दिल्ली उच्च न्यायालय ने एसडीपीआई अध्यक्ष एमके फैजी को धनशोधन मामले में जमानत दी
अविनाश
- 16 Feb 2026, 09:32 PM
- Updated: 09:32 PM
नयी दिल्ली, 16 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से जुड़े कथित धनशोधन के मामले में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एम.के. फैजी को सोमवार को जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि "ठोस साक्ष्य" के अभाव में, फैजी का पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से मात्र जुड़ाव धन शोधन के अपराध के लिए पर्याप्त नहीं था।
यह देखते हुए कि वह 11 महीने से अधिक समय से जेल में थे, न्यायमूर्ति बंसल ने टिप्पणी की कि "मुकदमे की शुरुआत और अनुमानित समाप्ति के बिना उनका निरंतर कारावास सुनवाई-पूर्व दंड के बराबर होगा, जो संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अस्वीकार्य है"। संविधान का अनुच्छेद 21 त्वरित सुनवाई के अधिकार की गारंटी देता है।
अदालत ने पाया कि इस मामले में लगभग 90,000 पृष्ठों में विशाल दस्तावेज, 240 से अधिक गवाह, कई आरोपी, डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्य और कई वर्षों तक फैले जटिल वित्तीय लेनदेन शामिल हैं। उसने निष्कर्ष निकाला कि मुकदमे में काफी समय लगना तय है।
अदालत ने कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 45 की कठोरता को अनिश्चितकालीन हिरासत के लिए लागू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
एसडीपीआई की स्थापना 2009 में हुई थी और इसका मुख्यालय दिल्ली में है। एसडीपीआई पर अब प्रतिबंधित पीएफआई की राजनीतिक इकाई होने का आरोप है।
इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एसडीपीआई को पीएफआई की "राजनीतिक इकाई" बताया था। केंद्र सरकार ने सितंबर 2022 में पीएफआई को "गैरकानूनी संगठन" बताते हुए उस पर प्रतिबंध लगा दिया था।
ईडी ने दावा किया कि 54 वर्षीय फैजी न केवल पीएफआई के सदस्य थे, बल्कि इसके संस्थापक सदस्य भी थे।
अदालत ने 46 पृष्ठों के फैसले में कहा कि फैजी के खिलाफ ईडी का पूरा मामला 'साहचर्य के आधार पर दोष' पर आधारित था और जांच एजेंसी द्वारा 2025 में सातवीं पूरक शिकायत में उनका "देर से शामिल किया जाना", लेकिन आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत एनआईए द्वारा मूल मामले में शामिल न किया जाना, उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामले के अभाव को दर्शाता है।
इसमें यह भी पाया गया कि फैजी के 2009 से 2018 तक के जुड़ाव के दौरान पीएफआई एक वैध संगठन था, और पीएफआई पर सितंबर 2022 में प्रतिबंध लगने से बहुत पहले ही वह एसडीपीआई का हिस्सा बन गए थे, जो अब भी एक वैध राजनीतिक दल है।
अदालत ने कहा, "किसी संगठन से आवेदक का मात्र जुड़ाव या किसी संगठन में पद धारण करना, धन शोधन गतिविधियों में व्यक्तिगत संलिप्तता के विशिष्ट और ठोस सबूत के बिना, पीएमएलए की धारा 3 के तहत अपराध नहीं माना जा सकता।"
एजेंसी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अपनी जांच के सिलसिले में पिछले साल मार्च में दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर फैजी को गिरफ्तार किया था।
सुनवाई अदालत ने पिछले साल अगस्त में फैजी को मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था।
पीएफआई पर प्रतिबंध लगने से पहले, ईडी, राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और विभिन्न राज्य पुलिस बलों सहित कई जांच एजेंसियों द्वारा संगठन के खिलाफ एक साथ छापे मारे गए और प्रवर्तन कार्रवाई की गई थी।
भाषा प्रशांत अविनाश
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