प्रधानमंत्री ने असम के मोरान में वायुसेना के विमानों के हवाई करतब देखे
पवनेश
- 14 Feb 2026, 04:40 PM
- Updated: 04:40 PM
(फोटो के साथ)
मोरान (असम), 14 फरवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ जिले में आपातकालीन लैंडिंग सुविधा (ईएलएफ) पर शनिवार को वायु सेना के लड़ाकू विमानों और परिवहन हेलीकॉप्टर के हवाई करतब देखे।
पूर्वोत्तर क्षेत्र में अपनी तरह की पहली 4.2 किलोमीटर लंबी यह ईएलएफ मोरान में विकसित की गई है, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री ने अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान किया।
बीस मिनट से अधिक समय के हवाई करतब के दौरान वायुसेना के पायलटों ने मोरान बाईपास स्थित ईएलएफ से सटीक उड़ान भरी और यहां उतरे।
अवरोधक के पीछे कतार में खड़े स्थानीय लोग इस कार्यक्रम को देखने के लिए काफी उत्साहित नजर आ रहे थे।
सबसे पहले सुखोई-30 एमकेआई और उसके बाद राफेल विमान ने उड़ान भरी। थोड़ी दूरी के साथ उड़ान भरने वाले ये दोनों विमान उड़ान भरने के बाद तुरंत मिशन या युद्ध में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
माल और यात्रियों दोनों के परिवहन के लिए डिजाइन वायुसेना के 'वर्कहॉर्स' एएन-32 विमान ने भी करतब दिखाया।
इसके बाद सुखोई-30 एमकेआई और राफेल के तीन-तीन विमानों के समूह ने तेजी से लगातार अंतराल में मोरान के आसमान में उड़ान भरी।
पायलटों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए, जिनमें से दो विमान हवाई पट्टी के ऊपर से निकल गए जबकि तीसरा विमान ईएलएफ पर उतरा। इसी तरह, तीन राफेल विमानों के समूह ने भी करतब दिखाए, जिनमें से दो विमान हवाई पट्टी के पास उड़ान भरते हुए गुजरे और तीसरा यहां उतरा।
विशेष हेलीकॉप्टर-आधारित अभियान (एसएचबीओ) और उन्नत हल्के हेलीकॉप्टरों (एएलएच) ने मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान का प्रदर्शन किया।
एसएचबीओ के तहत दो एएलएच हेलीकॉप्टर ईएलएफ पर उतरे और भारतीय वायु सेना की अभियानगत तैयारी का प्रदर्शन करते हुए कमांडो हेलीकॉप्टर से उतरकर अपनी-अपनी जगह तैनात हो गए।
कमांडो को उतारने के बाद, इन दोनों हेलीकॉप्टर ने तेजी से उड़ान भरी और दो अन्य हेलीकॉप्टर ने चिकित्सा निकास अभ्यास का प्रदर्शन किया।
प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल और एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह सहित अन्य अधिकारी इस दौरान मौजूद रहे।
इसके बाद मोदी भारतीय वायु सेना के सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से गुवाहाटी के लिए रवाना हुए।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने पहले कहा था कि किसी ईएलएफ पर इस तरह का यह पहला "विस्तृत" अभ्यास होगा, जिसमें करीब 16 विमान भाग ले रहे हैं।
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से मोरान बाईपास पर विकसित इस ईएलएफ को आपात स्थिति में सैन्य और नागरिक विमानों के उतरने व उड़ान भरने में मदद के लिए वायुसेना के समन्वय से विशेष रूप से बनाया गया है।
भाषा
खारी पवनेश
पवनेश
1402 1640 मोरान (असम)