अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल ने सीमा पर चीन की दीर्घकालिक रणनीति पर चिंता जतायी
दिलीप
- 14 Feb 2026, 08:10 PM
- Updated: 08:10 PM
ईटानगर, 14 फरवरी (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के. टी. परनाइक ने शनिवार को दावा किया कि चीन भारत की सीमाओं पर दीर्घकालिक रणनीति अपना रहा है, जिसमें सीमा अवसंरचना, दोहरे उपयोग वाली बस्तियों और स्थानों के नाम बदलने जैसे उपायों के जरिए वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पार विमर्श को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य की संवेदनशील सीमा पर प्रतिरोधक क्षमता, स्थिरता और स्थायी नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा, विकास, कूटनीति और समुदाय सशक्तीकरण को समग्र राष्ट्रीय दृष्टिकोण के तहत साथ-साथ आगे बढ़ना होगा।
असम के तिनसुकिया जिले के दिनजान स्थित '2 माउंटेन डिवीजन' के मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी 'अरुणाचल प्रदेश- भारत की गतिशील सीमा' में मुख्य भाषण देते हुए राज्यपाल ने अरुणाचल प्रदेश को एक रणनीतिक बफर क्षेत्र के साथ-साथ विशाल मानवीय, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षमता वाली भूमि बताया।
राजभवन के एक बयान में यह जानकारी दी गयी है कि सुरक्षा और विकास पर अपने विचार साझा करते हुए परनाइक ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश जैसे सीमावर्ती राज्य में दोनों गहराई से जुड़े हुए हैं और एक के बिना दूसरा आगे नहीं बढ़ सकता।
उन्होंने कहा कि राज्य की चुनौतियां, चाहे बाहरी खतरे हों या आंतरिक विकास की कमी, सभी हितधारकों से एकजुट और समन्वित प्रतिक्रिया की मांग करती हैं।
सीमा समीकरणों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि म्यांमा और भूटान सीमाओं पर संस्कृति और सुरक्षा जटिल रूप से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा, ''भारत-म्यांमा सीमा, जो जंगलों और पहाड़ियों से होकर गुजरती है, मुक्त आवाजाही व्यवस्था (एफएमआर) के तहत सामाजिक रूप से खुली रही है, जिससे आजीविका और रिश्ते बने रहे। लेकिन इससे कमजोरियां भी पैदा हुईं, क्योंकि विद्रोही समूहों ने इन मार्गों का इस्तेमाल किया। इसी कारण भारत ने परंपरा और सुरक्षा के संतुलन के लिए इस व्यवस्था की समीक्षा शुरू की है।''
राज्यपाल ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की दृढ़ता और समावेशी व सतत विकास के निरंतर प्रयास अरुणाचल प्रदेश को एक रणनीतिक शक्ति केंद्र और उभरते आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करेंगे।
पूर्वी सैन्य कमान के पूर्व कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता (सेवानिवृत्त) ने अभियानगत वास्तविकताओं और चीन की रणनीतिक योजना का मुकाबला करने के व्यापक पहलुओं पर बात की।
वहीं, लेखक, सैन्य इतिहासकार और फिल्म निर्माता शिव कुनाल वर्मा ने क्षेत्र की वनस्पति, जीव-जंतु, पारिस्थितिकी पर्यटन और इसकी छिपी हुई संभावनाओं पर चर्चा की।
भाषा गोला दिलीप
दिलीप
1402 2010 ईटानगर