ममता ने निर्वाचन आयोग को 'तुगलकी आयोग' बताया, मतदाता सूचियों में हेरफेर का आरोप लगाया
माधव
- 17 Feb 2026, 10:14 PM
- Updated: 10:14 PM
(फोटो सहित)
कोलकाता, 17 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए इसे ''तुगलकी आयोग'' करार दिया और आरोप लगाया यह राज्य में मतदाताओं की सूचियों में हेरफेर के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम कर रहा है।
राज्य सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने मोहम्मद बिन तुगलक और एडॉल्फ हिटलर से तुलना करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग बंगाल के मतदाताओं को 'यातना' दे रहा है।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग नियमों का उल्लंघन कर रहा है, उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना कर रहा है और ऐसी भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है जिसके परिणामस्वरूप मौतें भी हुई हैं।
बनर्जी ने पत्रकारों से कहा, ''यह एक अत्याचार आयोग है, और वे तुगलक की तरह व्यवहार कर रहे हैं, हिटलर की तरह अत्याचार कर रहे हैं। मेरा सवाल यह है कि जनता सरकार चुनती है, या किसी राजनीतिक दल की ओर से काम करने वाला तुगलकी आयोग? हरियाणा, बिहार और महाराष्ट्र में शिकायतें थीं। तो फिर बंगाल को क्यों निशाना बनाया जा रहा है? निर्वाचन आयोग यह सब सिर्फ भाजपा को खुश करने के लिए कर रहा है।''
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने मतदाता सत्यापन के मामले में निर्वाचन आयोग के रुख पर भी सवाल उठाया और कहा कि बिहार जैसे अन्य राज्यों में स्वीकार किए जाने वाले दस्तावेजों को बंगाल में अस्वीकार किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया, "क्यों बिहार भारत का हिस्सा नहीं है, या बंगाल भारत का हिस्सा नहीं है?"
उच्चतम न्यायालय में 14 फरवरी की सुनवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने सुनवाई से पहले अपने पोर्टल तक पहुंच को अवरुद्ध कर दिया था।
उन्होंने कहा, "उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार सुनवाई 14 फरवरी को होनी थी। लेकिन उस दिन दोपहर तीन बजे लॉगिन क्यों अवरुद्ध कर दिया गया? कई लाख लोग ऐसे हैं जिनका सत्यापन पूरा हो चुका है और वे वैध मतदाता हैं। लॉगिन अवरुद्ध करने से उनके आवेदनों का निपटारा नहीं हो सका।"
राज्य से प्रतिनियुक्त सात सहायक मतदाता पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) के निलंबन पर उन्होंने कहा कि अधिकारियों को न तो सुनवाई का अवसर दिया गया और न ही कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
उन्होंने कहा, "उनमें से कुछ ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के सुचारू कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की। ये प्रतिशोधात्मक कदम हैं। कोई भी सरकार बदले की भावना से काम नहीं कर सकती। हम जनता के साथ हैं, हम अधिकारियों के साथ हैं और हम उनके साथ बने रहेंगे।''
बनर्जी ने कहा, ''अगर बंगाल सरकार के अधिकारियों को (निर्वाचन आयोग द्वारा) निशाना बनाया जाता है, तो हम उनकी शत-प्रतिशत रक्षा करेंगे और जिन्हें पदावनत किया गया है, उन्हें पदोन्नत करेंगे।"
बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि जिलाधिकारियों पर दबाव डाला जा रहा है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास के खिलाफ चेतावनी दी।
बनर्जी ने आरोप लगाया, "मैं देश के खिलाफ नहीं हूं; मैं अपने देश से प्यार करती हूं। लेकिन स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों के नाम पर 'एक राष्ट्र, एक पार्टी' और 'एक पार्टी, एक तुगलकी आयोग' के नारे वास्तव में लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित करने का प्रयास हैं।"
बनर्जी ने दावा किया कि राज्य में एसआईआर को लेकर चिंता और काम से संबंधित दबाव के कारण 160 लोगों की जान चली गई।
मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग से कहा कि अंतिम मतदाता सूची में सभी धर्मों और सामाजिक पृष्ठभूमि के पात्र मतदाताओं को शामिल करना सुनिश्चित किया जाए।
बनर्जी ने फिर से दोहराया कि राज्य में कुछ भाजपा नेताओं को "गंभीर मानसिक समस्याएं" हैं और कहा कि उन्हें पेशेवर मूल्यांकन करवाना चाहिए।
उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में भी मतदाताओं के नाम हटाए जाने का जिक्र किया और दावा किया कि दो लाख से अधिक मतदाताओं में से 40,000 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब हैं।
उन्होंने कहा, ''हमें नहीं पता कि किनके नाम हटाए गए हैं। हमें बिल्कुल भी जानकारी नहीं है। वे लुका-छिपी खेल रहे हैं।'' उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश की शासन व्यवस्था राष्ट्रपति प्रणाली की ओर बढ़ रही है।
रामायण में सीता के अपहरण की घटना से स्थिति की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम मसौदा सूची में होने के बावजूद अंतिम मतदाता सूची से गायब हैं, उन्हें मतदान के दिन इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
उन्होंने दावा किया कि "विभिन्न त्रुटियों" के बहाने महिलाओं और युवा मतदाताओं को भी उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया, ''अब वे चुनिंदा रूप से अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों, आदिवासियों, राजबंशी समुदाय और गरीब लोगों को निशाना बना रहे हैं। व्यवस्था संबंधी कमियों का बहाना बनाकर महिलाओं के अधिकारों को छीना जा रहा है।''
एसआईआर के समय पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने कहा, ''जब आपके पास 24 साल का समय था, तो एसआईआर पहले क्यों नहीं कराया गया?"
बांग्लादेश के चुनावों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "देखिए वहां चुनाव कितने शांतिपूर्ण ढंग से हुए। यह शर्म की बात है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र को कुचला जा रहा है।"
बनर्जी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के लगातार संदेशों से भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
उन्होंने दावा किया, "सोचिए इस तुगलकी आयोग ने कितने व्हाट्सएप संदेश भेजे हैं– एक सुबह, एक नाश्ते के समय, एक 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच, एक दोपहर के भोजन के समय, एक चाय या कॉफी के दौरान, एक रात के खाने के समय और एक सोने से पहले। हर संदेश में कुछ अलग लिखा है। पूरा मामला भ्रामक और गैरकानूनी है।"
भाषा आशीष माधव
माधव
1702 2214 कोलकाता