दिल्ली उच्च न्यायालय ने डीसीपीसीआर में रिक्त पदों को मध्य अप्रैल तक भरने को कहा
माधव
- 18 Feb 2026, 08:45 PM
- Updated: 08:45 PM
नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में ढाई साल से अधिक की देरी को ''उचित ठहराने के प्रयास" के लिए अप्रसन्नता जताते हुए कहा कि यदि अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक रिक्त पदों को नहीं भरा गया तो इस मामले को "गंभीरता से लिया जाएगा।"
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने दिल्ली सरकार के वकील से कहा, ''जुलाई 2023 से फरवरी 2026 तक आपने समय लिया और फिर यह कहकर इसे उचित ठहरा रहे हैं कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है...एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, और आप इसे उचित ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।"
दिल्ली सरकार से "पुनर्विचार" करने को कहते हुए, पीठ ने टिप्पणी की कि 2023 के बाद आयोग के सक्रिय बने रहने को सुनिश्चित करने में अधिकारियों की विफलता पर वह "हैरान" है।
दिल्ली सरकार ने एक हलफनामा दाखिल कर कहा कि अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया अप्रैल के दूसरे सप्ताह तक पूरी होने की संभावना है, और पारदर्शिता सुनिश्चित करने और सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के चयन के मद्देनजर यह देरी हुई।
सरकारी वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि मामले में "प्रगति हो रही है" और अप्रैल का दूसरा सप्ताह "अंतिम समय सीमा" है। अदालत ने टिप्पणी की, "यह बस आपका रवैया दर्शाता है...कछुए की गति से ही आगे बढ़ते रहिए। (डीसीपीसीआर) अधिनियम को रद्द कीजिए।"
मामले में "कठोर कार्रवाई" करने पर विचार करते हुए, अदालत ने पूछा कि अधिकारी "एक साधारण नियुक्ति" को अंतिम रूप देने में लगभग तीन साल क्यों लगा रहे हैं।
अदालत ने कहा, "हम आगाह करते हैं कि यदि प्रक्रिया दिल्ली सरकार द्वारा बताए अनुसार पूरी नहीं होती है, तो मामले को गंभीरता से लिया जाएगा। हम आशा करते हैं कि हलफनामे में दिए गए बयान का सम्मान किया जाएगा और प्रक्रिया अप्रैल 2026 के दूसरे सप्ताह तक पूरी हो जाएगी। मामले की सुनवाई अप्रैल के तीसरे बुधवार को होगी।"
याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश हुए वकील ने इस बात का उल्लेख किया कि डीसीपीसीआर को यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी का कार्य भी सौंपा गया था।
वर्ष 2024 में दायर याचिका में याचिकाकर्ता राष्ट्रीय बाल विकास परिषद ने कहा कि डीसीपीसीआर दो जुलाई, 2023 से बिना अध्यक्ष के काम कर रहा और इतने लंबे समय तक पद को खाली रखना दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नियमों के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।
भाषा आशीष माधव
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