उन्नाव पीड़िता के पिता की मृत्यु का मामला: अदालत ने जयदीप को आत्मसमर्पण को कहा
माधव
- 17 Feb 2026, 05:33 PM
- Updated: 05:33 PM
नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि भाजपा से निर्वासित नेता कुलदीप सेंगर के भाई जयदीप सेंगर को आत्मसमर्पण कर देना चाहिए, क्योंकि पहले उन्हें चिकित्सा आधार पर दी गई अंतरिम जमानत को बढ़ाने का कोई आदेश नहीं है। यह मामला उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़ा है।
अदालत जयदीप सेंगर की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उन्होंने अपनी अंतरिम जमानत को तीन महीने तक बढ़ाने की मांग की थी, जिसका केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने विरोध किया।
इस मामले में निचली अदालत द्वारा 10 साल की सजा पाए 50-वर्षीय जयदीप सेंगर ने मुंह के कैंसर से पीड़ित होने के कारण अंतरिम जमानत अवधि बढ़ाने की अपील की है।
सीबीआई के वकील ने कहा कि यह अंतरिम जमानत बढ़ाने का उपयुक्त मामला नहीं है और जयदीप सेंगर द्वारा अपनी याचिका के समर्थन में दी गई चिकित्सकीय सलाह वास्तविक नहीं, बल्कि ''गढ़ी हुई'' है।
भोजनावकाश से पहले के सत्र में, अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि अंतरिम जमानत अगली सुनवाई की तारीख यानी 20 फरवरी तक बढ़ा दी जाएगी।
हालांकि, दोपहर के भोजन के बाद इस मामले पर फिर से विचार किया गया और अदालत ने पाया कि यद्यपि उच्च न्यायालय ने तीन जुलाई, 2024 को चिकित्सा कारणों से जयदीप सेंगर को दो महीने के लिए अंतरिम जमानत दी थी, लेकिन इसे अनिश्चित काल तक बढ़ाने के लिए कोई विशिष्ट आदेश नहीं थे।
जयदीप सेंगर को आत्मसमर्पण करने की सलाह देते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी अंतरिम आदेश की अवधि नहीं बढ़ाई गई है।
अदालत ने कहा, ''आपकी अंतरिम जमानत केवल एक निश्चित अवधि के लिए थी और आपको आत्मसमर्पण कर देना चाहिए था। मैंने अभी फाइल पढ़ी है, और उसमें (अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने का) कोई आदेश नहीं है।''
भोजनावकाश से पहले के सत्र में सीबीआई के वकील ने कहा था कि जयदीप को इस तरह के किसी भी विस्तार के अनुरोध के लिए ''उपुयक्त समय सीमा के भीतर'' अदालत के सामने पेश होना चाहिए था।
न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा ने सीबीआई को विस्तृत सत्यापन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा, ''सीबीआई ने भी सत्यापन रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। कृपया विस्तृत सत्यापन रिपोर्ट दाखिल करें।''
अदालत ने सीबीआई के वकील से कहा, ''आपको मुझे यह बताना होगा कि क्या यह व्यक्ति इतना गंभीर रूप से बीमार है कि उसे समय विस्तार मिलना चाहिए। यदि नहीं, तो आपको मुझे एक स्पष्ट रिपोर्ट देनी होगी... कि यह मामला वास्तविक है या नहीं। क्या यह व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार है या नहीं।''
उच्च न्यायालय ने तीन जुलाई, 2024 को जयदीप सेंगर को अंतरिम जमानत दी थी, जिसे समय-समय पर आगे बढ़ाया गया।
कुलदीप सेंगर को उन्नाव पीड़िता के साथ बलात्कार का दोषी पाया गया और 20 दिसंबर, 2019 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
यह घटना 2017 की है। सेंगर ने पीड़िता को अगवा कर उसके साथ बलात्कार किया था, जबकि घटना के समय वह नाबालिग थी।
भाषा सुरेश माधव
माधव
1702 1733 दिल्ली