केरल उच्च न्यायालय ने निष्कासित कांग्रेस विधायक को यौन उत्पीड़न के पहले मामले में अग्रिम जमानत दी
प्रशांत
- 12 Feb 2026, 04:33 PM
- Updated: 04:33 PM
कोच्चि, 12 फरवरी (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने कांग्रेस से निष्कासित विधायक राहुल ममकूटाथिल को उनके खिलाफ बलात्कार और जबरन गर्भपात के एक मामले में बृहस्पतिवार को अग्रिम जमानत दे दी।
अदालत ने ममकूटाथिल को जमानत देते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा है कि उनसे हिरासत में पूछताछ आवश्यक थी।
न्यायमूर्ति कौसर एडप्पागथ ने पलक्कड़ विधायक को राहत देते हुए कहा कि इस मामले में शिकायतकर्ता का आचरण ''प्रथम दृष्टया उसके और ममकूटाथिल के बीच सहमति से यौन संबंध का संकेत देता है'', हालांकि इस पर अंतिम निर्णय मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही किया जाएगा।
उच्च न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ता एक विवाहित और परिपक्व महिला है और जब तक वह खुद शारीरिक संबंध बनाने को तैयार न हो, यह ''विश्वास करना मुश्किल है'' कि वह विधायक को अपने अपार्टमेंट में आमंत्रित करेगी और बाद में उसके साथ रहने के लिए पलक्कड़ की यात्रा करेगी।
अदालत ने कहा, ''इन अवसरों पर किसी भी समकालीन शिकायत का अभाव इस अनुमान को और बल प्रदान करता है।''
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि ममकूटाथिल और शिकायतकर्ता के बीच व्हाट्सएप चैट के साथ-साथ उसके और विधायक के दोस्त (मामले में दूसरे आरोपी) के बीच की चैट ''एक गहन व्यक्तिगत संबंध को दर्शाते हैं और इसमें किसी भी प्रकार के दबाव या बल प्रयोग का संकेत नहीं मिलता है''।
अदालत ने कहा, ''असफल रिश्ते में सहमति से किए गए हर यौन संबंध को बलात्कार नहीं कहा जा सकता। जहां दो वयस्क स्वेच्छा से यौन संबंध बनाने के लिए सहमत होते हैं और लंबे समय तक ऐसा करते रहते हैं, तो इसे केवल आपसी सहमति या अनैतिकता का कार्य माना जा सकता है, न कि एक साथी द्वारा दूसरे के खिलाफ यौन हमला।''
उच्च न्यायालय ने कहा, ''उच्चतम न्यायालय ने सहमति से बने संबंधों को तोड़ने को अपराध घोषित करने के लिए बलात्कार कानूनों का सहारा लेने की हालिया प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।''
विधायक के खिलाफ जबरन गर्भपात के आरोपों के संबंध में उच्च न्यायालय ने पाया कि शिकायतकर्ता और दूसरे आरोपी के बीच व्हाट्सएप चैट के अनुसार महिला ने अंततः गर्भपात कराने के लिए सहमति दी थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि व्हाट्सएप चैट से यह भी पता चलता है कि शिकायतकर्ता ने खुद गर्भपात की गोलियों का अनुरोध किया था, अपना स्थान साझा किया था और दूसरे आरोपी से दवा प्राप्त की थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि इन परिस्थितियों से प्रथम दृष्टया यह संकेत मिलता है कि महिला ने स्वेच्छा से गोलियों का सेवन किया था और भारतीय न्याय संहिता की धारा 89 (महिला की सहमति के बिना गर्भपात कराना) लागू होने के लिए यह कृत्य उसकी सहमति के बिना हुआ होना चाहिए।
अभियोजन पक्ष ने अग्रिम जमानत याचिका का कई आधारों पर विरोध किया था, जिसमें यह भी शामिल था कि विधायक कथित तौर पर उसी तौर-तरीके से महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न करने के आदी थे और उसके खिलाफ दर्ज तीन प्राथमिकी इस बात की पुष्टि करती हैं।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी अपराध के आरोपी व्यक्ति के नैतिक गुण या उनके अभाव को अदालत के समक्ष उठाए गए किसी भी मुद्दे की वैधता तय करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
अदालत ने कहा, ''कानून और नैतिकता एक दूसरे के समतुल्य नहीं हैं।''
उच्च न्यायालय ने उन्हें कई शर्तों के अधीन अग्रिम जमानत दी, जिनमें यह शर्त भी शामिल थी कि वह 16 फरवरी को जांच अधिकारी के समक्ष पेश होंगे, अपने मोबाइल फोन जमा करेंगे और अगर आवश्यक हुआ तो अगले तीन दिनों तक प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक पूछताछ के लिए उपस्थित होंगे।
भाषा सुरभि प्रशांत
प्रशांत
1202 1633 कोच्चि