ओडिशा में विपक्षी दलों ने 12 फरवरी को होने वाली हड़ताल के लिए जनता का समर्थन मांगा
नरेश
- 11 Feb 2026, 07:37 PM
- Updated: 07:37 PM
भुवनेश्वर, 11 फरवरी (भाषा) ओडिशा में विपक्षी दलों और कई केंद्रीय मजदूर संघ ने बृहस्पतिवार को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए लोगों से समर्थन की अपील की है, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे "राजनीतिक अवसरवाद" करार दिया है।
यह हड़ताल सीटू, एआईटीयूसी, इंटक, एचएमएस, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी सहित 10 केंद्रीय मजदूर संघ द्वारा बुलाई गई है।
मजदूर संगठनों ने नई श्रम संहिताओं, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और मनरेगा के स्थान पर नयी व्यवस्था लागू किए जाने जैसे मुद्दों के विरोध में यह आह्वान किया है।
ओडिशा में कांग्रेस, वामदलों और उनके सहयोगी संगठनों ने इस हड़ताल का समर्थन किया है।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की राज्य इकाई के सचिव सुरेश पाणिग्रही ने बुधवार को कहा, "हम ओडिशा के लोगों से अपील करते हैं कि वे किसानों, मजदूरों और व्यापारियों की सुरक्षा के लिए आयोजित इस हड़ताल का समर्थन करें।"
ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने एक बयान में मनरेगा को हटाकर 'विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025' लागू किए जाने का विरोध किया और नयी श्रम संहिताओं पर भी आपत्ति जताई।
उन्होंने सभी से हड़ताल का समर्थन करने की अपील की।
वहीं, भाजपा के ओडिशा इकाई के प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने दावा किया कि जो लोग दशकों से श्रम मुद्दों को राजनीतिक साधन और अस्तित्व का जरिया मानते रहे हैं, वे अब वास्तविक सुधार लागू होने पर विरोध और हड़ताल का सहारा ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि श्रम संहिताओं की आलोचना राजनीति से प्रेरित है, न कि श्रमिकों की चिंता से।
बिस्वाल ने कहा, "उनकी चिंता श्रमिकों का कल्याण नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक जमीन खिसकने की है। जब वास्तविक बदलाव सीधे श्रमिकों को सशक्त बनाते हैं, तब आंदोलन की राजनीति पर फलने-फूलने वाले लोग असहज हो जाते हैं।"
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि दशकों तक कांग्रेस ने पुराने कानूनों के जरिए श्रमिकों को असंगठित क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा और न्यूनतम वेतन संरक्षण से वंचित रखा।
उन्होंने कहा, "अब जब सुधार सामाजिक सुरक्षा के दायरे का विस्तार करने, रोजगार को औपचारिक बनाने और नौकरियां सृजित करने का लक्ष्य रखते हैं, तब वे तथ्यों की बजाय भय फैलाने का रास्ता चुन रहे हैं। भारत की कार्यशक्ति को आधुनिकीकरण और अवसर चाहिए, न कि राजनीतिक अवरोध।"
बिस्वाल ने नयी श्रम संहिताओं पर कहा कि ये बिखरे हुए कानूनों से एकीकृत दृष्टिकोण की ओर ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक हैं।
उन्होंने कहा, "न्यूनतम वेतन की गारंटी, गिग श्रमिकों तक सामाजिक सुरक्षा का विस्तार और कार्यस्थल सुरक्षा को मजबूत कर ये सुधार श्रमिकों और उद्योग दोनों को सशक्त बनाते हैं। यह केवल नीतिगत सुधार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भर भारत के प्रति प्रतिबद्धता है।"
इस बीच, एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने बंद के दौरान सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए हैं और संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे।
इंटक ओडिशा के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद रामचंद्र खुंटिया ने बयान जारी कर श्रमिकों, कृषि मजदूरों, छात्रों और युवाओं से हड़ताल को सफल बनाने का आह्वान किया।
मजदूर संघ के नेताओं के अनुसार, हड़ताल के दौरान बैंकिंग, सार्वजनिक परिवहन, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक उपक्रमों में व्यवधान की आशंका है। भुवनेश्वर, कटक और जिला मुख्यालयों सहित प्रमुख शहरी केंद्रों के बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि हड़ताल के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
भाषा राखी नरेश
नरेश
1102 1937 भुवनेश्वर