जम्मू कश्मीर में बहने वाली चंद्रा और भागा नदियों में सुरंग बनाने की राज्यसभा में उठी मांग
अविनाश
- 11 Feb 2026, 02:59 PM
- Updated: 02:59 PM
नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) जम्मू कश्मीर में बहने वाली चंद्रा और भागा नदियों में सुरंग बनाने की मांग करते हुए बुधवार को राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी के घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि यह सुरंग बनने से सतलुज नदी में इन दोनों नदियों का पानी आएगा तथा पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को बहुत राहत मिलेगी।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए तिवाड़ी ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सबसे बड़ा प्रहार पाकिस्तान पर सिंधु जल संधि को निलंबित कर किया।
उन्होंने कहा कि 1960 में कराची में इस संधि पर पंडित जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान के बीच हस्ताक्षर हुए थे जिसके अनुसार पश्चिमी नदियां चेनाब, झेलम और सिंधु का 80 फीसदी पानी पाकिस्तान को दिया गया। तिवाड़ी ने कहा कि संधि के अनुसार पूर्वी नदियों सतलुज, रावी और व्यास का पानी हिन्दुस्तान को दिया गया।
तिवाड़ी ने कहा कि संधि के तहत भारत को केवल बीस फीसदी पानी मिला। उन्होंने कहा ''संधि के तहत, भारत को सिंधु नदी के कुल पानी का लगभग 20 फीसदी हिस्सा मिला। भारत को तीन पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलुज का पूर्ण अधिकार मिला है, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब का 80 फीसदी पानी मिला। है।''
भाजपा सदस्य ने कहा कि पाकिस्तान में पंजाब और सिंध की पूरी सिंचाई होने के बाद से सिंधु, झेलम और चिनाब का 22 मिलियन एकड़ फुट (एमएएफ) पानी समुद्र में जाता रहा। यह पानी की बहुत अधिक मात्रा है।
तिवाड़ी ने कहा कि संधि में हर तीन साल में इसके पुनरावलोकन का प्रावधान किया गया था पर पाकिस्तान सहमत नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में आने के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान सरकार को संधि के पुनरावलोकन के लिए दो बार पत्र लिखा था लेकिन पड़ोसी देश नहीं माना।
उन्होंने कहा कि पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम हमले के बाद मोदी सरकार ने संधि को निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा ''यह केवल समुद्र में बह जाने वाले 22 एमएएफ पानी के लिए नहीं किया गया।''
तिवाड़ी ने कहा कि अगर जम्मू कश्मीर में बहने वाली चंद्रा और भागा नदियों में सुरंग बना दी जाए तो इन नदियों का पानी सतलुज नदी में आ जाएगा।
उन्होंने कहा ''सतलुज नदी से यह पानी भारत वाले हिस्से में, रावी व व्यास में आएगा तथा हमारा पानी तीन एमएएफ बढ़ जाएगा। इससे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को बहुत राहत मिलेगी। पानी से राजस्थान का बड़ा हिस्सा सीकर, झुंझनू, चूरू, नागौर आदि को मदद मिलेगी क्योंकि ये इलाके बेहद सूखे हैं।''
शून्यकाल में ही भाजपा के बाबूभाई जेसंगभाई देसाई ने डिजिटल प्लेटफार्म के विनियमन की मांग करते हुए कहा कि सोशल मीडिया बच्चों, किशोरों और युवाओं के मन पर गहरा असर डाल रहा है।
उन्होंने कहा ''सोशल मीडिया जीवन का हिस्सा बन गया है और दिक्कत यह है कि सोशल मीडिया की नकारात्मक बातें बच्चों, किशोरों और युवाओं पर अधिक प्रभाव डालती हैं, जबकि उनकी रचनात्मक ऊर्जा उनके और देश के विकास के लिए उपयोगी हो सकती है।''
देसाई ने कहा कि बच्चों, किशोरों और युवाओं को इन नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए सोशल मीडिया को विनियमित करना जरूरी है और सरकार को इस ओर जरूर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने सरकार से सशक्त नियामक ढांचा बनाने तथा डिजिटल सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरुकता अभियान चलाने की भी मांग की।
इसी पार्टी के डॉ लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मेरठ में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स स्थापित करने की मांग की।
उन्होंने कहा ''उत्तर प्रदेश में अभी गोरखपुर और रायबरेली में एम्स कार्यरत हैं लेकिन राज्य की आबादी को देखते हुए मेरठ में भी एम्स जरूरी है। न केवल उत्तर प्रदेश के, बल्कि आसपास के राज्यों के मरीज भी गोरखपुर और रायबरेली के एम्स में आते हैं।''
बाजपेयी ने कहा कि अगर मेरठ में फिलहाल एम्स स्थापित नहीं किया जा सकता तो वहां स्नातकोत्तर चिकित्सा संस्थान या ऐसी ही उच्च-स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था वाले संस्थान की स्थापना की जाए जो बेहतरीन इलाज के साथ ही उच्च-स्तरीय चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और विशेषज्ञ देखभाल (सुपर-स्पेशलिटी) भी प्रदान कर सके।
समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने उत्तर प्रदेश में कुत्तों और बंदरों के उत्पात का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग कुत्तों और बंदरों के हमलों का शिकार हो रहे हैं और फिर उनका इलाज चलता है।
उन्होंने कहा कि बार-बार मना करने के बावजूद लोग आवारा कुत्तों और बंदरों को खाद्य सामग्री देते हैं और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है।
जनता दल (यूनाइटेड) के संजय कुमार झा ने बिहार के दरभंगा हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित करने और इसके 12 हजार फुट तक विस्तार की मांग की।
तेदेपा के मस्तान राव यादव बीधा ने भी शून्यकाल के दौरान अपना मुद्दा उठाया।
भाषा
मनीषा अविनाश
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