तृणमूल सांसद ने बंगाली प्रवासी मजदूरों के साथ भेदभाव रोकने के लिए सरकार से हस्तक्षेप की मांग की
सुभाष
- 12 Feb 2026, 09:14 PM
- Updated: 09:14 PM
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद ने देश के विभिन्न हिस्सों से 24,000 से अधिक बंगाली मजदूरों को वापस पश्चिम बंगाल भेजे जाने का बृहस्पतिवार को दावा करते हुए केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान ने लोकसभा में शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि बांग्ला भाषी मजदूरों के पास वैध प्रमाण पत्र होने के बावजूद देशभर में उन्हें बांग्लादेशी कहकर बदनाम किया जा रहा है।
पठान ने दावा किया, ''उन्हें मनमाने ढंग से गिरफ्तार कर घरों और कार्यस्थलों से बाहर निकाला जा रहा है। बांग्ला भाषा को बदनाम करने की कोशिश अब सरकारी अधिकारियों द्वारा भी की जा रही है...जबकि बांग्ला संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाओं में शामिल है। और 2024 में केंद्र सरकार ने इसे शास्त्रीय भाषा का दर्जा भी दिया है।''
उन्होंने दावा किया कि बंगाली प्रवासी मजदूरों के खिलाफ चलाये जा रहे इस ''घृणित अभियान के कारण अब तक 24,000 से अधिक बंगाली मजदूरों को वापस बंगाल भेजा गया है।''
तृणमूल कांग्रेस सांसद ने सरकार से अनुरोध किया कि वह बंगाली प्रवासी मजदूरों के साथ हो रहे ''भेदभाव'' को रोकने के लिए तत्काल हस्तक्षेप करे।
वहीं, कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में सामाजिक सुरक्षा पेंशन अक्टूबर से नहीं दी जा रही है और इसके लिए बजट नहीं होने की बात कही जाती है।
तिवारी ने कहा कि चंडीगढ़ में सबसे कम सामाजिक सुरक्षा पेंशन है जो एक हजार रुपये है, जबकि पंजाब में 1,500 रुपये है और हरियाणा में 3,500 रुपये है।
उन्होंने सरकार से सैनिकों को दी जाने वाली दिव्यांगता पेंशन पर आयकर छूट बहाल करने की भी मांग की।
तिवारी ने कहा, ''चंडीगढ़ में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक रहते हैं जिन्होंने देश की सेवा बड़ी ही वीरता के साथ की और अपनी जान जोखिम में डालकर देश की सीमाओं की रक्षा की।''
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वित्त विधेयक 2026 के अनुच्छेद 108 में सेवा भत्ता और दिव्यांगता भत्ता पर आयकर छूट केवल उन सैनिकों तक सीमित कर दी गई है, जिन्हें सेवा से अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि विधेयक में उन सैनिकों को दिव्यांगता पेंशन से मिलने वाले कर लाभ को समाप्त करने का प्रस्ताव किया गया है, जिन्होंने देश की सेवा की है और दिव्यांग होने के कारण अवकाश प्राप्त हुए हैं।
कांग्रेस सांसद ने कहा, ''यह संविधान के अनुच्छेद 14 का स्पष्ट उल्लंघन है।''
तिवारी ने सरकार से आग्रह किया कि जब लोकसभा में वित्त विधेयक 2026 पर चर्चा हो, तो सैनिकों को दिव्यांगता पेंशन पर आयकर छूट बहाल की जाए।
यह विधेयक 9 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र के अगले चरण में चर्चा और पारित किये जाने के लिए सदन में लाया जाएगा।
कांग्रेस के ही प्रद्युत बोरदोलोई ने दावा किया कि 2017 से असम में 1,300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में वन खत्म हो गया।
उन्होंने असम में 'रैट होल' कोयला खनन किये जाने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा इसे अवैध घोषित किये जाने के बावजूद राज्य में यह फिर से बेरोक-टोक शुरू हो गया है।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि असम और मेघालय सरकार इसे बढ़ावा दे रही है। उन्होंने भारत सरकार से इस सिलसिले में आवश्यक कदम उठाने और कार्रवाई करने का आग्रह किया।
भाजपा के प्रवीण पटेल ने देश के अन्य राज्यों की तरह ही उत्तर प्रदेश में भी संविधान के 74वें संशोधन को पूरी तरह से लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे नगर निगम के महापौर, पार्षद को जन प्रतिनिधि का दर्जा प्राप्त होगा तथा उन्हें वेतन व भत्ता मिल सकेगा।
भाजपा के मुकेश राजपूत ने किसानों को आलू का लाभकारी मूल्य देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि जिस तरह मसाला बोर्ड की स्थापना करने से मसाला उत्पादक किसानों की दशा में सुधार हुआ और हाल में मखाना बोर्ड स्थापित होने से मखाना किसानों को फायदा पहुंच रहा है, उसी तरह आलू विकास बोर्ड की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया जाए।
समाजवादी पार्टी के उत्कर्ष वर्मा ने गन्ना किसानों को खेती में पेश आ रहीं समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले कई वर्षों से इसकी खेती की लागत बढ़ रही है।
उन्होंने गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग की।
राकांपा (शप) के अमोल कोल्हे ने कहा कि उनके निर्वाचन क्षेत्र शिरूर के अलावा महाराष्ट्र के नासिक और सतारा जिले में तेंदुए से जुड़ी बहुत गंभीर समस्या है।
उन्होंने तेंदुए के हमलों से निपटने के लिए वन्य जीव अधिनियम,1972 में सुधार लाने की मांग की। उन्होंने कहा, ''तेंदुए को अनुसूची 1 से निकाल कर अनुसूची 2 में लाया जाए। इस सिलसिले में महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेजा है। उस पर केंद्र त्वरित कदम उठाए।''
तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल ने कहा कि बंगाल में जूट उद्योग में 2.5 लाख श्रमिक काम करते हैं और उन पर लाखों परिवार आश्रित हैं, लेकिन इसकी खपत में कमी से एक गंभीर सामाजिक-आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की नयी खरीद नीतियों में गैर जूट बैग की मंजूरी ने सीधे तौर पर जूट बैग की मांग को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि पैकेजिंग में प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग ने जूट उद्योग को प्रभावित किया है।
उन्होंने केंद्र से अनिवार्य जूट पैकेजिंग कानून का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग की।
भाषा सुभाष
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