'झूठे आंकड़ों' और 'खोखले वादों' का पुलिंदा है मध्यप्रदेश सरकार का बजट: कांग्रेस
शफीक
- 18 Feb 2026, 08:24 PM
- Updated: 08:24 PM
भोपाल, 18 फरवरी (भाषा) कांग्रेस ने बुधवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार की ओर से वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट को ''झूठे आंकड़ों'' और ''खोखले वादों'' का पुलिंदा करार दिया और सवाल उठाया कि जब राजकोषीय घाटा ही 74 हजार करोड़ रुपये हैं तो घोषित योजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा।
मध्यप्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का 4,38,317 करोड़ रुपये के परिव्यय का महिला केंद्रित बजट पेश किया। साथ ही कोई नया कर नहीं लगाए जाने की घोषणा की।
देवड़ा ने राज्य विधानसभा में विपक्ष के व्यवधानों के बीच यह बजट पेश किया। इस दौरान कांग्रेस के सदस्यों ने राज्य के लोगों पर बढ़ते कर्ज के बोझ पर चिंता जताई, हंगामा किया और जमकर नारेबाजी भी की।
बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि यह झूठे आंकड़ों और खोखले वादों का बजट है।
उन्होंने कहा, ''यह बजट प्रदेश की जनता के साथ छलावा है और जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटा हुआ है।''
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वित्त मंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि राजकोषीय घाटा 74 हजार करोड़ रुपये से अधिक होगा।
उन्होंने कहा, ''जब सरकार के पास संसाधन ही नहीं हैं, तो घोषित योजनाओं को पूरा करने के लिए पैसा कहां से आएगा? यह बजट सिर्फ घोषणाओं का पुलिंदा है।''
सिंघार ने कहा कि सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन बजट में इस पर कोई स्पष्ट नीति, योजना या समयसीमा नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं को उम्मीद थी कि भर्ती, नई नौकरियों और रोजगार सृजन पर ठोस प्रावधान होंगे, लेकिन बजट में इस पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।
सिंघार ने आरोप लगाया कि एक तरफ प्रदेश के संसाधन निजी हाथों में सौंपे जा रहे हैं और अदाणी जैसे उद्योगपतियों को करोड़ों रुपये दिए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर आम जनता को बिजली बिल में राहत नहीं दी जा रही।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधायकों की मांग थी कि विधायक निधि दो करोड़ रुपये और बढ़ायी जाए ताकि वे अपने क्षेत्र में विकास कार्य करा सकें लेकिन इसकी अनदेखी की गई।
उन्होंने कहा, ''बजट विकास का नहीं, भ्रम का दस्तावेज है। इसमें झूठे आंकड़े पेश कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई है। प्रदेश की जनता इस छलावे को समझ चुकी है और समय आने पर जवाब देगी।''
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बजट को जनता के साथ ''खुला धोखा'' बताया और कहा कि यह ''ठग बजट'' है।
उन्होंने यहां संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा 4.38 लाख करोड़ रुपये के विशाल बजट के पीछे 78,000 करोड़ रुपये का राजकोषीय घाटा छिपा हुआ है, जिसकी स्पष्ट व्याख्या सरकार आज तक नहीं कर पाई है कि यह राशि भविष्य में कहां से लाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष 4.21 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था, लेकिन उसका लगभग 50 प्रतिशत तक उपयोग ही नहीं हो पाया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि बजट में कर्मचारियों के महंगाई भत्ते की बात तो की गई, लेकिन किसानों और गरीबों के साथ खुले तौर पर छल किया गया।
जीतू पटवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गारंटी के तहत किसानों को सोयाबीन 6000 रुपये, धान 3100 रुपये और गेहूं 2700 रुपये प्रति क्विंटल खरीदने के वादे किए गए थे लेकिन बजट में इनके लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं है।
उन्होंने कहा, ''मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा चुकी है और मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुधारने में पूरी तरह असफल साबित हुए हैं। कांग्रेस पार्टी इस जनविरोधी और छलपूर्ण बजट का विरोध करती है।''
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा कि जिस सरकार ने वार्षिक बजट पेश करने से एक दिन पहले ही 19,287 करोड़ रुपये का तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया हो और उसे 5700 करोड़ रुपये का कर्ज लेना पड़ा हो, उस सरकार के वार्षिक बजट के क्या मायने हो सकते हैं।
पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने एक बयान में कहा कि प्रदेश की बदतर होती आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 15 फ़रवरी तक वित्तीय वर्ष के 321 दिनों में मोहन यादव सरकार ने 17 बार कर्ज लिया है।
उन्होंने इस बजट को किसान, मजदूर, गरीब, महिला, छात्र और युवा विरोधी करार दिया।
भाषा ब्रजेन्द्र शफीक
शफीक
1802 2024 भोपाल