एआई आधारित डीप फेक और फर्जी वीडियो के अनियंत्रित प्रसार पर रोक की मांग उठी रास में
माधव
- 12 Feb 2026, 03:44 PM
- Updated: 03:44 PM
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित डीप फेक और फर्जी वीडियो के अनियंत्रित प्रसार पर चिंता जताते हुए राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस के राजीव शुक्ला ने कहा कि इसकी रफ्तार पर लगाम कसने के लिए अत्यंत कड़े कदम उठाने होंगे अन्यथा लोकतंत्र की विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाएगी।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए शुक्ला ने कहा कि आज एक आम व्यक्ति भी अपने मोबाइल फोन पर ऐप डाउनलोड कर किसी की भी आवाज और उसके हावभाव की नकल कर सकता है।
उन्होंने कहा ''इस तरह बनाए गए वीडियो इतने वास्तविक लगते हैं कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। इससे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और समाज की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।''
शुक्ला ने कहा ''मेरे साथ भी यह हो चुका है। कल पाकिस्तानी टीवी चैनलों ने विश्व कप क्रिकेट को लेकर मेरे एक बयान में दो गलत लाइनें अपनी ओर से जोड़ दीं। मुझे इसका खंडन करना पड़ा।''
उन्होंने कहा ''पिछले कुछ समय में मैंने देखा कि चुनाव में राजनीतिक नेताओं के डीप फेक से बनाए गए वीडियो, उनके बयान जारी किए गए। महिलाओं के डीप फेक के जरिये अश्लील वीडियो बनाए गए। यह सब और कुछ नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने का प्रयास है। ''
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि डीप फेक से बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते हैं और पकड़ में देर से आते हैं। उन्होंने कहा कि बाद में खंडन करने से नुकसान की कोई भरपाई नहीं होती है।
शुक्ला ने कहा ''हमारे यहां कोई ऐसी नोडल व्यवस्था नहीं है जो इसे तत्काल पकड़ सके। कहीं कोई सुनवाई भी नहीं होती। आम आदमी तो बुरी तरह परेशान हो जाता है।''
उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि डीप फेक की पहचान के लिए एक राष्ट्रीय एआई निर्मित विषय सामग्री निगरानी एजेंसी बनाई जाए, प्लेटफार्म के लिए अनिवार्य 'वाटर मार्किंग और डिस्क्लोजर नियम'' बनें, महिलाओं के लिए सख्त और अलग श्रेणी का कानून बने तथा युवाओं के बचाव के लिए डिजिटल साक्षरता अभियान चलाया जाए।
शून्यकाल में ही भाजपा की दर्शना सिंह ने चीता परियोजना के उत्तर प्रदेश में विस्तार की मांग की। उन्होंने कहा कि चीतों को 1952 में विलुप्त घोषित कर दिया गया था। लेकिन मध्यप्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीते लाए गए और अब उनकी संख्या भी बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का वन्य जीव संरक्षण का इतिहास पुराना और सफल रहा है। इसे देखते हुए प्रदेश में चीते के संरक्षण की संभावना उज्ज्वल है।
शून्यकाल में भाजपा की सीमा द्विवेदी, माया नरोलिया, डॉ मेधा विश्राम कुलकर्णी, मनन कुमार मिश्रा, अरुण सिंह, डॉ संगीता बलवंत, डॉ भीम सिंह, बीजद के निरंजन बिशि, मानस रंजन मंगराज, माकपा के जॉन ब्रिटास और एमएनएफ के के वेंलेल्वना ने भी आसन की अनुमति से लोक महत्व से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए।
भाषा मनीषा माधव
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