उच्चतम न्यायालय ने पूछा: क्या यह अदालत बंगाल की हर हत्या या हिंसक घटना की निगरानी करेगी?
दिलीप
- 17 Feb 2026, 08:13 PM
- Updated: 08:13 PM
नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को सवाल किया कि क्या यह अदालत पश्चिम बंगाल में होने वाली हर हत्या या हिंसक घटना की निगरानी करेगी।
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी राज्य में 2018 के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीन कार्यकर्ताओं की कथित हत्या से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि उसने अपनी शिकायत लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाया?
वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने मामले का संक्षिप्त परिचय दिया और कहा कि पश्चिम बंगाल में हुई तीन भयानक हत्याओं को उच्चतम न्यायालय के ध्यान में लाया गया था।
भाटिया ने ही 2018 में यह याचिका दायर की थी और वह मृतकों में से एक के भाई की ओर से पेश भी हुए थे।
उन्होंने दलील दी कि उस समय राज्य में 19 हत्याएं हुईं, जो राजनीतिक प्रकृति की थीं। उन्होंने कहा कि मृतक में से एक के भाई और परिवार के सदस्यों को कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा जान से मारने की धमकियां दी जा रही थीं।
भाटिया ने कहा कि इन 19 मामलों में पांच क्लोजर रिपोर्ट (मामला बंद करने की रिपोर्ट) दाखिल की गईं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने पूछा, ''क्या यह अदालत पश्चिम बंगाल में होने वाली हर हत्या या हर हिंसक घटना, सभी चीजों, की निगरानी करने वाली है?''
पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को राहत के लिए उच्च न्यायालय का रुख करना चाहिए।
भाटिया ने कहा कि मृतकों में से एक के परिवार के सदस्यों को सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए, क्योंकि उन्हें धमकियां मिल रही हैं।
उन्होंने कहा कि उस मृतक का भाई भी शीर्ष न्यायालय में एक आवेदन दायर कर चुका है।
भाटिया ने मृतकों में से एक का पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्रस्तुत किया।
पीठ ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद कहा कि प्रारंभिक रूप से यह आत्महत्या के लिए फांसी लगाने जैसा एक 'क्लासिक' मामला प्रतीत होता है।
भाटिया ने कहा कि वह इस मामले में प्रत्युत्तर दाखिल करेंगे।
पीठ ने उन्हें प्रत्युत्तर (रिज्वॉइंडर) दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और मामले की सुनवाई के लिए 10 मार्च की तारीख निर्धारित की।
शीर्ष अदालत ने अगस्त 2018 में पश्चिम बंगाल में स्थानीय निकाय चुनावों के बाद तीन भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित हत्या की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर विचार करने की सहमति दी।
यह भी आरोप लगाया गया था कि मारे गए तीन भाजपा कार्यकर्ताओं- शक्तिपाद सरकार, त्रिलोचन महतो और दुलाल कुमार के परिवार वालों को धमकियां दी जा रही थीं।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में मंदिरबाजार-धनुरहाट क्षेत्र के भाजपा ब्लॉक अध्यक्ष शक्तिपाद सरकार की जुलाई 2018 में उस समय बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जब वह अपने घर लौट रहे थे।
जून 2018 में, पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बलरामपुर में भाजपा कार्यकर्ता 32-वर्षीय दुलाल कुमार का शव एक बिजली के खंभे से लटका हुआ मिला था।
इसी जिले में मई 2018 में, बलरामपुर के रहने वाले 18-वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता तिरलोचन महतो का शव एक पेड़ से लटका हुआ मिला था।
भाषा सुरेश दिलीप
दिलीप
1702 2013 दिल्ली