमदाबाद को राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी का अवसर मिला है और इसके लिए खेल अवसंरचना व आधुनिक परिवहन सेवाओं हेतु 1,200 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।
कांग्रेस की गुजरात इकाई के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा कि बजट में अवसंरचना, खेल और उद्योग के नाम पर बड़े आंकड़े दिखाकर 2047 तक विकसित गुजरात का सपना पेश किया गया है, लेकिन यह 2026-27 की वास्तविक जरूरतों और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की परेशानी के बावजूद कृषि ऋण माफी का कोई उल्लेख नहीं है और सामाजिक न्याय, पेंशन या न्यूनतम वेतन बढ़ाने संबंधी कोई घोषणा नहीं की गई।
आप विधायक चैतर वसावा ने कहा कि सरकार ने चुनाव-उन्मुख बजट पेश किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी विकास के लिए 5,425 करोड़ रुपये का प्रावधान तो है, लेकिन घोषित आवंटन का पूरा उपयोग नहीं होता।
उन्होंने कहा कि स्कूलों में कमरों और शिक्षकों की कमी दूर करने पर सरकार मौन है और स्वास्थ्य विभाग के लिए 25,403 करोड़ रुपये के प्रावधान के बावजूद आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है।
वसावा ने कहा कि महिला एवं बाल विकास के लिए 7,690 करोड़ रुपये का प्रावधान है, पर कुपोषण दूर करने की स्पष्ट योजना नहीं बताई गई।
भाषा खारी माधव
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