तेलंगाना में एफएसएल अग्निकांड की जांच में कई शीर्ष संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए: डीजीपी
पवनेश
- 10 Feb 2026, 09:18 PM
- Updated: 09:18 PM
हैदराबाद, 10 फरवरी (भाषा) तेलंगाना में फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की इमारत में पिछले हफ्ते आग लगने की वजहों का पता लगाने के लिए जारी जांच में केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) और नागपुर स्थित राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा इंजीनियरिंग संस्थान (एनआईएफएसई) जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ भी शामिल हो गए हैं। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी शिवधर रेड्डी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
रेड्डी ने विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की इन आशंकाओं को "पूरी तरह से गलत" करार दिया कि एफएसएल में लगी आग में साल 2015 के 'वोट के बदले नकदी' मामले सहित कई हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़े साक्ष्य नष्ट हो गए।
डीजीपी ने कहा, "कुछ लोगों ने बयान दिया कि एफएसएल अग्निकांड में एक महत्वपूर्ण मामले (वोट के बदले नकदी) से संबंधित सामग्री नष्ट हो गई। यह पूरी तरह से गलत है और ऐसी कोई सामग्री नष्ट नहीं हुई है।"
अधिकारियों ने बताया था कि हैदराबाद में एफएसएल भवन की पहली मंजिल पर सात फरवरी को लगी आग में वहां स्थित कंप्यूटर फोरेंसिक प्रयोगशाला, उससे जुड़ी सुविधाओं, प्रशिक्षण कक्ष और कुछ अन्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।
एफएसएल निदेशक शिखा गोयल ने आठ फरवरी को इस बात से इनकार किया था कि 'वोट के बदले नकदी' और फोन टैपिंग जैसे हाई-प्रोफाइल मामलों से संबंधित सबूत प्रयोगशाला में लगी आग में नष्ट हो गए थे।
अग्निकांड की जांच के बारे में पूछे जाने पर डीजीपी ने यहां संवाददाताओं से कहा कि सीएफएसएल और एनआईएफएसई नागपुर के विशेषज्ञ हैदराबाद पहुंच गए हैं और उन्होंने अपनी जांच शुरू कर ली है।
उन्होंने कहा, "विशेषज्ञ अग्निकांड की गहन जांच कर रहे हैं। हम रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। हमें ज्यादा नुकसान की आशंका नहीं है और अगर कुछ नुकसान हुआ भी है, तो हम सर्वर के जरिये उसे फिर से हासिल करने की कोशिश करेंगे। स्थानीय एफएसएल टीम के साथ विशेषज्ञ सर्वर से डेटा फिर से हासिल करने के प्रयास में जुटे हुए हैं।"
रेड्डी ने भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) की ओर से 2015 में दर्ज 'वोट के बदले नकदी' मामले का जिक्र करते हुए कहा कि मामले से जुड़ी सभी सामग्री पहले ही अदालत में स्थानांतरित कर दी गई थी और आग लगने के समय उससे संबंधित कोई भी वस्तु एफएसएल में मौजूद नहीं थी।
उन्होंने कहा कि इसी तरह फोन टैपिंग मामले से जुड़ी सामग्री संबंधित प्राधिकरण को सौंपी जा चुकी है।
'वोट के बदले नकदी' मामले मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी (जो 2015 में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के विधायक थे) के खिलाफ विधान परिषद चुनाव के लिए एक मनोनीत विधायक को रिश्वत देने की कोशिश करने के आरोपों से संबंधित है।
वहीं, फोन टैपिंग मामला पूर्ववर्ती बीआरएस सरकार के दौरान नेताओं, व्यापारियों, पत्रकारों, न्यायपालिका के सदस्यों और अन्य प्रमुख व्यक्तियों के फोन टैप किए जाने के आरोपों से जुड़ा हुआ है।
भाषा पारुल पवनेश
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