शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट करने से मंत्रियों ने इनकार किया
रंजन
- 17 Feb 2026, 08:24 PM
- Updated: 08:24 PM
तिरुवनंतपुरम, 17 फरवरी (भाषा) केरल के वामपंथी मंत्रियों ने विपक्ष के बढ़ते दबाव के बावजूद मंगलवार को शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट करने से इनकार कर दिया।
हालांकि, मंत्रियों ने कहा कि सरकार हमेशा श्रद्धालुओं के साथ रही है।
कानून मंत्री पी. राजीव और देवस्वओम मंत्री वी एन वासवन ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार के लिए केवल एक पीठ गठित की है और अभी तक राज्य सरकार से उसका पक्ष नहीं मांगा है।
वासवन ने संवाददाताओं से कहा कि मामले में अंतिम सुनवाई अप्रैल में होगी और आवश्यक परामर्श के बाद सरकार अदालत को अपना रुख स्पष्ट करेगी।
उन्होंने कहा, "हम हमेशा श्रद्धालुओं के साथ रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है। हम कभी भी श्रद्धालुओं के खिलाफ खड़े नहीं होंगे।"
हालांकि उन्होंने बार-बार पूछे जाने पर यह स्पष्ट नहीं किया कि सरकार मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं के शबरिमला मंदिर में प्रवेश का समर्थन करेगी या विरोध करेगी।
राजीव ने भी इसी तरह का रुख अपनाते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय पहले यह विचार करेगा कि क्या उसे पूजा स्थलों की पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा, "इसलिए, इस समय सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने के लिए कहना तर्कहीन है।"
उन्होंने कहा कि अदालत सात मूलभूत प्रश्नों पर विचार करने के बाद ही समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, इसलिए सरकार के पास अपना पक्ष तय करने के लिए पर्याप्त समय है।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक विशेषज्ञों और अन्य विद्वानों से परामर्श के बाद निर्णय लिया जाएगा।
माक्सर्वादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव एम. ए. बेबी ने भी इस विवादित विषय पर सीधा जवाब देने से परहेज किया।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आवश्यक चर्चा के बाद उचित निर्णय लेगी और ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए जिससे समाज में अनावश्यक तनाव पैदा हो।
यह मुद्दा चुनावी राज्य केरल में फिर से प्रमुख राजनीतिक विषय बन गया है।
सोमवार को उच्चतम न्यायालय द्वारा धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ कथित भेदभाव से जुड़ी याचिकाओं, जिनमें शबरिमला मामला भी शामिल है, की सुनवाई के लिए नौ-न्यायाधीशों की पीठ गठित किए जाने के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
विपक्ष ने पिनराई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार से तत्काल संशोधित हलफनामा दायर करने की मांग की है।
भाषा राखी रंजन
रंजन
1702 2024 तिरुवनंतपुरम