शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर मंत्री ने कहा : सरकार चर्चा के माध्यम से उचित रुख अपनाएगी
अविनाश
- 16 Feb 2026, 08:47 PM
- Updated: 08:47 PM
तिरुवनंतपुरम, 16 फरवरी (भाषा) केरल की वाम सरकार ने सोमवार को कहा कि शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश का मुद्दा कई संवैधानिक जटिलताओं से जुड़ा है, इसलिए सरकार चर्चा के माध्यम से उचित रुख अपनाएगी।
सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए राज्य के कानून मंत्री पी राजीव ने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसका जवाब सिर्फ "हां या ना" में दिया जा सके। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय भी स्पष्ट कर चुका है कि वह सात संवैधानिक प्रश्नों का समाधान करने के बाद ही पुनर्विचार याचिकाओं पर विचार करेगा।
मंत्री ने कहा कि इसलिए, राज्य सरकार के पास अपना रुख स्पष्ट करने के लिए पर्याप्त समय है।
हालांकि, राजीव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सभी मतावलंबियों की आस्था की रक्षा करना है और वह हर आस्था के अनुयायियों के साथ खड़ी रहेगी। मंत्री ने कहा कि आस्था और सामाजिक सुधार साथ-साथ चलने चाहिए और दोहराया कि अदालत के समक्ष दिए गए हलफनामे में सरकार का यही रुख रहा है।
राजीव ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने पूर्व के हलफनामे में हिंदू मान्यताओं का गहन ज्ञान रखने वाले और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में अनुभव रखने वाले विद्वानों का एक आयोग गठित करने का सुझाव दिया था, ताकि महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे का अध्ययन किया जा सके, लेकिन न्यायालय ने इस पर विचार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार अपने सुझावों पर कायम है।
मंत्री ने कहा, ''यह ऐसा मुद्दा नहीं है जिसे जल्दी हल किया जा सके। इसमें कई संवैधानिक जटिलताएं हैं, जिनका समाधान समय और समझदारी से ही संभव है।''
उन्होंने कहा, ''संवैधानिक पहलुओं पर गौर करने के बाद हम उच्चतम न्यायालय के समक्ष सटीक पक्ष रखेंगे। हमारे पास पर्याप्त समय है।'' उन्होंने यह भी कहा कि सभी पहलुओं पर विस्तार से गौर करने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे वक्त आई है जब उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि नौ न्यायाधीशों की एक पीठ केरल के शबरिमला मंदिर सहित धर्मों और धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव से संबंधित कुछ याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू करेगी।
इस बीच, विपक्षी दल कांग्रेस और भाजपा ने माकपा नीत सरकार से शबरिमला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने का आग्रह किया।
कांग्रेस ने सरकार से इस मामले पर उच्चतम न्यायालय में संशोधित हलफनामा दाखिल करने का अनुरोध किया।
वामपंथी सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी डी सतीशन ने कहा कि राज्य सरकार को इस मामले में पहले दाखिल किए गए हलफनामे को ''सुधारने'' के लिए तैयार रहना चाहिए।
विधानसभा में विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि कई संगठनों को यह झूठा आश्वासन देकर 'ग्लोबल अयप्पा संगमम' में आमंत्रित किया गया था कि सरकार शबरिमला मंदिर में महिलाओं की प्रवेश पर अपना रुख बदलने वाली है।
पलक्कड़ में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि हलफनामे में संशोधन नहीं किया गया तो सरकार का ''दोहरापन'' उजागर हो जाएगा।
वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अतीत में कई मुद्दों पर पलटी मार चुकी है और महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर भी ऐसा ही कर सकती है।
भाजपा नेता ने कहा कि इसी सरकार ने अयप्पा संगमम का आयोजन किया था और वह यह अनुमान नहीं लगा सकते कि राज्य अंततः क्या रुख अपनाएगा। उन्होंने आरोप लगाया, ''सरकार चुनाव को ध्यान में रखते हुए कुछ भी कर सकती है।''
भाषा आशीष अविनाश
अविनाश
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