जम्मू कश्मीर विधानसभा में हंगामा, भाजपा विधायकों ने मुख्यमंत्री की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई
दिलीप
- 10 Feb 2026, 08:35 PM
- Updated: 08:35 PM
जम्मू, 10 फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को विधानसभा में अपनी कुछ टिप्पणियों के लिए भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों से माफी मांगने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वह अपने शब्द वापस लेने को तैयार थे, लेकिन बार-बार व्यवधान पैदा कर सदन में उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा अब माफी मांगने का कोई सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि ये बातें पहले से ही रिकॉर्ड में दर्ज हो चुकी हैं।
इससे पहले, दिन में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भाषण के दौरान हंगामा देखने को मिला। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने मुख्यमंत्री की कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और उनसे माफी मांगने की मांग की। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने दिनभर के लिये विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी।
भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का जिक्र करते हुये मुख्यमंत्री ने दावा किया कि कहा कि यह जम्मू-कश्मीर के हितों के लिए नुकसानदायक है।
मुख्यमंत्री ने भाषण के दौरान व्यवधान पैदा करने वाले भाजपा के विधायकों खिलाफ भी कुछ टिप्पणियां की।
इसके बाद भाजपा विधायक खड़े हो गए और अब्दुल्ला की टिप्पणियों को 'असंसदीय' बताते हुए आगे की कतार में खड़े हो गए। उन्होंने मुख्यमंत्री से माफी की मांग करते हुए उनके खिलाफ नारे लगाए।
विधानसभा के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में अब्दुल्ला ने कहा, ''अगर उन्होंने (भाजपा सदस्यों) मुझे बोलने दिया होता, तो मैं स्वयं ही अपने शब्द वापस ले लेता। मैं उन्हें वापस लेने और वही बात दूसरे तरीके से कहने को तैयार था, लेकिन उन्होंने मुझे बोलने ही नहीं दिया।''
उन्होंने कहा, ''मांफी मांगने का अब कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। जो कहा गया है वह पहले से ही रिकॉर्ड में है। उन्होंने मुझे क्या एक सेकंड भी बोलने दिया। मैं वहां यह कहने के लिए खड़ा था कि ठीक है, मैं अपने शब्द वापस ले लूंगा और वही बात दूसरे तरीके से कहूंगा। लेकिन, चूंकि उन्होंने मुझे बोलने नहीं दिया, इसलिये माफी मांगने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है।''
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जम्मू-कश्मीर के हितों के लिए नुकसानदायक होने के उनके बयान के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने कहा, ''अगर आप अभी देखें – शाहबलूत, सूखे मेवे, ताजे फल, डेयरी उत्पाद – अगर इनका शुल्क मुक्त आयात किया जाता है, तो हमारे पास क्या बचता है।''
उन्होंने कहा, ''हमारे पास कोई समुद्री उद्योग नहीं है, कोई समुद्री भोजन नहीं है । हमारे पास जो है, वह है बागवानी – सूखे मेवे, अखरोट, बादाम, केसर, सेब, कीवी… बस यही है हमारे पास। अब, अगर ये सभी चीजें अमेरिका से शुल्क मुक्त आने लगीं, तो जम्मू-कश्मीर को नुकसान होना तय है।''
भाषा रंजन रंजन दिलीप
दिलीप
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