न्यायालय ने राजाजी अभयारण्य से गुजरने वाले लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग के सुदृढ़ीकरण को दी मंजूरी
संतोष
- 12 Feb 2026, 07:56 PM
- Updated: 07:56 PM
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपने पूर्व के स्थगन आदेश में संशोधन करते हुए उत्तराखंड में 11.5 किलोमीटर लंबी लालढांग-चिल्लारखाल सड़क के निर्माण की अनुमति दे दी। इससे राज्य के 18 दूर दराज के गांवों के हजारों लोगों को लाभ होगा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने उस सड़क पर वाणिज्यिक वाहनों के चलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसमें चमारिया मोड़ से सिगगडी सोट क्षेत्र तक का 4.5 किलोमीटर का पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील खंड शामिल है और यह जिम कॉर्बेट बाघ अभयारण्य और राजाजी बाघ अभयारण्य को जोड़ने वाला एकमात्र कार्यात्मक वन्यजीव गलियारा है।
पीठ ने पर्यावरण मानदंडों के उल्लंघन के कारण सड़क परियोजना पर रोक लगाने वाले अपने 11 जनवरी, 2023 के आदेश को संशोधित करते हुए कहा, ''दूरदराज के गांवों के लोग देश में हो रहे विकास कार्यों से लाभान्वित होने के हकदार हैं।''
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने पीठ को आश्वासन दिया कि सड़क के सुदृढ़ीकरण से वाणिज्यिक वाहनों के लिए कोटद्वार और हरिद्वार के बीच की दूरी 65 किलोमीटर कम हो जाएगी, फिर भी राज्य सरकार परियोजना को अनुमति देने के लिए अदालत द्वारा लगाई जाने वाली किसी भी शर्त का पालन करेगी।
उन्होंने पीठ को भरोसा दिया कि वाणिज्यिक वाहन उक्त सड़क पर नहीं चलेंगे, बल्कि वे अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए उत्तर प्रदेश से गुजरने वाले रास्ते का इस्तेमाल करेंगे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह जंगल की वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण के लिए आवश्यक है और अदालत 11.5 किलोमीटर के इस खंड पर भारी मालवाहक ट्रकों और डंपरों को चलने की अनुमति नहीं देगी।
मामले में हस्तक्षेप याचिका दाखिल करने वाले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)के सांसद अनिल बलूनी ने अधिवक्ता बंसुरी स्वराज के माध्यम से बताया कि वर्तमान में यह कच्ची सड़क और इसका सुदृढ़कीरण क्षेत्र के 18 दूरस्थ गांवों में रहने वाले 40,000 से अधिक ग्रामीणों के लिए आवश्यक है।
स्वराज ने बलूनी की ओर से कहा, ''मानसून के मौसम में सड़क बह जाने के कारण इन क्षेत्रों के लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने वन्यजीवों को एक तरफ से दूसरी तरफ आने-जाने की सुविधा देने के लिए 400 मीटर का ऊपरगामी गलियारा बनाने की योजना बनाई है।''
पीठ ने रेखांकित किया कि ग्रामीणों को बेहतर आवागमन प्रदान करने के लिए पक्की सड़क आवश्यक है। उसने सड़क पर बसों के चलने की अनुमति देने पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि यदि इससे एक अपवाद बनता है, तो अन्य लोग भी इसकी मांग करेंगे।
अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल की याचिका पर जनवरी 2023 का मूल आदेश आया था। बंसल ने कहा कि उनकी चिंता केवल वाणिज्यिक वाहनों के संबंध में थी, जिससे क्षेत्र के वन्यजीव प्रभावित होंगे और उन्होंने ग्रामीणों के लिए पक्की सड़क के निर्माण का कभी विरोध नहीं किया।
पीठ ने इस तथ्य पर संज्ञान लिया कि राज्य सरकार ने पहले इस मार्ग से प्रतिदिन 150 वाणिज्यिक वाहनों को गुजरने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा था, जिसका याचिकाकर्ता और अन्य विशेषज्ञ निकायों ने विरोध किया था। पीठ ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इस मार्ग पर कोई भी वाणिज्यिक वाहन न चले।
भाषा धीरज संतोष
संतोष
1202 1956 दिल्ली