दूरदर्शन की पूर्व समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का निधन
पवनेश
- 12 Feb 2026, 09:54 PM
- Updated: 09:54 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 12 फरवरी (भाषा) दूरदर्शन की पूर्व समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का बृहस्पतिवार को यहां निधन हो गया। वह 71 वर्ष की थीं।
वह 1980 और 1990 के दशक में टीवी समाचार जगत के सबसे जाने-माने चेहरों में से एक थीं और जिनकी शांत शैली आज के टेलीविजन समाचार बुलेटिन के शोरगुल से बिल्कुल अलग थी।
माहेश्वरी 1976 से लेकर 2005 तक टीवी समाचारों का जाना-पहचाना चेहरा थीं। उनके साथ सलमा सुल्तान, मीनू तलवार, शम्मी नारंग, गीतांजलि अय्यर, नीति रविंद्रन और अन्य भी थीं। उनका नाम सुनते ही भारत के प्रसारण जगत और उसके श्वेत-श्याम से रंगीन प्रसारण में परिवर्तन की यादें ताजा हो जाती हैं। उस समय प्रसारण दिन में कुछ घंटों तक ही सीमित होता था और देखने के लिए केवल एक ही चैनल होता था।
माहेश्वरी के निधन की जानकारी सबसे पहले उनके सह-समाचार वाचक और मित्र शम्मी नारंग ने दी। उनके निधन पर उनके सहयोगियों, दोस्तों, कांग्रेस और पुराने दर्शकों ने शोक व्यक्त किया और उनकी शांत, सौम्य और विशिष्ट ''सीधा पल्ला'' साड़ी को याद किया।
नारंग ने 'एक्स' और इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया, ''मुझे यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि दूरदर्शन में मेरी पूर्व सह-समाचार प्रस्तोता सरला माहेश्वरी का निधन हो गया है... वह न केवल दिखने में सुंदर थीं बल्कि हृदय से भी कहीं अधिक उदार थीं, भाषा पर उनकी अद्भुत पकड़ थी और वह ज्ञान का भंडार थीं।''
उन्होंने कहा, ''दूरदर्शन के पर्दे पर उनकी उपस्थिति का एक विशिष्ट प्रभाव था। वह सभी का सम्मान करती थीं और जिस भी क्षेत्र का हिस्सा होती थीं, उसे एक नयी दिशा देती थीं।''
दूरदर्शन नेशनल ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''दूरदर्शन परिवार की ओर से श्रीमती सरला माहेश्वरी को भावभीनी श्रद्धांजलि। वह दूरदर्शन की एक सम्मानित और प्रतिष्ठित समाचार वाचिका थीं, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमामय प्रस्तुति से भारतीय समाचार जगत में एक विशेष स्थान बनाया था। उनकी सादगी, संयम और व्यक्तित्व ने दर्शकों के दिलों में गहरा विश्वास अर्जित किया।''
पिछले साल फरवरी में, माहेश्वरी एक एम्बुलेंस में मतदान केंद्र पहुंची थीं और उन्होंने मतदान के अधिकार के बारे में बात की थी।
उन्होंने अपनी कार में बैठे हुए 'पीटीआई वीडियो' से कहा था, ''मेरा मानना है कि मतदान हम सभी का अधिकार है। प्रत्येक नागरिक को आगे बढ़कर अपना वोट डालना चाहिए क्योंकि यह एक स्वैच्छिक प्रयास है जिसे अवश्य करना चाहिए।''
उनके निजी जीवन या उनकी खराब सेहत के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी।
उनकी सहकर्मी एवं मित्र रिनी साइमन खन्ना ने कहा, '' प्रिय सरला, आपको शांति मिले।''
खन्ना ने इंस्टाग्राम पर कहा, ''सरला माहेश्वरी शांत स्वभाव और उत्कृष्टता की साक्षात मिसाल थीं। शालीनता, मर्यादा और सादगी की प्रतीक, उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि वे कभी ध्यान आकर्षित करने की कोशिश नहीं करती थीं, फिर भी हमेशा सम्मान की पात्र थीं। अपनी मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि और सत्यनिष्ठा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ, वह मीडिया जगत में एक भरोसेमंद व्यक्तित्व के रूप में उभरीं।''
वर्ष 1989 से दूरदर्शन पर माहेश्वरी के सहकर्मी संजीव उपाध्याय ने टीवी स्क्रीन पर उनकी जबरदस्त मौजूदगी और अपने दर्शकों के साथ जुड़ने की क्षमता को याद किया।
उपाध्याय ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''वह शालीनता की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं। टेलीविजन पर उनकी शालीनता, स्पष्ट उच्चारण, समाचार पढ़ने का उनका अंदाज और स्क्रीन पर उनकी उपस्थिति वाकई जबरदस्त थी। एक इंसान के तौर पर, वह बहुत ही दयालु थीं। उनका चेहरा ऐसा था कि हर कोई उन्हें देखकर सोचता था, 'वह हममें से ही एक हैं।' दर्शकों के साथ उनका जुड़ाव अद्भुत था।''
माहेश्वरी की सहकर्मी समाचार वाचिका गजाला अमीन ने याद किया कि वे साथ में समाचार वाचन करने से पहले साड़ियों और रंगों के बारे में चर्चा करती थीं।
अमीन ने 'पीटीआई वीडियो' से कहा, ''क्योंकि हम समाचार कार्यक्रमों के लिए साड़ियां पहनते थे, इसलिए कई बार सरला फोन करके कहती थीं, 'गजाला, तुमने ड्यूटी चार्ट तो देखा ही होगा, हमारा समाचार कार्यक्रम एक साथ हैं, हम सह-प्रस्तोता हैं, इसलिए मुझे बताओ कि तुम किस रंग की साड़ी पहन रही हो ताकि हमारा तालमेल अच्छा बना रहे।''
उन्होंने कहा, ''वह आमतौर पर सीधे पल्लू वाली साड़ी पहनती थी। उन दिनों हम बॉर्डर वाली साड़ियां पहनते थे, और हम इसके बारे में बहुत बातें करते थे और हमारे दर्शक भी इसके बारे में बहुत बातें करते थे।''
एक अन्य सह-प्रस्तोता शीला चमन ने उनकी ''लंबी बातचीत और डीडी के खुशनुमा पलों'' को याद किया।
पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''जब टीवी पर अपनी बात रखने के लिए चिल्लाने की जरूरत नहीं होती थी। सरला माहेश्वरी दूरदर्शन का एक जाना-पहचाना चेहरा थीं, एक ऐसी समाचार वाचिका जिनकी आवाज हमेशा सुकून देने वाली होती थी। ओम शांति।''
पत्रकार सोनल कालरा ने उन्हें उनकी ''शालीनता और संयम'' के लिए याद किया। उन्होंने कहा, ''80 के दशक की लोकप्रिय दूरदर्शन समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का आज दिल्ली में निधन हो गया। उन्हें उनकी सरलता, शालीनता और संयम के लिए लोग याद रखेंगे।''
कांग्रेस की केरल इकाई ने 'एक्स' पर कहा, ''शाम के समाचार बुलेटिन को देखते हुए बड़ी हुई पूरी पीढ़ी के लिए, उनकी शांत मौजूदगी और सरल स्वभाव दैनिक जीवन का हिस्सा बन गए थे। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। ओम शांति!''
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस ने 'एक्स' पर पोस्ट किया कि ''उनका निधन टेलीविजन पत्रकारिता के एक स्वर्णिम युग का अंत है''।
माहेश्वरी को अन्य कारणों से भी याद किया जाता है।
दूरदर्शन में समाचार वाचिका के रूप में अपना करियर बनाने के साथ-साथ, माहेश्वरी ने 1970 के दशक में दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में हिंदी भी पढ़ाई।
खेल लेखक और पूर्व छात्र वी. कृष्णास्वामी ने उन्हें ''बहुत धैर्यवान शिक्षिका'' के रूप में याद किया।
उन्होंने कहा, ''1979 के आसपास वह हंसराज कॉलेज में हिंदी पढ़ाती थीं। हालांकि मेरा उनसे व्यक्तिगत रूप से ज्यादा संपर्क नहीं था, लेकिन मुझे याद है कि वह बहुत ही मिलनसार और दोस्ताना स्वभाव की इंसान थीं। कई छात्र ऐसे थे जिन्हें हिंदी समझने में कठिनाई होती थी, वह उनके साथ बहुत धैर्य और संयम से पेश आती थीं। आप सीधे उनके पास जाकर उनसे बात कर सकते थे।''
भाषा
देवेंद्र पवनेश
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