राजस्थान : विश्वविद्यालयों में विमर्श शुल्क वसूले जाने का मुद्दा विधानसभा में उठा
शफीक
- 18 Feb 2026, 05:34 PM
- Updated: 05:34 PM
जयपुर, 18 फरवरी (भाषा) राजस्थान के कुछ विश्वविद्यालयों में स्वयंपाठी विद्यार्थियों से प्रति छात्र 1000 रुपए 'विमर्श शुल्क' वसूले जाने का मुद्दा बुधवार को राज्य विधानसभा में उठा और विपक्ष ने इसको लेकर राज्य सरकार की आलोचना की।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य के लगभग 22.5 लाख विद्यार्थियों से बिना किसी वैधानिक वजह के करीब 223 करोड़ रुपये वसूले गए हैं।
प्रश्नकाल में कांग्रेस के विधायक मनीष यादव ने इसको लेकर प्रश्न पूछा। उन्होंने पिछले कई वर्षों के दौरान राज्य के कुछ विश्वविद्यालयों द्वारा इस शुल्क की वसूली की वैधानिकता पर सवाल उठाया।
यादव ने सरकार पर एक ही प्रश्न के दो अलग-अलग उत्तर देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनके द्वारा उठाए गए तारांकित व अतारांकित प्रश्न के अलग-अलग उत्तर दिए हैं।
इस मुद्दे पर सदन में काफी देर तक हंगामा हुआ। विपक्ष के विधायकों ने इस मामले की जांच करवाने और राज्यपाल के हस्तक्षेप की मांग की। राज्य सरकार के उत्तर से असंतुष्ट विपक्षी कांग्रेस विधायक अपनी सीटों पर खड़े हो गए और जवाब पर आपत्ति जताई जबकि यादव आसन की ओर आ गए।
इससे पहले मूल प्रश्न के उत्तर में उप मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि राजऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय ने 2018-19 और 2024-25 के बीच 22.16 करोड़ रुपये, मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय ने 2020-21 और 2024-25 के बीच 43.16 करोड़ रुपये और राजस्थान विश्वविद्यालय ने 2017-18 और 2024-25 के बीच ''विमर्श फीस'' के तहत 156.18 करोड़ रुपये लिए हैं।
मंत्री ने कहा, ''कुल मिलाकर, लगभग 22.5 लाख विद्यार्थियों से 223 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसे लिए गए हैं और इस रकम का इस्तेमाल परीक्षा से जुड़े कामों के लिए किया गया है।''
यादव ने जवाब पर एतराज जताते हुए पूछा कि जब परीक्षा शुल्क पहले ही अलग से लिया जा रहा है तो इस रकम का इस्तेमाल परीक्षा से जुड़े कामों के लिए कैसे किया जा सकता है। उन्होंने मंत्री से जानना चाहा कि कितने परामर्श केंद्र बनाए गए, कितने विद्यार्थियों को इससे फायदा हुआ और इस राशि को किस-किस मद में खर्च किया गया। यादव ने इससे जुड़ी जानकारी सदन के पटल पर रखने की अपील की।
इस पर मंत्री ने इसे संबंधित विश्वविद्यालय कानून के तहत आने वाला मामला बताया। विपक्ष के विधायकों ने सरकार पर इस संबंध में स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाने में विफल रहने का आरोप लगाया।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि मंत्री को विभागीय आदेश पढ़ने के बजाय विश्वविद्यालय कानून के संबंधित अनुच्छेद का उल्लेख करना चाहिए।
जूली और यादव ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय कानून में स्वयंपाठी विद्यार्थियों से ऐसा शुल्क लेने का कोई प्रावधान नहीं है और इसे तुरंत बंद करने की मांग की। उन्होंने विद्यार्थियों से पहले ही वसूली गई रकम को भी लौटाने की मांग की।
यादव ने इस मद में वसूली गई रकम को 22.5 लाख विद्यार्थियों पर "सीधा बोझ" बताया और आरोप लगाया कि न तो सरकार और न ही सम्बद्ध विश्वविद्यालयों ने इसका कोई सबूत दिया है कि 223 करोड़ रुपये का कोई हिस्सा असल परामर्श सेवाओं पर खर्च किया गया था।
इस मुद्दे पर हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने प्रश्नकाल समाप्त होने की घोषणा की, जिसके बाद हंगामा शांत हुआ।
भाषा पृथ्वी शफीक
शफीक
1802 1734 जयपुर