अल फलाह ने संशोधित कानूनी प्रावधानों को चुनौती देते हुए पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख किया
दिलीप
- 17 Feb 2026, 08:29 PM
- Updated: 08:29 PM
चंडीगढ़, 17 फरवरी (भाषा) फरीदाबाद स्थित अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और अल फलाह विश्वविद्यालय ने हरियाणा निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का रुख किया है।
हरियाणा विधानसभा ने पिछले वर्ष दिसंबर में हरियाणा निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक पारित किया था। इसमें ऐसे प्रावधान किए गए हैं, जिनके तहत ''कुछ परिस्थितियों में'', जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामले भी शामिल हैं, किसी निजी विश्वविद्यालय की प्रबंधन संस्था को भंग किया जा सकता है और उसके संचालन को एक प्रशासक की नियुक्ति के माध्यम से राज्य सरकार अपने नियंत्रण में ले सकती है।
संशोधित अधिनियम में जोड़े गए नए प्रावधानों धारा 44बी और 46 का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार को ''अनियंत्रित शक्ति'' प्रदान कर दी गई है, जिसके जरिए वह ''किसी गंभीर चूक'' के नाम पर, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था आदि शामिल हैं, ''एक प्रशासक नियुक्त कर निजी विश्वविद्यालय के प्रबंधन और नियंत्रण पर कब्जा कर सकती है।''
यह विधेयक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार द्वारा ऐसे समय में लाया गया, जब जम्मू कश्मीर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर एक ''सफेदपोश'' आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था। जांच के दौरान फरीदाबाद स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय का नाम सामने आया, क्योंकि इसके कुछ संकाय सदस्य 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम धमाके से जुड़े पाए गए थे। इस धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी।
यह याचिका सोमवार को उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के लिए आई और मामले की अगली सुनवाई छह अप्रैल को होगी।
याचिका में संशोधित अधिनियम के कुछ प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ''विश्वविद्यालय में स्थिति सामान्य होने के बावजूद राज्य सरकार अपने अधिकारियों की नियुक्ति कर विश्वविद्यालय का नियंत्रण अपने हाथ में ले रही है, जिससे एक निजी विश्वविद्यालय की प्रकृति ही बदल जाती है। यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 30 का पूर्ण उल्लंघन है।''
याचिका में यह भी कहा गया है कि यह वर्गीकरण ''स्पष्ट रूप से मनमाना है और अनुच्छेद 14 के तहत दिए गए अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक तर्कसंगतता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।''
अल फलाह विश्वविद्यालय के चार संकाय सदस्यों पर दिल्ली बम धमाके से जुड़े होने का आरोप लगाया गया था।
याचिका के अनुसार, विश्वविद्यालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चारों की सेवाएं समाप्त कर दीं और जांच एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग किया।
याचिकाकर्ता को संशोधित अधिनियम की धारा 46 के तहत एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें विश्वविद्यालय के खिलाफ जांच शुरू किए जाने और राज्य सरकार द्वारा जांच अधिकारियों की नियुक्ति की सूचना दी गई थी।
राज्य सरकार ने नए कानून के तहत 16 जनवरी को परिसर निरीक्षण के लिए जांच नोटिस भी जारी किया।
एक अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान का दर्जा प्राप्त अल फलाह विश्वविद्यालय ने कहा कि संशोधित प्रावधान राज्य सरकार को ''अनियंत्रित और मनमानी शक्ति देते हैं, जिससे वह किसी भी निजी विश्वविद्यालय का पूर्ण और स्थायी नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है।'' इससे विश्वविद्यालय की मूल प्रकृति समाप्त हो जाती है और संस्था के प्रबंधन के साथ-साथ उसकी निजी संपत्ति पर भी राज्य का कब्जा हो सकता है।
भाषा गोला दिलीप
दिलीप
1702 2029 चंडीगढ़