बांग्लादेश में बीएनपी बड़ी जीत की ओर अग्रसर; दो दशक बाद सत्ता में वापसी के लिए तैयार
दिलीप
- 13 Feb 2026, 07:08 PM
- Updated: 07:08 PM
(तस्वीरों के साथ)
ढाका, 13 फरवरी (भाषा) बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) देश के ऐतिहासिक संसदीय चुनावों के लिए शुक्रवार को जारी मतगणना के बीच शानदार जीत की ओर अग्रसर है और दो दशक के अंतराल के बाद सत्ता में वापसी के लिए तैयार है।
ये चुनाव ऐसे समय में हुए हैं, जब देश उथल-पुथल भरी राजनीतिक शून्यता, अस्थिरता और सुरक्षा की नाजुक स्थिति से गुजर रहा है। देश में पिछले साल अगस्त में छात्रों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अल्पसंख्यकों पर व्यापक पैमाने पर हमले हुए हैं। छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के कारण पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को 15 साल के शासन के बाद सत्ता से हटना पड़ा था।
यह लगभग स्पष्ट होता जा रहा है कि बीएनपी के शीर्ष नेता तारिक रहमान नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की जगह लेंगे और देश के प्रधानमंत्री बनेंगे। यूनुस के कार्यकाल में ढाका के नयी दिल्ली से रिश्तों में काफी गिरावट आई।
मीडिया में आयी खबरों के अनुसार, बीएनपी ने 300-सीट वाली संसद में 200 से अधिक सीट जीत ली हैं। पाकिस्तान की करीबी मानी जाने वाली कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी लगभग 75 सीट पर बढ़त बनाए हुए है या जीतती नजर आ रही है। हसीना की पार्टी अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
चुनाव में सात महिला उम्मीदवार चुनी गई हैं, जिनमें से अधिकांश बीएनपी से हैं। ढाका ट्रिब्यून की खबर के मुताबिक, सात महिला उम्मीदवारों में से सात बीएनपी से हैं। बीएनपी ने 10 सीट पर महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया था।
निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक परिणामों की अभी तक घोषणा नहीं की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत कुछ नेताओं ने चुनाव में बीएनपी के प्रदर्शन पर रहमान को बधाई दी। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''तारिक रहमान से बात करके मुझे बहुत खुशी हुई। मैंने उन्हें बांग्लादेश चुनावों में उनकी उल्लेखनीय जीत पर बधाई दी।''
उन्होंने कहा, ""मैंने बांग्लादेश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के उनके प्रयासों में अपनी शुभकामनाएं और समर्थन व्यक्त किया। गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध वाले दो घनिष्ठ पड़ोसी देशों के रूप में मैंने दोनों देशों की जनता की शांति, प्रगति और समृद्धि के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की पुष्टि की।"
सोशल मीडिया पर इससे पहले किये गए एक अन्य पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के प्रति अपना समर्थन जारी रखेगा।
उन्होंने कहा, "भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के प्रति अपना समर्थन जारी रखेगा। मैं आपके साथ मिलकर हमारे बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने और हमारे साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हूं।''
बीएनपी ने देश के आम चुनाव के नतीजे को मान्यता देने के लिए भारत और प्रधानमंत्री मोदी को शुक्रवार को धन्यवाद देते हुए उम्मीद जताई कि नयी सरकार के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंध मजबूत होंगे।
बीएनपी की स्थायी समिति के सदस्य और 2026 के चुनाव के मुख्य समन्वयक नजरुल इस्लाम खान ने 'पीटीआई-वीडियो' से कहा, ''हमारे नेता तारिक रहमान को बधाई देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हम धन्यवाद देते हैं। किसी लोकतांत्रिक देश द्वारा जनता के फैसले को मान्यता दिया जाना अच्छी बात है और नरेन्द्र मोदी ने ऐसा किया है। हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।''
हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के गिरने के बाद से भारत-बांग्लादेश संबंधों में गंभीर तनाव देखने को मिला है।
ढाका स्थित अमेरिकी दूतावास ने बांग्लादेश की जनता को ''सफल आम चुनाव'' के लिए अग्रिम बधाई दी और बीएनपी एवं रहमान की ''ऐतिहासिक जीत'' के लिए विशेष रूप से सराहना की।
दूतावास की सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया, "बांग्लादेश की जनता को सफल चुनाव के लिए और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी तथा तारिक रहमान को उनकी ऐतिहासिक जीत के लिए हार्दिक बधाई। संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों देशों के लिए समृद्धि और सुरक्षा के साझा लक्ष्यों को साकार करने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर है।"
इस चुनाव को बीएनपी और उसके पूर्व सहयोगी जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था।
बीएनपी पिछली बार 2001 से 2006 के बीच सत्ता में रही थी। उस समय जमात उसकी महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टी थी और उसके दो नेता मंत्री के रूप में कार्यरत थे।
बांग्लादेश में जटिल 84-सूत्री सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह के साथ-साथ 13वां आम चुनाव कराया गया। सुधार पैकेज को 'जुलाई राष्ट्रीय घोषणापत्र' के नाम से भी जाना जाता है।
जमात ने इन चुनावों के दौरान ''असामान्य देरी'' एवं ''परिणामों में हेरफेर'' के आरोप लगाए हैं तथा चेतावनी दी है कि अगर जनता का जनादेश ''छीन लिया गया'', तो वह एक बड़ा आंदोलन करेगी।
जमात के सहायक महासचिव अहसानुल महबूब जुबैर ने निर्वाचन आयोग भवन में शुक्रवार सुबह पत्रकारों से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि मतगणना अधिकारी एक ''विशेष पार्टी'' के पक्ष में परिणामों में जानबूझकर देरी कर रहे हैं।
जुबैर ने कहा, "हमारे शीर्ष नेताओं ने जिन सीट पर चुनाव लड़ा, वहां मतदान एजेंटों को दी गई हस्ताक्षरित शीट के अनुसार, परिणाम रात 8 बजे या 9 बजे तक घोषित कर दिए जाने चाहिए।"
पिछले साल अंतरिम सरकार के प्रमुख यूनुस के नेतृत्व में गठित 11 दलों के दक्षिणपंथी गठबंधन में जमात की प्रमुख सहयोगी, नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) ने भी विशेष रूप से ढाका की कई सीट पर "परिणामों में हेरफेर और सुनियोजित धोखाधड़ी" के आरोप लगाए हैं।
निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को घोषणा की कि चुनावों में मतदान प्रतिशत 59.44 रहा। आयोग ने मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की उपस्थिति में हेराफेरी के आरोपों को भी खारिज कर दिया।
निर्वाचन आयुक्त ब्रिगेडियर जनरल (सेवानिवृत्त) अबुल फजल मोहम्मद सनाउल्लाह ने शुक्रवार को कहा कि चुनाव में लोगों की स्वतःस्फूर्त और व्यापक भागीदारी ने साबित कर दिया कि 'हम एक राष्ट्र के रूप में अंततः विजयी हैं'।
उन्होंने कहा, "राष्ट्र के प्रति हमारी केवल एक ही प्रतिबद्धता थी: निष्पक्ष चुनाव कराना। हमने इसे सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया है। इस विशाल आयोजन में स्वेच्छा से भाग लेने के लिए हम देश की जनता के प्रति अत्यंत आभारी हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि अंततः एक राष्ट्र के रूप में हमारी ही जीत हुई है।"
जिन 300 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव हुए, उनमें से 299 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए 2,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें कई निर्दलीय उम्मीदवार भी शामिल थे।
एक उम्मीदवार की मृत्यु के कारण एक सीट पर मतदान स्थगित कर दिया गया।
निर्वाचन आयोग ने चुनावों के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी, जिसमें लगभग 10 लाख सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था - जो देश के चुनावी इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है।
भाषा
प्रशांत दिलीप
दिलीप
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