तेलंगाना: ईडी ने सरोगेसी गिरोह मामले में फर्टिलिटी क्लिनिक की मालकिन को गिरफ्तार किया
दिलीप
- 13 Feb 2026, 09:56 PM
- Updated: 09:56 PM
नयी दिल्ली, 13 फरवरी (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय ने शुक्रवार को बताया कि सरोगेसी गिरोह चलाने से जुड़े धनशोधन मामले में तेलंगाना स्थित एक 'फर्टिलिटी क्लिनिक' की मालकिन एवं चिकित्सक को गिरफ्तार किया गया है।
एजेंसी के मुताबिक, चिकित्सक पर गरीब या किसी कारण संतानों को रखने में अक्षम माता-पिता से बच्चों को लेकर उन्हें सरोगेसी से जन्मे बच्चों के रूप में प्रस्तुत करने का आरोप है।
ईडी ने बताया कि हैदराबाद स्थित यूनिवर्सल सृष्टि फर्टिलिटी रिसर्च सेंटर की मालकिन डॉ. अथुलुरी नम्रता उर्फ पचीपल्ली नम्रता को बृहस्पतिवार को हिरासत में लिया गया, क्योंकि वह पूछताछ के दौरान 'टालमटोल कर रही थीं और उनका रवैया असहयोगात्मक' था।
संघीय एजेंसी ने एक बयान में कहा कि हैदराबाद के नामपल्ली स्थित एक स्थानीय अदालत ने आरोपी चिकित्सक को 26 फरवरी तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
ईडी के मुताबिक, नम्रता के खिलाफ धनशोधन का मामला हैदराबाद के गोपालपुरम पुलिस थाना में दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें उस पर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश, अवैध सरोगेसी और बाल तस्करी करने का आरोप लगाया गया है।
आरोप है कि महिला चिकित्सक 2014 से निःसंतान दंपतियों को सरोगेसी के नाम पर नवजात शिशु मुहैया करा रही थी। वह ''अपने क्लिनिक के कर्मचारियों और एजेंट के साथ मिलकर सरोगेसी गिरोह संचालित करती थी''।
पुलिस ने महिला चिकित्सक को गिरफ्तार किया था, लेकिन नवंबर 2025 में उसे इस मामले में जमानत मिल गई।
ईडी के मुताबिक, जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि डॉ. नम्रता ने सरोगेट मां के माध्यम से बच्चा दिलाने का वादा करके निःसंतान दंपतियों से भारी मात्रा में धनराशि एकत्र की थी।
एजेंसी ने कहा कि इस प्रक्रिया को वास्तविक दिखाने के लिए, उनके 'युग्मकों' को एकत्र करके एक सरोगेट मां में प्रतिरोपित करने का स्वांग रचा जाता था। हालांकि, बच्चे उन गरीब और कमजोर माता-पिता से प्राप्त किया गया था, जो बच्चों का पालन-पोषण करने में असमर्थ थे और गर्भपात कराना चाहते थे।
ईडी ने जांच में पाया कि एजेंट और उप-एजेंट का एक नेटवर्क गरीब और जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं की व्यवस्था करने के रैकेट में शामिल था। उन्हें पैसे का प्रलोभन देकर बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसे छोड़ने के लिए राजी किया जाता था।
बयान के मुताबिक, ''डॉ. नम्रता एक लड़की के लिए लगभग 3.5 लाख रुपये और एक लड़के के जन्म के लिए 4.5 लाख रुपये देती थीं। ये प्रसव विशाखापत्तनम स्थित उसके अस्पताल में होते थे, क्योंकि सिकंदराबाद स्थित उसके अस्पताल का लाइसेंस अधिकारियों द्वारा रद्द कर दिया गया था।''
ईडी ने कहा कि नगरपालिका अधिकारियों को भेजी गई जन्म रिपोर्ट में कथित तौर पर महिला चिकित्सक द्वारा हेराफेरी की जाती थी और उनमें जैविक माता-पिता के बजाय निःसंतान दंपतियों के नाम माता-पिता के रूप में दर्ज कराए जाते थे।
एजेंसी ने दावा किया कि महिला चिकित्सक के खिलाफ कई मामले दर्ज होने और अधिकारियों द्वारा उसका मेडिकल लाइसेंस निलंबित किए जाने के बावजूद वह फर्जी सरोगेसी गिरोह 'संचालित'कर रही है।
भाषा धीरज दिलीप
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