आत्मनिर्भर भारत: असम राइफल्स अपने श्वान दस्ते में अब भारतीय नस्ल के कुत्तों को शामिल करेगा
नरेश
- 12 Feb 2026, 07:42 PM
- Updated: 07:42 PM
(त्रिदीप लहकर)
जोरहाट (असम), 12 फरवरी (भाषा) केंद्र सरकार के स्वदेशीकरण के आह्वान को मजबूती प्रदान करते हुए असम राइफल्स अपने विभिन्न अभियानों को अंजाम देने के लिए अपने दस्ते में भारतीय नस्ल के कुत्तों को शामिल करने की योजना बना रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
'असम राइफल्स श्वान प्रशिक्षण केंद्र' के कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट कर्नल आलोक पालेई ने यहां 'पीटीआई-भाषा' को दिए एक साक्षात्कार में बताया कि 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत सबसे पुराने अर्धसैनिक बल ने पहले ही एक प्रायोगिक परियोजना के तहत 'तंगखुल हुई' नस्ल के कुत्तो को अपने 'श्वान दस्ते' में शामिल कर लिया है। उन्होंने बताया कि बल अप्रैल से कोम्बाई नस्ल को भी शामिल करने की योजना बना रहा है।
उन्होंने कहा, ''केंद्रीय गृह मंत्री (अमित शाह) ने हमेशा हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की वकालत की है। वे सभी बलों के श्वान दस्तों में भारतीय नस्ल के कुत्तों की संख्या बढ़ाने की इच्छा रखते हैं। तब से हम अपने उद्देश्यों के लिए एक स्वदेशी नस्ल की पहचान करने पर काम कर रहे हैं।"
पालेई ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पिछले साल इस संबंध में एक निर्देश भी जारी किया था, जिसके बाद असम राइफल्स ने बल में शामिल करने के लिए और अधिक स्थानीय नस्ल के कुत्तों की तलाश शुरू कर दी।
उन्होंने कहा, ''वर्तमान में हमारे पास चार नस्ल हैं-लैब्राडोर, जर्मन शेफर्ड, बेल्जियन मैलिनोइस और तंगखुल हुई। हमने 2022 में एक प्रायोगिक परियोजना के तहत तंगखुल हुई नस्ल के छह कुत्तों को शामिल किया। ये कुत्ते रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिहाज से अत्यधिक सक्षम हैं और सभी मादक पदार्थों की पहचान में लगे हुए हैं।''
अधिकारी ने बताया कि तंगखुल हुई नस्ल मणिपुर के उखरुल जिले में पाई जाती है और यह एक घरेलू नस्ल है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से शिकार के लिए किया जाता है।
कोम्बाई नस्ल के बारे में पालेई ने कहा कि यह तमिलनाडु में पाई जाती है और स्वदेशी नस्ल से जुड़े आह्वान के बाद इस प्रकार के कुत्तों को सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में शामिल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "हम मूल नस्ल की पहचान करने की प्रक्रिया में हैं। पहले तीन साल प्रजनन के लिए होंगे। नस्ल की पहचान से लेकर अंतिम रूप से शामिल करने तक विभिन्न चरण हैं। पहले चरण के रूप में, हम अप्रैल में कोम्बाई नस्ल के दो नर और आठ मादा कुत्तों को शामिल करेंगे।''
पालेई ने बताया कि तांगखुल हुई और कोम्बाई नस्ल के कुत्तों को मार्च 2027 तक असम राइफल्स के श्वान दस्ते में पूरी तरह से शामिल किए जाने की संभावना है।
उन्होंने कहा, ''यह केंद्र असम राइफल्स का एकमात्र प्रशिक्षण केंद्र है। कोम्बाई नस्ल के कुत्तों को भी इसी केंद्र में प्रशिक्षित किया जाएगा।''
असम राइफल्स में कुत्तों की स्वीकृत संख्या 344 है, लेकिन वर्तमान में उसके पास 253 कुत्ते हैं। लेफ्टिनेंट कर्नल ने बताया कि ये कुत्ते पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के विभिन्न बटालियनों में तैनात हैं।
उन्होंने बताया कि असम राइफल्स के पास वर्तमान में 1,200 से अधिक प्रशिक्षित श्वान प्रशिक्षक (हैंडलर)हैं, जबकि प्रत्येक कुत्ते की देखभाल और रखरखाव के लिए 9-10 लोगों की आवश्यकता होती है।
पालेई ने बताया कि जोरहाट जिले में स्थित असम राइफल्स श्वान प्रशिक्षण केंद्र में 104 कुत्ते और 174 प्रशिक्षक हैं।
पालेई ने बताया कि केंद्र अपने कर्मचारियों के लिए तीन और कुत्तों के लिए दो पाठ्यक्रम आयोजित कर रहा है। कर्मचारियों के लिए तीन पाठ्यक्रम हैं: बुनियादी श्वान प्रशिक्षक पाठ्यक्रम (23 सप्ताह), श्वान 'फर्स्ट एड' पाठ्यक्रम (चार सप्ताह) और रिफ्रेशर पाठ्यक्रम (दो सप्ताह)। कुत्तों के लिए बुनियादी आज्ञापालन पाठ्यक्रम (12 सप्ताह) और रिफ्रेशर पाठ्यक्रम (दो सप्ताह) उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा, ''फिलहाल हमारे बुनियादी 'श्वान प्रशिक्षक कार्यक्रम' का 42वां बैच चल रहा है। इसके बाद, सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षकों को बेंगलुरु स्थित 'सीआरपीएफ डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग स्कूल' में 'मास्टर ट्रेनर पाठ्यक्रम' के लिए चयनित किया जाता है, जो 24 सप्ताह का होता है। हम अपने कर्मचारियों को मेरठ स्थित रिमाउंट वेटरनरी कोर सेंटर (आरवीसी) में छह महीने के पाठ्यक्रम के लिए भी भेजते हैं।"
भाषा संतोष नरेश
नरेश
1202 1942 जोरहाट