केरलः नव केरल नागरिक कार्यक्रम का कार्यान्वयन रद्द, चुनाव से पहले धन के 'भ्रामक' उपयोग पर उठे सवाल
अविनाश
- 17 Feb 2026, 08:21 PM
- Updated: 08:21 PM
कोच्चि, 17 फरवरी (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार को सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को झटका देते हुए नव केरल नागरिक प्रतिक्रिया कार्यक्रम के लिए 20 करोड़ रुपये की मंजूरी देने वाले सरकारी आदेश को रद्द कर दिया।
अदालत ने इसे 'कार्यकारी शक्ति का दुरुपयोग' और नियमों का उल्लंघन करार दिया।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वीएम की पीठ ने चिंता जताई कि विभागों को आवंटित बजट का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है और यहां तक कि वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए स्वेच्छा से बनाए गए नियमों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है।
पीठ ने कहा, "प्रस्तुत दस्तावेजों से स्पष्ट तथ्यों व परिस्थितियों और राज्य सरकार द्वारा अपनाए गए रुख से हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि सार्वजनिक धन के प्रबंधन में सरकार से अपेक्षित वित्तीय अनुशासन के मामले में सुधार की आवश्यकता है...।"
अदालत ने यह भी कहा कि इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया कि मंत्रिमंडल के निर्णय और इस संबंध में सरकारी आदेश से काफी पहले माकपा के राज्य सचिव एमवी गोविंदन द्वारा पार्टी से जुड़े लोगों को कार्यक्रम में भाग लेने और सामाजिक स्वयंसेवक बल पोर्टल पर पंजीकरण कराने का आह्वान करते हुए पत्र कैसे जारी किया गया।
पीठ ने कहा कि स्पष्टीकरण की कमी ने इस आरोप को बल दिया कि कार्यक्रम का गुप्त रूप से उपयोग करने के लिए एक सुनियोजित प्रयास किया गया, जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं को पोर्टल पर जानकारी भेजने की अनुमति दी गई थी जबकि इस बात का पर्याप्त प्रचार नहीं किया गया था कि वेबसाइट का उपयोग इस पहल के लिए किया जाएगा।
पीठ ने कहा, " सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को 'विशेष जनसंपर्क अभियान' मद के तहत 20 करोड़ रुपये का आवंटन, एक ऐसे कार्यक्रम के लिए जो मूल रूप से योजना एवं आर्थिक मामलों के विभाग व कार्यक्रम कार्यान्वयन एवं निगरानी विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है, वास्तव में कार्यकारी शक्ति के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है, जैसा कि याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है।"
पीठ ने कोच्चि निवासी मुबास एमएच और केरल छात्र संघ (केएसयू) की राज्य इकाई के अध्यक्ष अलोशियस जेवियर द्वारा दायर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पनी की।
याचिका में कार्यक्रम और निधि आवंटन को चुनौती दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि सरकार 'सत्ताधारी दल या गठबंधन के निजी और राजनीतिक लाभ के लिए सार्वजनिक धन का दुरुपयोग कर रही है'।
पीठ ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम पहले नहीं चलाया गया और विधानसभा चुनावों की घोषणा के ठीक बाद शुरू किया गया था।
भाषा जितेंद्र अविनाश
अविनाश
1702 2021 कोच्चि