औद्योगिक संबंध संहिता संशोधन विधेयक संसद में पारित; सरकार ने कहा, न्यूनतम वेतन की देती है गारंटी
सुभाष
- 12 Feb 2026, 07:28 PM
- Updated: 07:28 PM
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) संसद ने बृहस्पतिवार को 'औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026' को पारित कर दिया और सरकार ने संहिता के संबंध में विपक्ष की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन की गारंटी देती है।
राज्यसभा में, विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा जवाब दिये जाने के बाद इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
हालांकि, श्रम मंत्री के जवाब से पहले ही श्रम संहिता के प्रवाधानों के प्रति विरोध जताते हुए कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने सदन से वॉक आउट किया।
उच्च सदन में विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मांडविया ने कहा, ''इस श्रम संहिता में हमने सुनिश्चित किया है कि संवैधानिक सुरक्षा मानकों के साथ न्यूनतम वेतन मानक तय करेंगे। देश में महिलाओं और पुरुषों को समान वेतन पाने का अधिकार होगा।''
मंत्री ने कहा कि औद्योगिक संबंध संहिता तो 2020 में ही पारित हो चुकी है और ढाई महीने पहले लागू भी हो चुकी है, लेकिन अधिकतर सदस्यों ने चर्चा में संहिता की ही बात की है और इसे कामगार विरोधी बताया है।
मांडविया ने कहा, ''हम तो एक छोटा सा संशोधन लाए हैं। यह संशोधन केवल कानूनी स्पष्टता के लिए सदन में लाया गया।''
औद्योगिक सबंध संहिता, 2020 ने जिन कानूनों की जगह ली है, उनमें ट्रेड यूनियन्स अधिनियम, 1926, औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 शामिल हैं, जो श्रमिक संघों, औद्योगिक रोजगार और औद्योगिक विवादों से संबंधित हैं।
मांडविया ने कहा, ''हम श्रमिकों के हित में एक संहिता लाए हैं। तीन कानूनों को इसमें शामिल किया गया। उन्हें निरस्त करने का अधिकार सरकार को है और निरस्त कर दिया गया है, लेकिन कानून में भी यह बात शामिल हो, इसलिए संशोधन विधेयक लाया गया।''
संहिता के विरोध में देशभर में हड़ताल को लेकर विपक्ष के कुछ सदस्यों की टिप्पणियों पर मंत्री ने कहा, ''चंद श्रमिक संगठनों ने विरोध किया होगा, 17 राष्ट्रीय संगठनों ने तो बंद को अनुचित बताया है। श्रमिकों के हित में यह संहिता लाई गई है।''
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने भी बंद की हकीकत देखी होगी। उन्होंने कहा, ''देश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और सच के साथ रहेगा। आपकी (विपक्ष की) बात सच होती तो देश सड़क पर होता।''
मांडविया ने आरएसपी सांसद एन. के. प्रेमचंद्रन के आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि वामपंथी दलों के सदस्यों ने इस संहिता के खिलाफ जोर-शोर से बात रखी है।
उन्होंने कहा, ''मैंने राज्य में ईएसआईसी का एक मेडिकल कॉलेज दिया। केरल में इनकी सरकार है। राज्य सरकार ने मेडिकल कॉलेज चालू करने के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र तक नहीं दिया। इन्हें श्रमिकों के बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है।''
उन्होंने कहा कि इस सरकार का उद्देश्य उद्योग भी चलाना है और कामगारों के हितों की सुरक्षा भी करनी है क्योंकि उद्योग नहीं होंगे तो रोजगार नहीं होगा।
मांडविया ने कहा कि श्रम संहिता में हर युवा को नियुक्ति पत्र देने की गारंटी है ताकि भविष्य में नियोक्ता यह नहीं कह सके कि यह हमारा कर्मचारी नहीं है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को केवल विरोध के लिए आलेाचना नहीं करनी चाहिए और उनके अच्छे विचारों का सरकार स्वागत करेगी।
मांडविया ने कहा कि औद्योगिक संबंध संहिता लागू हुए ढाई महीने हो चुके हैं और इस दौरान दो सर्वेक्षण किए गए। पहले सरकारी सर्वेक्षण में 60 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों ने विश्वास जताया है कि संहिता लागू होने से नियम शर्तें स्पष्ट हुई हैं, नौकरी की सुरक्षा मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि 60 प्रतिशत संविदा कर्मियों और गिग कर्मियों ने सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलने का विश्वास जताया है।
मांडविया ने कहा कि भारत दुनिया में पहला देश है जिसने गिग कर्मियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए चिंता की।
मंत्री ने कहा कि एक निजी संस्था के दूसरे सर्वेक्षण में अधिकतर श्रमिकों ने माना कि छोटे शहरों में रोजगार मजबूत हो रहा है और महिलाओं के लिए अवसरों में तुलनात्मक बढ़ोतरी हो रही है।
उन्होंने कहा कि 2014 में केवल 25 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा मिलती थी जो आबादी का 19 प्रतिशत थी, लेकिन आज 19 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत नागरिकों को सामाजिक सुरक्षा मिल रही है।
उन्होंने कहा कि 2028 तक 100 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा की प्रतिबद्धता के साथ मोदी सरकार काम कर रही है।
मांडविया ने देश में बेरोजगारी के विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार 2017-18 में बेरोजगारी दर छह प्रतिशत थी जो आज घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई है।
विधेयक को इससे पहले आज ही लोकसभा में चर्चा के बाद पारित किया गया था।
भाषा माधव सुभाष
सुभाष
1202 1928 संसद