दिल्ली:अदालत ने जीपीआई के कार्यकारी निदेशक पर हमले के मामले में उद्योगपति बीना मोदी को तलब किया
प्रशांत
- 12 Feb 2026, 06:23 PM
- Updated: 06:23 PM
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने उद्योगपति बीना मोदी और वरिष्ठ वकील ललित भसीन को वर्ष 2024 में बोर्ड की बैठक के दौरान गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया (जीपीआई) के कार्यकारी निदेशक समीर मोदी पर कथित हमले के संबंध में तलब किया है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट अनीजा बिश्नोई ने आरोप पत्र में उल्लिखित अपराधों का संज्ञान लेते हुए समीर मोदी पर हमला करने के आरोपी सभी तीन लोगों को समन जारी किया, जिनमें बीना मोदी के निजी सुरक्षा अधिकारी सुरेंद्र प्रसाद भी शामिल हैं।
पुलिस ने एक मार्च, 2025 को दाखिल आरोपपत्र में प्रसाद को आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत होने की बात कही थी।
पुलिस को हालांकि बीना मोदी और भसीन के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इसके बाद समीर मोदी ने उनके खिलाफ भी संज्ञान लेने का अनुरोध करते हुए विरोध याचिका दायर की।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 30 मई, 2024 को समीर मोदी कार्यकारी निदेशक के रूप में बोर्ड की बैठक में भाग लेने के लिए जीपीआई कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रसाद ने बीना मोदी के निर्देश पर उन्हें बोर्ड कक्ष में प्रवेश करने से रोका और जब उन्होंने बैठक में शामिल होने पर जोर दिया तो उन पर हमला किया।
शिकायत में कहा गया था कि उनकी दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली टूट गई थी जिसके कारण उन्हें शल्य चिकित्सा की आवश्यकता पड़ी। चिकित्सा-कानूनी प्रमाण पत्र में चोट को गंभीर बताया गया था। घटना की सीसीटीवी फुटेज भी एकत्रित सामग्री का हिस्सा थी।
समीर मोदी ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने बीना मोदी को हमले के बारे में बताया, तो उन्होंने उन्हें बैठने के लिए कहकर बैठक जारी रखने की अनुमति दी और भसीन ने भी उनकी चोटों के बावजूद बैठक जारी रखने पर जोर दिया।
अदालत ने 10 फरवरी के आदेश में कहा, ''आपराधिक न्यायशास्त्र का यह स्थापित सिद्धांत है कि बीएनएसएस की धारा 210 (मजिस्ट्रेट द्वारा अपराधों का संज्ञान) के तहत कार्रवाई करते समय न्यायालय अपराध का संज्ञान लेता है, न कि आरोपी का। इसलिए, न्यायालय आरोपपत्र में उल्लिखित जांच अधिकारी की राय से बाध्य नहीं है।''
अदालत ने जांच अधिकारी के इस दावे को खारिज कर दिया कि समीर मोदी को औपचारिक रूप से आमंत्रित नहीं किया गया था। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी का यह जवाब स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि यदि एक बार के लिए यह मान भी लिया जाए कि शिकायतकर्ता को आमंत्रित नहीं किया गया था, तब भी उसे रोकने के लिए उसको गंभीर चोट पहुंचाना गैरकानूनी है।
अदालत ने प्रसाद के बयान और सीसीटीवी फुटेज में विरोधाभास भी पाया। अदालत ने कहा कि परिस्थितियों से साजिश या साझा इरादे का अनुमान लगाया जा सकता है।
अदालत ने आरोपियों को पेश होने की तारीख सात मई तय की है।
भाषा
संतोष प्रशांत
प्रशांत
1202 1823 दिल्ली