न्यायालय ने गलत बाल काटने पर मुआवजा राशि घटाकर 25 लाख रु. की
नरेश
- 11 Feb 2026, 03:20 PM
- Updated: 03:20 PM
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली के आईटीसी मौर्या होटल के सैलून में ''गलत बाल काटने'' पर एक महिला को दी जाने वाली मुआवजा राशि को दो करोड़ रुपये से घटाकर 25 लाख रुपये कर दिया है।
न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति मनमोहन की अगुवाई वाली पीठ ने छह फरवरी को व्यवस्था दी कि बेशक "सेवा में खामी" सिद्ध हो चुकी है, फिर भी उपभोक्ता विवादों में मुआवजा केवल "ठोस साक्ष्यों" पर आधारित होना चाहिए न कि शिकायतकर्ता की "महज मांग" या "हठ" पर।
न्यायमूर्ति बिंदल ने 34 पृष्ठों में लिखे फैसले में कहा, "क्षतिपूर्ति केवल शिकायतकर्ता की धारणाओं या हठ पर नहीं दी जा सकती। खासकर जब दावा करोड़ों रुपये का हो, तो मुआवजा देने के लिए कुछ विश्वसनीय और ठोस सबूत पेश करना जरूरी है।''
फैसले में कहा गया कि यह कोई ऐसा मामला नहीं है जहां राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग किसी छोटे मुद्दे पर विचार कर रहा हो और मुआवजा केवल सामान्य नियम या अनुमान के आधार पर दिया जा सके।
इसने कहा, ''मुआवजे का दावा करोड़ों रुपये का था, जिसके लिए यह साबित करना आवश्यक था कि सेवा में कमी के कारण प्रतिवादी को कुछ आर्थिक नुकसान हुआ। इसे केवल दस्तावेजों की फोटोकॉपी पेश करके साबित नहीं किया जा सकता। प्रतिवादी द्वारा रिकॉर्ड पर पेश की गई फोटोकॉपी में उन विसंगतियों को ध्यान में रखा गया है जिनके बारे में अपीलकर्ता द्वारा बताया गया...इसलिए, पुनर्विचार के बाद भी प्रतिवादी इतनी बड़ी क्षतिपूर्ति राशि देने के लिए कोई ठोस आधार साबित नहीं कर पाया है।''
अदालत ने माना कि दस्तावेजों की फोटोकॉपी का मूल्यांकन करते समय, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने दो करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने का फैसला देने में गलती की।
आदेश में कहा गया, ''आयोग का यह तर्क कि प्रतिवादी को हुए मानसिक आघात के कारण उसने मूल दस्तावेज नहीं रखे होंगे और इसलिए फोटोकॉपी पर भरोसा किया जा सकता है, इतनी बड़ी रकम देने के लिए पर्याप्त नहीं है।''
इसने कहा कि अगर फोटोकॉपी प्रस्तुत भी कर दी जाए, तो भी उस आधार पर किए गए दावे को सही ठहराने के अन्य तरीके मौजूद हैं।
न्यायालय ने कहा, ''भले ही दीवानी प्रक्रिया संहिता सख्ती से लागू न हो, लेकिन आयोग ने यह आकलन नहीं किया है कि प्रतिवादी को दो करोड़ रुपये का नुकसान भला कैसे हुआ। विवादित फैसले में की गई सामान्य चर्चा इसे उचित नहीं ठहरा सकती।''
अप्रैल 2018 में प्रबंधन पेशेवर अशना रॉय दिल्ली के आईटीसी मौर्या होटल के सैलून गई थीं। रॉय ने आरोप लगाया कि हेयर स्टाइलिस्ट ने उनके कहने के विपरित बाल छोटे काट दिए, जिससे उन्हें मानसिक आघात लगा और करियर के अवसरों से हाथ धोना पड़ा।
एनसीडीआरसी ने शुरू में उन्हें दो करोड़ रुपये दिए जाने का फैसला सुनाया था।
भाषा खारी नरेश
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