जम्मू कश्मीर विस : मुख्यमंत्री के अपनी टिप्पणियों पर खेद जताने के बाद व्यवस्था बहाल
नरेश
- 11 Feb 2026, 03:32 PM
- Updated: 03:32 PM
(तस्वीरों के साथ)
जम्मू, 11 फरवरी (भाषा) मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा की कार्यवाही के दौरान की गई अपनी टिप्पणियों पर बुधवार को खेद व्यक्त किया जिसके बाद जम्मू कश्मीर विधानसभा में व्यवस्था बहाल हो गयी।
इससे पहले अब्दुल्ला की टिप्पणियों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने विधानसभा में खूब हंगामा किया था।
भाजपा विधायक बुधवार को जम्मू कश्मीर विधानसभा में अध्यक्ष के आसन के पास आ गए और उनके खिलाफ की गयी ''असंसदीय टिप्पणियों'' को लेकर अब्दुल्ला से माफी की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। भाजपा सदस्यों ने इस मुद्दे को लेकर सदन से बहिर्गमन भी किया।
जब भाजपा सदस्य नारे लगा रहे थे, तभी मुख्यमंत्री बयान देने के लिए सदन में दाखिल हुए जिसके बाद अध्यक्ष ने विरोध कर रहे सदस्यों को अपनी सीटों पर लौटने के लिए कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''कभी-कभी गर्मागर्मी में बातें कह दी जाती हैं। मेरी बातों से उन्हें दुख पहुंचा है तो मैं खेद जताता हूं।''
हालांकि, अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने जो कुछ भी कहा, वह उनके बारे में था और उन्होंने उनके परिवार के किसी भी सदस्य को इसमें शामिल नहीं किया।
अब्दुल्ला ने कहा, ''मैंने उनके किसी रिश्तेदार का जिक्र नहीं किया। उनके 'फील्ड कमांडर'(एलओपी) ने इस मामले में मेरे माता-पिता और मेरे दिवंगत दादाजी को घसीट लिया लेकिन उसे भी जाने दें। मैं उसे नजरअंदाज करना चाहता हूं।'' उन्होंने प्रदर्शनकारियों में विपक्ष के नेता (एलओपी) की अनुपस्थिति की आलोचना की और कहा कि संकट के समय उनके 'फील्ड कमांडर' ने उनका साथ छोड़ दिया, लेकिन "मैं उनके डटे रहने के लिए उन्हें सलाम करता हूं।''
उन्होंने कहा, ''जितना मुझे अपने विधायकों की परवाह है, उतनी ही मुझे उनकी भी परवाह है। अगर मैं कहता हूं कि मैं जम्मू कश्मीर का निर्वाचित मुख्यमंत्री हूं, तो मैं यहां के मतदाताओं (सत्ता पक्ष) के साथ-साथ उनके मतदाताओं (विपक्ष) का भी प्रतिनिधित्व करता हूं।''
अब्दुल्ला ने कहा, ''आज सुबह तक उनके सभी प्रश्न लंबित थे। हमारे लिए यह बहुत आसान होता; कई ऐसे प्रश्न थे जिनका उत्तर देना हमारे लिए मुश्किल हो सकता था। अब इस हंगामे के कारण, वे प्रश्न अनुत्तरित ही रह जाएंगे। और मंत्री जी ने बिल्कुल सही कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसे विभाग बहुत महत्वपूर्ण हैं। मैं नहीं चाहता कि उनके मतदाता उपेक्षित महसूस करें।''
अध्यक्ष को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ''मैं इसे आप पर छोड़ता हूं। यदि मैंने कल अपने भाषण में किसी असंसदीय शब्द का प्रयोग किया है, तो उसे रिकॉर्ड से हटाया जा सकता है। मुझे कोई आपत्ति नहीं है।''
इससे पहले, सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा खड़े हुए और मांग की कि सदन के नेता को माफी मांगनी चाहिए या मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में अध्यक्ष द्वारा एक बयान जारी किया जाना चाहिए।
शर्मा ने कहा, ''ऐसी घटना पहले नहीं देखी गयी। मुख्यमंत्री और सदन के नेता द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा किसी भी सदन में इस्तेमाल करने योग्य नहीं है... मैं सदन के नेता से पूछना चाहता हूं कि क्या वे कल इस सदन में भाजपा विधायक दल के बारे में इस्तेमाल किए गए अपने शब्दों को वापस लेते हैं?''
उन्होंने कहा, ''अगर वह इन्हें वापस नहीं लेते हैं, तो हम इसे उनकी अंतरात्मा पर छोड़ते हैं - उनकी अंतरात्मा उन्हें क्या कहती है - कि इस सदन में प्रयुक्त शब्द उचित थे या नहीं। यदि मुख्यमंत्री यहां उपस्थित नहीं हैं, तो मैं इसे अध्यक्ष पर छोड़ता हूं और उन्हें इस पर प्रतिक्रिया देनी होगी। इस मामले पर कुछ कहना आपकी जिम्मेदारी है।''
अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने भाजपा सदस्यों को यह समझाने की कोशिश की कि प्रश्नकाल को जारी रहने दिया जाए और सदन के नेता के उपस्थित होने पर इस मुद्दे को उठाया जाए।
अध्यक्ष ने कहा, ''कल (मंगलवार को) जो कुछ भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था। मुख्यमंत्री को आने दीजिए और अगर वह चाहें तो बयान दे सकते हैं। मैं उनकी ओर से बयान नहीं दे सकता।''
स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने भी विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के खिलाफ असंसदीय शब्दों का प्रयोग करने का भाजपा सदस्यों पर आरोप लगाया।
चौधरी ने अध्यक्ष को सुझाव दिया कि दोनों पक्षों द्वारा प्रयुक्त सभी असंसदीय शब्दों की जांच की जाए और कार्यवाही को बिना किसी व्यवधान के जारी रखने के लिए इन्हें रिकॉर्ड से हटा दिया जाए।
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने इस सुझाव का विरोध किया और बाद में ''अपमानजनक सरकार है'', ''असंसदीय सरकार है'' और ''भारत माता की जय'' जैसे नारे लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
मंगलवार को सदन में अब्दुल्ला के भाषण के दौरान उस समय हंगामा मच गया जब भाजपा सदस्यों ने उनकी कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और माफी मांगने की मांग की।
अब्दुल्ला इस केंद्र शासित प्रदेश के छह फरवरी को पेश किए गए बजट पर चर्चा समाप्त कर रहे थे, तभी भाजपा सदस्यों ने उनके द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को ''असंसदीय'' करार दिया।
मुख्यमंत्री ने भाजपा सदस्यों से अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया और कहा कि वह अपने शब्दों को वापस लेने को तैयार हैं, लेकिन बार-बार हो रहे व्यवधानों के कारण उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
वहीं, शर्मा ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री सदन में बिना शर्त माफी नहीं मांग लेते, तब तक पार्टी सदन की कार्यवाही को जारी रखने नहीं देगी।
भाषा गोला नरेश
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